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राममोहन हत्याकांड की हो निष्पक्ष विवेचना
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Wed, 10 Aug 2016 11:25 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo pic
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जिले के चर्चित राम मोहन गुप्ता हत्याकांड मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करने के लिए उच्चन्यायालय ने एसपी को निर्देशित किया है। न्यायालय ने एसपी से इस आशय का शपथपत्र भी प्रस्तुत करने को कहा है।
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हाईकोर्ट में बताया गया कि 3 मार्च 2013 को नेता रामबाबू गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जिसके बाद टांडा में उपद्रव और आगजनी की घटना हुई थी। इस मामले के मुख्य गवाह रहे रामबाबू के सगे भतीजे राममोहन गुप्ता की 4 दिसंबर 2013 को सरेशाम उस समय गोली मरकर हत्या कर दी गई जब वे अपने आवास के पास ही हंस तिराहे पर स्थित अपने मेडिकल स्टोर पर बैठे थे।
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इस के बाद टांडा में बलवा हो गया था। परिवारीजनों के अनुसार देर रात तक जब लोगों की भीड़ कम हो गई, तो पुलिस अधिकारियों ने राममोहन का शव घर की महिलाओं से छीन कर घसीटते हुए एक पुलिस वैन में उठाकर फेंक दिया था।घर के लोगों ने विरोध किया तो उनके ऊपर लाठीचार्ज किया गया। इस लाठीचार्ज में घर की पांच महिलाओं को गंभीर चोटें आई थीं।
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इस मामले में जिले के तत्कालीन एएसपी राजीव मल्होत्रा, तत्कालीन सीओ टांडा नरेंद्र सिंह, तत्कालीन एसओ अलीगंज रमेशचंद्र पांडेय व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में बाद में न्यायालय के हस्तक्षेप पर अलीगंज थाने में केस दर्ज किया गया था।
हालांकि बाद में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। परिवारीजनों ने आरोप लगाया कि सीजेएम न्यायालय से तीन बार विवेचना ख़ारिज कर नए सिरे से विवेचना का आदेश दिए जाने के बावजूद पुलिस ने सही जांच न करके उन्हें बचाने का प्रयास किया है।
अब इसी मामले में राममोहन के चाचा वेदप्रकाश की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस रवींद्रनाथ मिश्र की बेंच ने सुनवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक को मामले में निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कहा है कि इस आशय का एक शपथपत्र भी 13 सितंबर तक प्रस्तुत किया जाए।