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महरीपुर नहर में डूबते डूबते बचे चार वनरोज
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अंबेडकरनगर के मखदूमसराय में पक्की नहर में फंसे वनरोजों को निकालते ग्रामीण।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। टांडा तहसील क्षेत्र का महरीपुर पंप नहर जानवरों व लोगों के लिए किसी मौत के कुएं से कम नहीं है। अब तक इसमें कई जानवर गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसी क्रम में शनिवार रात हिथूरी दाउदपुर के पास चार वनरोज (नीलगाय) नहर को पार करने के चक्कर में पानी में गिर गई। सुबह ग्रामीणों के अथक प्रयास के बाद भी उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। बाद में सूचना पर पहुंचे फायर कर्मियों की मदद से वनरोज को बाहर निकाल लिया गया।
पिछले दिनों महरीपुर पंप नहर के किनारे पक्कीकरण का कार्य कराया गया है। इससे होने वाले कटान से तो लोगों को राहत मिल गई, लेकिन जानवरों आदि के लिए यह घातक सिद्ध हो रहा है। इसी क्रम में शनिवार रात हिथूरी दाउदपुर के पास कैनल को पार करने के चक्कर में चार वनरोज नहर में गिर गई। चारों काफी प्रयास के बाद भी नहर से बाहर नहीं निकल सकीं। इसी चक्कर में चारों के पैर भी चोटहिल हो गए।
सुबह जब ग्रामीण नहर की ओर गए तो वनरोजों को पानी में तैरता देखकर घटना की जानकारी हुई। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। जानकारी के बाद आए डायल 100 कर्मियों के पास बचाव का कोई संसाधन न होने के चलते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। बाद में फायर बिग्रेड कर्मियों ने ग्रामीणों अच्छेलाल, जुम्मन, हिमायतुल्लाह, इन्द्रजीत आदि ने रस्से के मदद से चारों को बाहर निकालने में सफलता पाई।
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पिछले दिनों महरीपुर पंप नहर के किनारे पक्कीकरण का कार्य कराया गया है। इससे होने वाले कटान से तो लोगों को राहत मिल गई, लेकिन जानवरों आदि के लिए यह घातक सिद्ध हो रहा है। इसी क्रम में शनिवार रात हिथूरी दाउदपुर के पास कैनल को पार करने के चक्कर में चार वनरोज नहर में गिर गई। चारों काफी प्रयास के बाद भी नहर से बाहर नहीं निकल सकीं। इसी चक्कर में चारों के पैर भी चोटहिल हो गए।
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सुबह जब ग्रामीण नहर की ओर गए तो वनरोजों को पानी में तैरता देखकर घटना की जानकारी हुई। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। जानकारी के बाद आए डायल 100 कर्मियों के पास बचाव का कोई संसाधन न होने के चलते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। बाद में फायर बिग्रेड कर्मियों ने ग्रामीणों अच्छेलाल, जुम्मन, हिमायतुल्लाह, इन्द्रजीत आदि ने रस्से के मदद से चारों को बाहर निकालने में सफलता पाई।
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