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सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए विधायक सुभाष
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दिल्ली भाजपा कार्यालय पर सदस्यता ग्रहण करते जलालपुर विधायक सुभाष राय।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। सपा से टिकट न मिलने से नाराज जलालपुर विधायक सुभाष राय ने अंतत: भाजपा का दामन थाम लिया। उनके भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तस्वीर भी लगभग स्पष्ट है। ऐसे में जलालपुर सीट पर विधानसभा चुनाव अब रोचक दौर में पहुंच गया है। फिलहाल वहां त्रिकोणात्मक संघर्ष की स्थिति बनती दिख रही है। हालांकि राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि अभी चुनावी संघर्ष में बहुत कुछ घटित होना बाकी है। इसके बाद ही वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकेंगी।
टिकट कटने के संकेत मिलने के बाद से ही असंतुष्ट चल रहे सपा के जलालपुर विधायक सुभाष राय ने सोमवार को अंतत: तमाम चर्चाओं को विराम देते हुए भाजपा की सदस्यता नई दिल्ली में ग्रहण कर ली। वे उप चुनाव में विधायक बने थे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के तौर पर रितेश पांडेय विधायक बनने में कामयाब हुए थे। बाद में वे अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर सांसद बन गए। उनके इस्तीफे से खाली हुई जलालपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2019 में हुए उप चुनाव में सपा प्रत्याशी के तौर पर सुभाष राय विधायक निर्वाचित हुए थे।
वे इस बार भी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में थे। हालांकि बीते दिनों ही जलालपुर से सपा के टिकट पर विधायक रह चुके बसपा नेता व पूर्व सांसद राकेश पांडेय ने सपा की सदस्यता ले ली थी। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सुभाष राय समेत पार्टी के सभी स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को यह संकेत दे दिया था कि राकेश पांडेय को ही टिकट दिया जाएगा। इसके बाद से ही सुभाष राय असंतुष्ट चल रहे थे। उनके दलबदल को लेकर चर्चाओं का दौर तेजी से चला। सिर्फ अमर उजाला ने उनके असंतुष्ट होने व दलबदल होने की संभावना को लेकर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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इन्हीं तमाम चर्चाओं व उहापोह के दौर को समाप्त करते हुए जलालपुर विधायक सुभाष ने सोमवार को नई दिल्ली में भाजपा कार्यालय पहुंचकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्हें जलालपुर से ही बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ाए जाने की तस्वीर भी लगभग स्पष्ट हो चुकी है। सपा से राकेश पांडेय का चुनाव लड़ना तय है तो वहीं बसपा ने भाजपा से आए वरिष्ठ नेता राजेश सिंह को अपना प्रत्याशी बना रखा है। अब सुभाष राय के भाजपा प्रत्याशी होने पर यहां चुनावी संघर्ष अत्यंत रोचक होता दिख रहा है। फिलहाल त्रिकोणात्मक संघर्ष की रूपरेखा उभर रही है। यह बात अलग है कि कई राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि अभी जलालपुर में चुनाव को लेकर बहुत कुछ घटित होना बाकी है। इसके बाद ही वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। इसमें दलबदल के अलावा कई और तरह की रणनीति सामने आने के आसार हैं।
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टिकट कटने के संकेत मिलने के बाद से ही असंतुष्ट चल रहे सपा के जलालपुर विधायक सुभाष राय ने सोमवार को अंतत: तमाम चर्चाओं को विराम देते हुए भाजपा की सदस्यता नई दिल्ली में ग्रहण कर ली। वे उप चुनाव में विधायक बने थे। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के तौर पर रितेश पांडेय विधायक बनने में कामयाब हुए थे। बाद में वे अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर सांसद बन गए। उनके इस्तीफे से खाली हुई जलालपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2019 में हुए उप चुनाव में सपा प्रत्याशी के तौर पर सुभाष राय विधायक निर्वाचित हुए थे।
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वे इस बार भी चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी में थे। हालांकि बीते दिनों ही जलालपुर से सपा के टिकट पर विधायक रह चुके बसपा नेता व पूर्व सांसद राकेश पांडेय ने सपा की सदस्यता ले ली थी। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सुभाष राय समेत पार्टी के सभी स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को यह संकेत दे दिया था कि राकेश पांडेय को ही टिकट दिया जाएगा। इसके बाद से ही सुभाष राय असंतुष्ट चल रहे थे। उनके दलबदल को लेकर चर्चाओं का दौर तेजी से चला। सिर्फ अमर उजाला ने उनके असंतुष्ट होने व दलबदल होने की संभावना को लेकर खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
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इन्हीं तमाम चर्चाओं व उहापोह के दौर को समाप्त करते हुए जलालपुर विधायक सुभाष ने सोमवार को नई दिल्ली में भाजपा कार्यालय पहुंचकर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्हें जलालपुर से ही बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ाए जाने की तस्वीर भी लगभग स्पष्ट हो चुकी है। सपा से राकेश पांडेय का चुनाव लड़ना तय है तो वहीं बसपा ने भाजपा से आए वरिष्ठ नेता राजेश सिंह को अपना प्रत्याशी बना रखा है। अब सुभाष राय के भाजपा प्रत्याशी होने पर यहां चुनावी संघर्ष अत्यंत रोचक होता दिख रहा है। फिलहाल त्रिकोणात्मक संघर्ष की रूपरेखा उभर रही है। यह बात अलग है कि कई राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि अभी जलालपुर में चुनाव को लेकर बहुत कुछ घटित होना बाकी है। इसके बाद ही वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी। इसमें दलबदल के अलावा कई और तरह की रणनीति सामने आने के आसार हैं।