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Ambedkar Nagar News: चालक व परिचालकों की कमी बन रही बसों के संचालन में बाधा
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर डिपो में चालकों-परिचालकों की कमी से बसों के संचालन में बाधा बन रही है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। चालक तो कभी परिचालक न होने से हर रोज डिपो में 20 से 25 बसें खड़ी रह जाती हैं।
परिवहन निगम यात्रियों की सुविधाओं के लिए भले ही हर जिले के लिए बस संचालन करने का दावा कर रहा हो, लेकिन परिचालकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। डिपो में इस समय 157 परिचालक और 166 चालक तैनात हैं। डिपो के पास 106 बसें हैं, लेकिन करीब 20 से 25 बसें खड़ी रह जाती हैं। एआरएम हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि डिपो में 227 परिचालक की जरूरत है, लेकिन डिपो में इस समय 157 परिचालक तैनात हैं। इसके साथ ही डिपो में 229 चालकों के सापेक्ष 166 ही चालक हैं। चालक-परिचालकों की कमी होने के चलते प्रतिदिन बसें भी डिपो से नहीं निकल पा रहीं हैं।
डिपो के परिचालकों ने बताया कि वह प्रतिदिन समय से डिपो पहुंचते हैं, लेकिन चालकों की संख्या कम होने की वजह से वह रूट पर नहीं पहुंचते। ऐसे में उन्हें बिना ड्यूटी के ही घर लौटना पड़ता है। इससे उनको हर महीने में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, चालक कम वेतन और लोड फैक्टर का दबाव नहीं झोल पाते हैं। एक या दो महीने में छोड़कर चले जाते हैं। एआरएम ने बताया कि चालकों की हर सप्ताह भर्ती शिविर लगाया जाता है। वहीं, परिचालकों की कमी की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। जल्द ही परिचालक डिपो को मिलेंगे। इसके बाद सभी रूटों पर बसों का संचालन शुरू हो जाएगा।
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परिवहन निगम यात्रियों की सुविधाओं के लिए भले ही हर जिले के लिए बस संचालन करने का दावा कर रहा हो, लेकिन परिचालकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है। डिपो में इस समय 157 परिचालक और 166 चालक तैनात हैं। डिपो के पास 106 बसें हैं, लेकिन करीब 20 से 25 बसें खड़ी रह जाती हैं। एआरएम हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि डिपो में 227 परिचालक की जरूरत है, लेकिन डिपो में इस समय 157 परिचालक तैनात हैं। इसके साथ ही डिपो में 229 चालकों के सापेक्ष 166 ही चालक हैं। चालक-परिचालकों की कमी होने के चलते प्रतिदिन बसें भी डिपो से नहीं निकल पा रहीं हैं।
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डिपो के परिचालकों ने बताया कि वह प्रतिदिन समय से डिपो पहुंचते हैं, लेकिन चालकों की संख्या कम होने की वजह से वह रूट पर नहीं पहुंचते। ऐसे में उन्हें बिना ड्यूटी के ही घर लौटना पड़ता है। इससे उनको हर महीने में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं, चालक कम वेतन और लोड फैक्टर का दबाव नहीं झोल पाते हैं। एक या दो महीने में छोड़कर चले जाते हैं। एआरएम ने बताया कि चालकों की हर सप्ताह भर्ती शिविर लगाया जाता है। वहीं, परिचालकों की कमी की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। जल्द ही परिचालक डिपो को मिलेंगे। इसके बाद सभी रूटों पर बसों का संचालन शुरू हो जाएगा।
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