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भारतीय संस्कृति को बनाएं मजबूत
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अंबेडकरनगर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने रविवार को नव संवत्सर पर अकबरपुर में गोष्ठी का आयोजन कर साहित्य व संस्कृति की मजबूती पर जोर दिया। कहा कि पाश्चात्य शिक्षा का ही असर है कि गुरु-शिष्य के रिश्तों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे बचने के लिए हमें अपनी समृद्धि संस्कृति की मजबूती सुनिश्चित करनी है।
अकबरपुर नगर के रमाबाई राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में अध्यक्ष डॉ. सुधा ने हिंदू नववर्ष व उसकी प्राचीन परंपरा पर विस्तार से चर्चा की। सर्वे भवंतु सुखिना के लोक कल्याणकारी चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें नव संवत्सर की परंपरा को पुनर्जीवित करने के साथ भावी पीढ़ी को त्योहारों के प्रति जागरूक करना है। कार्यकारी समिति महामंत्री चंद्रमौलि मिश्र ने कहा कि हम अपना पंचांग नव संवत्सर पर ही बदलते हैं। यह पंचांग अत्यंत वैज्ञानिक है। यह लाखों सालों का विज्ञान है, जो हमें नासा के पूर्व से खगोलीय घटनाओं के बारे में बताता रहा है। कवि धीरेंद्र पांडेय उर्फ क्षणिक ने कविताओं के माध्यम से नए वर्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
महामंत्री डॉ. विजयचंद्र मिश्र ने कहा कि साहित्य व संस्कृति की शून्यता की तरफ बढ़ने से बचने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है। आज पूरा विश्व जिस ज्ञान से ओत-प्रोत है, वह कहीं न कहीं हमारे ऋषि मुनियों, शास्त्रों व धर्मग्रंथों ने दिया है। कोषाध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह ने देश की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से सकारात्मक भूमिका का आह्वान किया। रवींद्र वर्मा ने भारतीय संस्कृति व सभ्यता को विश्व में सबसे प्राचीन व समृद्ध बताया। कहा कि अन्य देशों की संस्कृति समय के साथ नष्ट होती रही, लेकिन भारतीय संस्कृति अजर अमर है।
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सीता पांडेय ने जीवन मूल्यों की ओर लौटने तथा उत्सव धर्मी परंपराओं को प्रतिपादित करने पर जोर दिया। मीडिया प्रभारी संजय दुबे के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में शिवमूर्ति सिंह ने आभार जताते हुए ऐसे कार्यक्रमों की सार्थकता पर जोर दिया। इस मौके पर दिलीप वर्मा, कमलेश्वर सिंह, आयुषि सिंह, मंजू मिश्रा, ऊषा मिश्रा व रविकांत मिश्र आदि मौजूद रहे।
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अकबरपुर नगर के रमाबाई राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में अध्यक्ष डॉ. सुधा ने हिंदू नववर्ष व उसकी प्राचीन परंपरा पर विस्तार से चर्चा की। सर्वे भवंतु सुखिना के लोक कल्याणकारी चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें नव संवत्सर की परंपरा को पुनर्जीवित करने के साथ भावी पीढ़ी को त्योहारों के प्रति जागरूक करना है। कार्यकारी समिति महामंत्री चंद्रमौलि मिश्र ने कहा कि हम अपना पंचांग नव संवत्सर पर ही बदलते हैं। यह पंचांग अत्यंत वैज्ञानिक है। यह लाखों सालों का विज्ञान है, जो हमें नासा के पूर्व से खगोलीय घटनाओं के बारे में बताता रहा है। कवि धीरेंद्र पांडेय उर्फ क्षणिक ने कविताओं के माध्यम से नए वर्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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महामंत्री डॉ. विजयचंद्र मिश्र ने कहा कि साहित्य व संस्कृति की शून्यता की तरफ बढ़ने से बचने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है। आज पूरा विश्व जिस ज्ञान से ओत-प्रोत है, वह कहीं न कहीं हमारे ऋषि मुनियों, शास्त्रों व धर्मग्रंथों ने दिया है। कोषाध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह ने देश की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से सकारात्मक भूमिका का आह्वान किया। रवींद्र वर्मा ने भारतीय संस्कृति व सभ्यता को विश्व में सबसे प्राचीन व समृद्ध बताया। कहा कि अन्य देशों की संस्कृति समय के साथ नष्ट होती रही, लेकिन भारतीय संस्कृति अजर अमर है।
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सीता पांडेय ने जीवन मूल्यों की ओर लौटने तथा उत्सव धर्मी परंपराओं को प्रतिपादित करने पर जोर दिया। मीडिया प्रभारी संजय दुबे के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में शिवमूर्ति सिंह ने आभार जताते हुए ऐसे कार्यक्रमों की सार्थकता पर जोर दिया। इस मौके पर दिलीप वर्मा, कमलेश्वर सिंह, आयुषि सिंह, मंजू मिश्रा, ऊषा मिश्रा व रविकांत मिश्र आदि मौजूद रहे।