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आय बढ़ी, फिर भी यात्री सुविधाओं में कमी

Mon, 02 Aug 2021 10:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 10:48 PM IST
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Income increased, yet lack of passenger amenities
अंबेडकरनगर। अधिकतर ट्रेनों का संचालन बंद रहने के दौरान आवागमन के लिए बड़ी उम्मीद का सबब बनी राज्य परिवहन निगम की बसों से यात्रियों को तगड़ा झटका लग रहा है। कारण यह कि खस्ताहाल बसों के चलते प्राय: सुचारु ढंग से यात्रा नहीं हो पा रही है। निगम की आय तो अकबरपुर डिपो से बढ़ी है, लेकिन यात्रियों की सुविधाओं में तेजी से कमी दर्ज हुई है। सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि कभी 73 बसों के बेड़े वाले डिपो में अब सिर्फ 57 बसें ही हैं। इनमें से 10 बसें नीलामी की सीमा पार कर चुकी हैं, जबकि 10 बसें आगामी सितंबर में नीलामी की अवधि पार कर जाएंगी। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रियों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। डिपो परिसर में स्थानाभाव के चलते बैठने की समुचित सुविधा न होना भी यात्रियों को परेशान कर रहा है।
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राज्य परिवहन निगम का अकबरपुर डिपो यात्रियों के लिए कई दशकों से आवागमन के मामले में बड़ी उम्मीद का सबब बना हुआ है। प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े शहरों तक आवागमन के साथ-साथ दिल्ली तक की यात्रा भी परिवहन निगम की बस के जरिए यात्री करते चले आ रहे हैं। पूर्व में अकबरपुर विधायक रामअचल राजभर के परिवहन मंत्री रहने के दौरान बसों की संख्या यहां बढ़नी शुरू हुई थी। उम्मीद थी कि डिपो के दिन बहुरेंगे।
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मंत्री के प्रयासों से नए डिपो की स्थापना के लिए शिलान्यास समारोह भी आयोजित हुआ, लेकिन इसके बाद सब कुछ धरा का धरा रह गया। मंत्री द्वारा रुचि न लिए जाने के चलते जिले को जो बड़ी सौगात मिल सकती थी, वह पूरी नहीं हो पाई। इसके बाद से ही अकबरपुर डिपो के कायापलट की जो उम्मीद थी, वह भी धीरे-धीरे धूमिल होने लगी। मौजूदा समय में उपेक्षा के चलते अकबरपुर डिपो पूरी तरह खस्ताहाली का शिकार है।
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कोविड संक्रमण के ऐसे दौर में जब अधिकांश ट्रेनों का संचालन ठप है, तब यात्रियों के लिए आवागमन को परिवहन निगम की बसें सहारा बनी हुई हैं। इसका भरपूर लाभ भी परिवहन निगम उठा रहा है। उसकी आय में मौजूदा माह में बड़ी उछाल दर्ज हुई है। खास बात यह कि बसें कम होने के बाद भी निगम की आय तो बढ़ी है, लेकिन सुविधा बढ़ाने के नाम पर निगम मौन साधे हुए है। नतीजा यह है कि वर्ष 2011 में अकबरपुर डिपो के बेड़े में कुल 73 बसें शामिल थीं, जो 2020 में घटकर 61 रह गईं। मौजूदा समय में तो मात्र 57 बसें ही अकबरपुर डिपो में शामिल हैं। ऐसे में लगभग एक दशक के भीतर अकबरपुर डिपो से 16 बसें कम हो गईं। निश्चित रूप से इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
पिछले चार वर्ष में बढ़ गई डिपो की आय
अकबरपुर डिपो के पास वर्ष 2018 के जुलाई में जब 62 बसें थीं, तब एक दिन की औसत आय 5 लाख 73 हजार रुपये थी। अगले वर्ष 2019 के जुलाई में 62 बसों से 5 लाख 37 हजार रुपये का राजस्व हासिल हुआ था। 2020 के जुलाई में कोरोना संक्रमण आदि के चलते सिर्फ 4 लाख 8 हजार रुपये की आय हो सकी थी। मौजूदा वर्ष के जुलाई में जब डिपो के पास सिर्फ 57 बसें हैं, तब सबसे ज्यादा 5 लाख 75 हजार रुपये की आय अकबरपुर डिपो को हुई। यात्रियों का कहना है कि आय तो बढ़ रही, लेकिन निगम का यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने की तरफ ध्यान नहीं है। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
डिपो में स्थानाभाव से लेकर बसों के बिगडने का संकट
अकबरपुर डिपो को किस तरह पिछले कई वर्षों में नजरअंदाज किया गया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डिपो परिसर में स्थानाभाव जस का तस बना हुआ है। यहां यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच व शेड नहीं हैं। ऐसे में तमाम यात्रियों को या तो बाहर स्थित दुकानों की शरण लेनी पड़ती है या फिर लंबे समय तक खड़े रहकर बस का इंतजार करना पड़ता है। डिपो परिसर में पेयजल के भी समुचित प्रबंध नहीं हैं। इसके अलावा ज्यादातर बसों के खराब हो जाने से उनके जहां-तहां बिगड़ जाने के संकट से यात्री लगातार जूझते आ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि डिपो की तरफ से विशेष रूप से ध्यान दिया जाए।
एक तिहाई बसें हैं खटारा
डिपो की लगभग एक तिहाई बसें खटारा हो चुकी हैं। 57 बसों वाले बेड़े में से 10 बसों की नीलामी रिपोर्ट निगम मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। मतलब यह है कि 10 बसें ऐसी चल रही हैं, जो नीलामी की सीमा पार कर चुकी हैं। जरूरी मरम्मत के साथ उन्हें चलाया जा रहा है। इसके अलावा 10 ऐसी और भी बस हैं, जो आगामी सितंबर में नीलामी की अवधि पूरी कर लेंगी। ऐसे में सितंबर आने तक 57 बसों में से कुल 20 बस ऐसी होंगी, जो नीलामी की समय सीमा पार कर लेंगी। जाहिर तौर पर ऐसी बसों से यात्रा करना आम यात्रियों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

किए जा रहे बेहतर प्रबंध
यात्रियों की सुविधा के लिए सभी बेहतर प्रबंध किए जा रहे हैं। बसों का समुचित संचालन हो रहा है। बसों को लेकर रिपोर्ट भेजी गई है। उच्चस्तर पर निर्णय लिया जाएगा। सभी बस फिलहाल बेहतर ढंग से संचालन कर रही हैं।
-सत्येंद्र चौधरी, एआरएम
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