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अलम व ताबूत का जुलूस निकाल की नौहाख्वानी

Thu, 04 Aug 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2022 11:51 PM IST
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Nauakhwani of taking out procession of alum and coffin
अंबेडकरनगर। या हुसैन की सदाओं का सिलसिला इन दिनों तेज हो गया है। बुधवार रात लोरपुर व सिकंदरपुर में दुलदुल, अलम व ताबूत का जुलूस निकालकर नौहाख्वानी व सीनाजनी की गई। गुरुवार सुबह से ही मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया जो देर शाम तक जारी रहा। इसमें उलमा ने कर्बला के शहीदों पर तफसील से रोशनी डाली।
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मोहर्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, जुलूस व मजलिसों का दौर भी तेज होने लगा है। जिला मुख्यालय से लेकर अन्य इलाकों में अंजुमन के सदस्य नौहाख्वानी व सीनाजनी कर रहे हैं। बुधवार रात सिकंदरपुर स्थित इमामबारगाह से अंजुमन हुसैनिया के तत्वावधान में अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकला।
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दानियाल मेहंदी ने इस दौरान दर्दनाक नौहा पढ़कर माहौल को भावुक बना दिया। जफर हुसैन की तकरीर से जुलूस की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला में शहादत देकर इंसानियत को कयामत तक बचा लिया। इस दौरान मेहंदी रजा, रौनक हुसैन, शादाब, आफाक हुसैन, हादी रजा व अयान मेहंदी आदि मौजूद रहे।
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उधर, अकबरपुर नगर से सटे लोरपुर स्थित कोठी से बुधवार रात अंजुमन मासूमिया के तत्वावधान में अलम व ताबूत का जुलूस निकला। मुख्तलिफ रास्तों से गुजरता हुआ जुलूस कदम रसूल रौजे पर पहुंचकर खत्म हुआ। इरफान लोरपुरी ने अपने साथियों संग नौहाख्वानी की। इस दौरान सै. उजैर हसन, सै. जुहैर हसन, सै. अंबर हसन आदि मौजूद रहे। पहाड़पुर में भी बुधवार रात अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकला। इसमें अंजुमन गुंच-ए-अकबरिया समेत अन्य अंजुमन के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।

खास अंदाज में पढ़ी मर्सिया
अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित अजाखाने सज्जादिया में मरसियाख्वान हसन अब्बास अरबी ने खास अंदाज में मर्सिया पढ़कर माहौल को भावुक बना दिया। अजाखाने चौधरी सिब्ते मोहम्मद नकवी में मौलाना अकबर अली ने कहा कि जब वक्त के बादशाह ने हराम को हलाल व हलाल को हराम करार देना शुरू किया और अपनी ताकत से इंसानियत को कुचलना शुरू किया तो इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ कर्बला में शहादत देने के लिए आगे आए। शहादत देकर उन्होंने इंसानियत को कयामत तक बचा लिया। अजाखाने सरवर हुसैन में मौलाना मोहम्मद जौहर ने कहा कि छह माह के अली असगर व 72 साल के हबीब इब्रे मजाहिर ने कर्बला में शहादत दी।
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