{"_id":"60ef1b018ebc3e4df13def05","slug":"many-schools-are-in-bad-shape-even-after-rejuvenation-ambedkar-nagar-news-lko5869325131","type":"story","status":"publish","title_hn":"कायाकल्प के बाद भी कई विद्यालय बदहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कायाकल्प के बाद भी कई विद्यालय बदहाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। राज्य सरकार द्वारा जोर शोर से परिषदीय विद्यालयों को चमकाने के लिए शुरू की गई काया कल्प योजना जिले में औंधे मुंह गिरी है। तमाम विद्यालयों में काम अधूरे पड़े हैं। कहीं चहारदीवारी का अधूरा निर्माण कराकर छोड़ दिया गया है तो कहीं पूरे परिसर में इंटरलॉकिंग ईंट नहीं लगाई जा सकी है। विद्यालयों को रंगवाने तक की सुध कई विद्यालयों में नहीं दिखी। कायाकल्प योजना सरकार ने इस उद्देश्य से शुरू किया है जिससे परिषदीय विद्यालयों की बदहाली दूर की जा सके। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर तमाम स्कूलों में सिर्फ फर्ज अदायगी ही देखने को मिल रही। जैसे तैसे काम कराने को ही प्राथमिकता दी जा रही है। इसका खामियाजा निश्चित रूप से आने वाले दिनों में छात्र छात्राओं को भुगतना पड़ेगा। सबसे ज्यादा खराब स्थिति तो शौचालयों की है। उन्हें साफ और दुरुस्त रखने पर फोकस नहीं किया जा रहा है। परिसर की नियमित साफ सफाई को भी तवज्जो नहीं दी जा रही। इन्हीं अव्यवस्थाओं का जायजा बुधवार को अमर उजाला ने लिया तो तस्वीर कुछ इस तरह रही-
ठप है सबमर्सिबल तो उखड़ा है प्लास्टर
सीन-एक
स्थान-प्राथमिक विद्यालय जहांगीरगंज प्रथम
कायाकल्प योजना का लाभ कहीं से भी प्राथमिक विद्यालय जहांगीरगंज प्रथम को मिलता नहीं दिखा। बुधवार को जब अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो चारों तरफ अव्यवस्थाएं नजर आईं। बाउंड्रीवाल नहीं थी। शौचालय की हालत अत्यंत दयनीय मिली। ऐसा लग रहा कि जैसे शौचालय की साफ सफाई हुए लंबा समय बीत चुका है। जगह जगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ था। दरवाजा भी क्षतिग्रस्त था। पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। सबमर्सिबल तो लगा था, लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि यह कभी भी चलता नहीं है। मैदान में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ था। नए भवन के बगल पुराना भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। निष्प्रयोज्य पड़ा पड़े इस भवन की दीवारें अत्यंत जर्जर हो चुकी हैं, जो कभी भी ढह सकती हैं, लेकिन इस भवन को ढहाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उधर प्रधानाध्यापक बरनाली राय ने बताया कि विद्यालय में 97 बच्चे पंजीकृत हैं। बाउंड्रीवाल न होने से यहां साप्ताहिक बाजार लगती है, जिसके चलते ही गंदगी रहती है।
पांच कक्ष में नहीं लग सकी टाइल्स
सीन-दो
स्थान-प्राथमिक विद्यालय अढनपुर
अमर उजाला टीम जब प्राथमिक विद्यालय अढनपुर में कई कार्य आधे अधूरे पड़े हुए मिले। बाउंड्रीवाल का निर्माण तो है, लेकिन अपूर्ण है। आधा अधूरा निर्माण कराकर इसे छोड़ दिया गया है। मैदान में इंटरलॉकिंग नहीं कराई जा सकी है। नौ कमरों की तुलना में पांच कमरों में फर्श पर टाइल्स नहीं लगाई जा सकी है। रसोईघर में भी टाइल्स नहीं लग सकी है। प्रधानाध्यापक सपन कुमार ने बताया कि योजना के तहत ज्यादातर कार्य करा दिया गया है। शेष कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा। बताया कि विद्यालय में 145 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
अधूरा पड़ा है इंटरलॉकिंग का कार्य
सीन तीन
स्थान-प्राथमिक विद्यायल शाहपुर फिरोजपुर
विद्यालय में फैली अव्यवस्थाओं के बीच ही 114 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। योजना के तहत इंटरलॉकिंग का कार्य तो हुआ, लेकिन आधा अधूरा ही हुआ। बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं हो सका है। शौचालय के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, तो रसोईघर भी क्षतिग्रस्त है। साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी मिली। जगह जगह कूड़ा करकट का अंबार लगा हुआ मिला। भवन की लंबे समय से रंगाई पुताई नहीं की जा सकी है। प्रधानाध्यापक शिवप्रकाश मिश्र ने बताया कि योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है। छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
रसोईघर जर्जर, तो टूटे हैं दरवाजे
सीन-चार
स्थान-कम्पोजिट विद्यालय सूरापुर
इस कम्पोजिट विद्यालय में प्राथमिक विद्यालय को तो कायाकल्प योजना का समुचित लाभ मिला है, लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालय को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल सका है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में शौचालय पूरी तरह से बदहाल है। दरवाजा क्षतिग्रस्त है, तो साफ सफाई भी नियमित नहीं होती। यहां सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी की है। बारिश होने पर विद्यालय परिसर में पानी भर जाता है, जिससे विद्यालय में पंजीकृत लगभग 250 छात्र-छात्राओं को आगे पढ़ाई होने विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। रसोईघर भी जर्जर हो चुका है। प्रधानाध्यापिका दरख्शां सूफिया ने बताया कि योजना के तहत शीघ्र ही सभी कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
प्रधानों को किया गया निर्देशित
कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में ग्राम पंचायत द्वारा कराया जाता है। योजना के तहत ज्यादातर विद्यालयों में काम या तो पूरा हो गया है या फिर चल रहा है। जल्द से जल्द योजना के तहत सभी विद्यालयों में कार्य हो सके, इसके लिए सभी ग्राम प्रधानों को जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
-दुर्गाप्रसाद तिवारी,डीपीआरओ
फैक्ट फाइल
कुल विद्यालय- 1586
कायाकल्प योजना से हुए काम
बाउंड्रीवाल- 248
दिव्यांग शौचालय- 405
रंगाई पुताई- 1555
मल्टी प्लस हैंडवॉश- 800
विज्ञापन
ठप है सबमर्सिबल तो उखड़ा है प्लास्टर
सीन-एक
स्थान-प्राथमिक विद्यालय जहांगीरगंज प्रथम
कायाकल्प योजना का लाभ कहीं से भी प्राथमिक विद्यालय जहांगीरगंज प्रथम को मिलता नहीं दिखा। बुधवार को जब अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची, तो चारों तरफ अव्यवस्थाएं नजर आईं। बाउंड्रीवाल नहीं थी। शौचालय की हालत अत्यंत दयनीय मिली। ऐसा लग रहा कि जैसे शौचालय की साफ सफाई हुए लंबा समय बीत चुका है। जगह जगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ था। दरवाजा भी क्षतिग्रस्त था। पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। सबमर्सिबल तो लगा था, लेकिन ग्रामीणों ने बताया कि यह कभी भी चलता नहीं है। मैदान में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ था। नए भवन के बगल पुराना भवन अत्यंत जर्जर हो चुका है। निष्प्रयोज्य पड़ा पड़े इस भवन की दीवारें अत्यंत जर्जर हो चुकी हैं, जो कभी भी ढह सकती हैं, लेकिन इस भवन को ढहाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उधर प्रधानाध्यापक बरनाली राय ने बताया कि विद्यालय में 97 बच्चे पंजीकृत हैं। बाउंड्रीवाल न होने से यहां साप्ताहिक बाजार लगती है, जिसके चलते ही गंदगी रहती है।
विज्ञापन
पांच कक्ष में नहीं लग सकी टाइल्स
सीन-दो
स्थान-प्राथमिक विद्यालय अढनपुर
अमर उजाला टीम जब प्राथमिक विद्यालय अढनपुर में कई कार्य आधे अधूरे पड़े हुए मिले। बाउंड्रीवाल का निर्माण तो है, लेकिन अपूर्ण है। आधा अधूरा निर्माण कराकर इसे छोड़ दिया गया है। मैदान में इंटरलॉकिंग नहीं कराई जा सकी है। नौ कमरों की तुलना में पांच कमरों में फर्श पर टाइल्स नहीं लगाई जा सकी है। रसोईघर में भी टाइल्स नहीं लग सकी है। प्रधानाध्यापक सपन कुमार ने बताया कि योजना के तहत ज्यादातर कार्य करा दिया गया है। शेष कार्य भी जल्द पूरा हो जाएगा। बताया कि विद्यालय में 145 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
अधूरा पड़ा है इंटरलॉकिंग का कार्य
सीन तीन
स्थान-प्राथमिक विद्यायल शाहपुर फिरोजपुर
विद्यालय में फैली अव्यवस्थाओं के बीच ही 114 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। योजना के तहत इंटरलॉकिंग का कार्य तो हुआ, लेकिन आधा अधूरा ही हुआ। बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं हो सका है। शौचालय के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं, तो रसोईघर भी क्षतिग्रस्त है। साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी मिली। जगह जगह कूड़ा करकट का अंबार लगा हुआ मिला। भवन की लंबे समय से रंगाई पुताई नहीं की जा सकी है। प्रधानाध्यापक शिवप्रकाश मिश्र ने बताया कि योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है। छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
रसोईघर जर्जर, तो टूटे हैं दरवाजे
सीन-चार
स्थान-कम्पोजिट विद्यालय सूरापुर
इस कम्पोजिट विद्यालय में प्राथमिक विद्यालय को तो कायाकल्प योजना का समुचित लाभ मिला है, लेकिन उच्च प्राथमिक विद्यालय को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल सका है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में शौचालय पूरी तरह से बदहाल है। दरवाजा क्षतिग्रस्त है, तो साफ सफाई भी नियमित नहीं होती। यहां सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी की है। बारिश होने पर विद्यालय परिसर में पानी भर जाता है, जिससे विद्यालय में पंजीकृत लगभग 250 छात्र-छात्राओं को आगे पढ़ाई होने विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। रसोईघर भी जर्जर हो चुका है। प्रधानाध्यापिका दरख्शां सूफिया ने बताया कि योजना के तहत शीघ्र ही सभी कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
प्रधानों को किया गया निर्देशित
कायाकल्प योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में ग्राम पंचायत द्वारा कराया जाता है। योजना के तहत ज्यादातर विद्यालयों में काम या तो पूरा हो गया है या फिर चल रहा है। जल्द से जल्द योजना के तहत सभी विद्यालयों में कार्य हो सके, इसके लिए सभी ग्राम प्रधानों को जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
-दुर्गाप्रसाद तिवारी,डीपीआरओ
फैक्ट फाइल
कुल विद्यालय- 1586
कायाकल्प योजना से हुए काम
बाउंड्रीवाल- 248
दिव्यांग शौचालय- 405
रंगाई पुताई- 1555
मल्टी प्लस हैंडवॉश- 800