{"_id":"68fa5c3c3c9ac848be0d4563","slug":"narrated-the-childhood-pranks-of-shri-krishna-ambedkar-nagar-news-c-91-1-abn1014-144068-2025-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं का किया बखान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं का किया बखान
Thu, 23 Oct 2025 10:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Thu, 23 Oct 2025 10:17 PM IST
विज्ञापन
आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के लखनडीह में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को कथा प्रवाचक ओम नारायण तिवारी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल लीलाओं का वर्णन किया। आचार्य ने बताया कि देवकी के गर्भ से आठवीं संतान के जन्म के बाद वासुदेव जी ने भगवान कृष्ण को गोपियों के बीच गोकुल में यशोदा मैया के पास छोड़ा। इसके बदले में योगमाया का रूप लेकर कन्या को कंस की जेल में वापस लाया गया। नंद बाबा के घर नंदलाल के जन्म पर खुशी का माहौल बन गया और बधाई देने वालों का तांता लग गया।
कथा के अनुसार, कंस ने नवजात कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन योगमाया ने आकाश में अपना रूप धारण कर भविष्यवाणी की कि भगवान कृष्ण गोकुल में सुरक्षित रूप से जन्म ले चुके हैं। कंस ने बाल कृष्ण को मारने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन भगवान की बाललीला के माध्यम से अधर्म पर विजय पाई गई। आचार्य ने कलयुग में हरि नाम के स्मरण का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस युग में कठिन तपस्या या यज्ञ की आवश्यकता नहीं है, केवल सच्चे हृदय से भगवान के नाम का सुमिरन मानव जीवन के कल्याण के लिए पर्याप्त है। यह व्यक्ति को विचार, वैराग्य और ज्ञान के मार्ग पर ले जाती है और जीवन को सार्थक बनाती है।इस दौरान मुख्य यजमान राघवेंद्र पांडेय, जितेंद्र , वीरेंद्र, भूपेंद्र, वीरेंद्र , देश दीपक, उपेंद्र, नागार्जुन, प्रांशु व आदित्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
कथा के अनुसार, कंस ने नवजात कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन योगमाया ने आकाश में अपना रूप धारण कर भविष्यवाणी की कि भगवान कृष्ण गोकुल में सुरक्षित रूप से जन्म ले चुके हैं। कंस ने बाल कृष्ण को मारने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन भगवान की बाललीला के माध्यम से अधर्म पर विजय पाई गई। आचार्य ने कलयुग में हरि नाम के स्मरण का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि इस युग में कठिन तपस्या या यज्ञ की आवश्यकता नहीं है, केवल सच्चे हृदय से भगवान के नाम का सुमिरन मानव जीवन के कल्याण के लिए पर्याप्त है। यह व्यक्ति को विचार, वैराग्य और ज्ञान के मार्ग पर ले जाती है और जीवन को सार्थक बनाती है।इस दौरान मुख्य यजमान राघवेंद्र पांडेय, जितेंद्र , वीरेंद्र, भूपेंद्र, वीरेंद्र , देश दीपक, उपेंद्र, नागार्जुन, प्रांशु व आदित्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन