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Ambedkar Nagar News: प्राकृतिक खेती कर कांती ने लिखी तरक्की की इबारत

Tue, 07 Oct 2025 01:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Tue, 07 Oct 2025 01:21 AM IST
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Kanti wrote the story of progress by doing natural farming
किसान कांती देवी।
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के रोशनगढ़ की कांती देवी ने करीब आठ साल पहले कृषि क्षेत्र में कदम रखा तो फिर मुड़ कर नहीं देखा। गाय के गोबर और मूत्र से तैयार खाद और कीटनाशक के सहारे प्राकृतिक खेती कर न सिर्फ अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से सम्मान प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया। कांती देवी स्वयं खेती करने के साथ मास्टर ट्रेनर के रूप में करीब दो हजार किसानों को प्रशिक्षित भी कर चुकी हैं।
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कम उम्र में ही शादी होने के बाद भी कांती देवी ने पति अरुण प्रकाश के सहयोग से अपनी पढ़ाई जारी रखी। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब परास्नातक कर रही हैं। वर्ष 2017 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से कृषि सखी बनकर अपने सफर की शुरुआत की। पति अरुण के साथ मिलकर खेती शुरू की। मुख्य रूप से धान, गेहूं और सब्जियां उगानी शुरू कीं। इसके बाद प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलना शुरू हुआ तो जिले की कार्यदाई संस्था श्रीराम सॉल्वेंशन एक्सट्रैक्शन और कृषि विज्ञान केंद्र पांती से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 2023 से पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती शुरू कर दी। इस विधि से खेती करने से उन्हें उपज के एवज में बेहतर कीमत मिल रही है।
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हर माह होती है 25 हजार रुपये आय
कांती देवी बताती हैं कि मुख्य रूप से भिंडी, लौकी, कद्दू, नेनुआ, करेला व अन्य सब्जियों की खेती करती हैं। छह गाय भी पाल रखी हैं, जिनमें गिरी और साहीवाल नस्लें शामिल हैं। गायों से मिलने वाले गोबर व गोमूत्र से घनजीवामृत, बीजामृत, जीवामृत और तरल जीवामृत तैयार करती हैं। जैविक कीटनाशक दवा दस परण अर्क भी तैयार करती हैं। इनका खुद इस्तेमाल करने के साथ बिक्री भी शुरू की है। इससे इनकी आय करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक हो जाती है।
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महिलाओं को आगे बढ़ाने की चल रही मुहिम
कांती देवी के अलावा अन्य महिलाओं को भी कृषि क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। महिलाओं के तैयार उत्पादों की मार्केटिंग के लिए स्टॉल भी लगवाए जा रहे हैं। हर ब्लॉक से पांच-पांच महिलाओं को प्रशिक्षित करने की तैयारी की जा रही है।
- डॉ. अश्विनी सिंह, उपनिदेशक कृषि
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