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Ambedkar Nagar News: पढ़ाई के साथ खेल में भी हुनर दिखाएंगी केजीवीबी की छात्राएं
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बेवाना में बना कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय। विभाग
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अंबेडकरनगर। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राएं अब पढ़ाई के साथ खेल के मैदान में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। शिक्षा विभाग की ओर से छात्राओं को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ विभिन्न खेलों में प्रशिक्षित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और छात्राओं की रुचि के अनुसार उनकी प्रतिभा को निखारने पर जोर दिया जा रहा है।
कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अधिकांश छात्राएं ग्रामीण और वंचित परिवारों से आती हैं। पढ़ाई के साथ खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिलने से इन छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। विभाग का उद्देश्य छात्राओं में खेल भावना, अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करना भी है। जिले मेें आठ कस्तूरबा गांधी विद्यालय संचालित हैं। इसमें 1500 छात्राएं पढ़ाई करती हैं।
खेल के जरिये तलाशेंगे छिपी प्रतिभाएं
विद्यालयों में छात्राओं को एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबाल समेत उनकी रुचि के अन्य खेलों में अभ्यास कराया जाएगा। खेल गतिविधियों के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं की पहचान कर उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र की उन प्रतिभाओं को भी मंच मिल सकेगा, जिन्हें संसाधनों और अवसरों के अभाव में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता।शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। खेलों से छात्राओं का शारीरिक विकास होने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसी सोच के तहत कस्तूरबा विद्यालयों में खेल गतिविधियों को पढ़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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पढ़ाई के साथ फिटनेस पर भी जोर
खेल गतिविधियों से छात्राओं को स्वस्थ और सक्रिय रखने पर भी जोर रहेगा। नियमित अभ्यास से उनकी शारीरिक क्षमता बेहतर होगी और उनमें प्रतियोगी भावना विकसित होगी। विभाग की कोशिश है कि कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राएं पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ खेल के क्षेत्र में भी जिले का नाम रोशन करें।
डॉ. पूनम मिश्रा, बीएसए
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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अधिकांश छात्राएं ग्रामीण और वंचित परिवारों से आती हैं। पढ़ाई के साथ खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिलने से इन छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने का मौका मिलेगा। विभाग का उद्देश्य छात्राओं में खेल भावना, अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करना भी है। जिले मेें आठ कस्तूरबा गांधी विद्यालय संचालित हैं। इसमें 1500 छात्राएं पढ़ाई करती हैं।
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खेल के जरिये तलाशेंगे छिपी प्रतिभाएं
विद्यालयों में छात्राओं को एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबाल समेत उनकी रुचि के अन्य खेलों में अभ्यास कराया जाएगा। खेल गतिविधियों के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं की पहचान कर उन्हें आगे की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र की उन प्रतिभाओं को भी मंच मिल सकेगा, जिन्हें संसाधनों और अवसरों के अभाव में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता।शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षा और खेल एक-दूसरे के पूरक हैं। खेलों से छात्राओं का शारीरिक विकास होने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इसी सोच के तहत कस्तूरबा विद्यालयों में खेल गतिविधियों को पढ़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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पढ़ाई के साथ फिटनेस पर भी जोर
खेल गतिविधियों से छात्राओं को स्वस्थ और सक्रिय रखने पर भी जोर रहेगा। नियमित अभ्यास से उनकी शारीरिक क्षमता बेहतर होगी और उनमें प्रतियोगी भावना विकसित होगी। विभाग की कोशिश है कि कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राएं पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ खेल के क्षेत्र में भी जिले का नाम रोशन करें।
डॉ. पूनम मिश्रा, बीएसए