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नहीं मिल पा रहा कृषि फार्म का कोई लाभ

Fri, 19 Feb 2016 11:27 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 19 Feb 2016 11:27 PM IST
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Not being able to find any benefit of agricultural farm
1958 में लगभग 21 बीघा क्षेत्रफल में स्थापित राजकीय कृषि परिक्षेत्र फरीदपुर में न तो बाउंड्रीवॉल का निर्माण हो सका है और न ही यहां चौकीदार की तैनाती की जा सकी है।
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ट्रैक्टर न होने से किराए के ट्रैक्टर से जुताई का कार्य किया जाता है। सिंचाई के लिए बनाई गई नालियां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस तरफ कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया जा सका है।
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केंद्र व प्रदेश सरकारें किसानों को सच्चा हितैषी होने का दावा तो बढ़ चढ़कर करती हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठातीं। फसलों की उपज अच्छी हो, इसके लिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए राजकीय कृषि परिक्षेत्र की स्थापना जगह जगह कराई गई है।
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इसी के तहत वर्ष 1958 में जिले के भीटी विकास खंड के फरीदपुर गांव में लगभग 21 बीघा क्षेत्रफल में प्रमाणित एवं आधारीय बीज उत्पादन के लिए कृषि फार्म की स्थापना की गई थी। इस कृषि फार्म पर धान व गेहूं के बीज का उत्पादन किए जाने का प्राविधान है। उत्पादित बीज को फैजाबाद भेज दिया जाता है।

आलम यह है कि अब तक यहां बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं हो सका है। सुरक्षा के लिए सिर्फ कंटीले तारों से ही घेराबंदी की गई है। यहां स्थापित नलकूप में मात्र तीन इंच की बोरिंग की गई है, जिससे सुचारु रूप से सिंचाई नहीं हो पाती है। एक नई बोरिंग का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है।

परिसर स्थित आवासीय भवन व गोदाम भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसे दुरुस्त कराए जाने की मांग भी लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन उसे पूरा नहीं किया जा सका है। एक चौकीदार व दो मजदूर की तैनाती भी अब तक नहीं हो सकी है। जुताई के लिए न तो ट्रैक्टर है और न ही ट्रैक्टर चालक की तैनाती हो सकी है।


नतीजा यह है कि किराए के ट्रैक्टर से जुताई कराई जाती है। फसलों को जंगली जानवर से बचाने के लिए बंदूक तो उपलब्ध करा दी गई है, लेकिन अब तक उसका कभी भी उपयोग नहीं किया जा सका है, जिससे उसमें जंग लग चुकी है। सिंचाई के लिए बनाई गई नालियां भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
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