फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Lohia thoughs are dismantled in birth place

जन्मस्थली पर ही तार-तार हो रहे लोहिया के आदर्श

Sun, 11 Oct 2015 10:32 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2015 10:32 PM IST
विज्ञापन

समाजवाद के प्रणेता रहे डा. लोहिया से जुड़ी स्मृतियां उनके आदर्शों पर चलने का दावा करने वाले सपाइयों की हुकूमत में उनकी जन्मस्थली पर ही उपेक्षित हैं। यहां तक कि इस जिले के कोटे से प्रदेश सरकार में लाल बत्ती पाए जनप्रतिनिधियों को ही डा. लोहिया से जुड़ी चीजों के प्रति कोई लगाव नजर नहीं रहा।

विज्ञापन


अंबेडकरनगर जिले में जन्मे डा. लोहिया ने ही समूचे देश में समाजवाद की अलख जगाई थी। शहजादपुर की संकरी सी गली के एक छोटे से घर में जन्मे लोहिया की मां का बचपन में ही निधन हो गया। पिता पिता हीरा लाल ने पालनपोषण के लिए परिवार की सेविका सरजू देई को सौंप दिया था।
विज्ञापन


सरजू देई के पुत्र बंसी नाई उनके बाल सखा था। दुर्भाग्य से यहां उनकी स्मृति में कोई खास स्मारक का निर्माण नहीं कराया गया। लगभग दो दशक पूर्व अकबरपुर नगर के शहजादपुर चौक क्षेत्र में डा. लोहिया की आदमकद मूर्ति स्थापित की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद शहर के किसी बाहरी हिस्से में मूर्ति लगवाने या  पार्क बनवाने आदि की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। लोहिया जी के बाल सखा बंसी नाई जब तक जीवित थे, तब तक तो शहजादपुर चौकपुर पर लगी उनकी मूर्ति पर रोजाना फूल माला चढ़ाते रहे पर उनके बाद ये क्रम पूरी तरह बंद हो गया।

अब यदा कदा ही ऐसा हो पाता है। सपा सरकार के पिछले कार्यकाल में जिला मुख्यालय पर हवाईपट्टी के सामने बहुउद्देशीय लोहिया भवन के निर्माण का निर्णय लिया गया था जो आज तक नहीं पूरा हो सका। सपा के इस कार्यकाल में भी यह अधूरा पड़ा है।

अभी भी आडीटोरियम, साइकिल स्टैंड, शौचालय आदि का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है। भवन का विद्युतीकरण तो हुआ है, लेकिन कनेक्शन नहीं हो सका है। आज इस बहुउद्देशीय भवन परिसर में चारों तरफ बड़ी बड़ी जंगली घासें उगी हुई हैं।
पूर्ववर्ती बसपा सरकार के अलग अलग कार्यकाल में भले ही जिले को कई महापुरुषों के नाम से अलग अलग कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली लेकिन मौजूदा सरकार को डा. लोहिया के नाम पर किसी नई परियोजना की सुध नहीं हो सकी है।

शहर के किसी बाहरी हिस्से में डा. लोहिया की भव्य प्रतिमा स्थापित कराकर वहां पार्क बनवाने का कोई ध्यान स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक को नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर आम लोगों के बीच कड़ी प्रतिक्रिया भी दिखी है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उदासीन हैं।

समाजवादी डा. राममनोहर लोहिया की जिले में उपेक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहजादपुर चौक में स्थित डा. लोहिया की आदमकद मूर्ति के चारों तरफ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया गया है। मूर्ति के चारों तरफ फलों के ठेले इस प्रकार लगे रहते हैं कि किसी का भी मूर्ति तक पहुंचना मुश्किल है।


मूर्ति के चारों तरफ गंदगी का भी अंबार लगा रहता है। इसकी साफ सफाई कराने की सुध न तो नगर पालिका प्रशासन को हैं और न ही समाजवाद का ढिंढोरा पीटने वालों को। स्थानीय लोगों द्वारा लंबे समय से अतिक्रमण हटवाए जाने एवं साफ सफाई की मांग की जा रही है, लेकिन इस तरफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed