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Ambedkar Nagar News: आलापुर सीट के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Fri, 16 Oct 2026 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:00 PM IST
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Petition challenging the reservation of the Alapur seat dismissed
लखनऊ। जिले की विधानसभा सीटों के परिसीमन और आलापुर विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता न्यायिक हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं कर सका।
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जहांगीरगंज निवासी दिलीप कुमार ने याचिका दाखिल कर जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और आरक्षण में संशोधन की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन क्षेत्रों के बीच जनसंख्या का वितरण संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। साथ ही आलापुर सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
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याचिकाकर्ता ने 2001 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि उस समय उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 16.62 करोड़ थी और विधानसभा की 403 सीटें थीं। इस आधार पर प्रति विधानसभा क्षेत्र औसत जनसंख्या लगभग 4.12 लाख बनती थी। याचिका के अनुसार, जलालपुर की आबादी 4,60,245 होने से निर्धारित औसत से अधिक थी, जबकि अकबरपुर की जनसंख्या 3,68,722 थी।
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आरोप लगाया गया कि अकबरपुर और आलापुर जैसे क्षेत्रों से कुछ इलाके निकालकर जलालपुर और कटेहरी में शामिल किए गए, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों के बीच जनसंख्या का असंतुलन बढ़ा।

परिसीमन आदेश को अंतिम माना
हाईकोर्ट ने परिसीमन अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि राजपत्र में प्रकाशित परिसीमन आदेश को अंतिम माना जाता है और सामान्य परिस्थितियों में उसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति की आबादी के तुलनात्मक प्रतिशत के आधार पर आरक्षित सीटों का पुनर्वितरण कराने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि परिसीमन आदेश दिसंबर 2006 में प्रकाशित हुआ था और इसके आधार पर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होते रहे हैं। करीब 20 साल बाद चुनौती दिए जाने पर अदालत ने प्रतिवादियों की देरी संबंधी आपत्ति को उचित माना और याचिका खारिज कर दी।
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