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Ambedkar Nagar News: कहीं मकान मालिकों के नाम नदारद तो कहीं संपत्तियों के आकलन में हेरफेर
Sat, 06 Sep 2025 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:24 AM IST
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.मोहम्मद तौहीद
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। नगर पालिका परिषद जलालपुर द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कराए गए हाउस टैक्स सर्वे में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सार्वजनिक की गई सूची में कई मकान मालिकों के नाम नदारद हैं, वहीं कई संपत्तियों का विवरण अस्पष्ट है। इससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने संपत्तियों के आकलन में हेरफेर होने की आशंका जताते हुए दोबारा से सर्वे कराने की मांग की है।
नगर पालिका ने यह सर्वे एक निजी कंपनी को करीब 22 लाख रुपये में सौंपा था। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सर्वे टीम ने न तो मकान मालिकों से संपर्क किया और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कोई जानकारी जुटाई। पूरी प्रक्रिया मनमाने ढंग से पूरी कर रिपोर्ट सीधे नगर पालिका को सौंप दी गई। सूची में कई मकानों का विवरण या तो अधूरा है या फिर गलत दर्ज किया गया है, जिससे टैक्स निर्धारण और वसूली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। तकनीकी व प्रशासनिक चूक के चलते सर्वे की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा रहा है।
सर्वे में नहीं हुई पारदर्शिता
फोटो - 3
वार्ड संख्या 5 के सभासद मोहम्मद तौहीद ने कहा कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण सर्वे मनमाने ढंग से किया गया। टीम ने मकान मालिकों से बातचीत तक नहीं की और असल जानकारी सूची में शामिल नहीं की गई।
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सूची पर पुनर्विचार की आवश्यकता
फोटो - 4
वार्ड 16 के मोहम्मद अरशद ने कहा कि सूची में कई मकान मालिकों के नाम ही नहीं हैं। नगर पालिका को चाहिए कि सूची की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन कराए, ताकि सही और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
लाखों खर्च, फिर भी अधूरी रिपोर्ट
फोटो - 5
वार्ड 17 के शीतला प्रसाद ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सर्वे अधूरा और त्रुटिपूर्ण है। कई संपत्तियां गलत तरीके से दर्ज हैं। जब तक सुधार नहीं होगा, पारदर्शिता संभव नहीं है।
दाेबारा से कराया जाएगा सर्वे
जिस निजी कंपनी को सर्वे का कार्य दिया गया था, उसे तलब किया गया है। सूची में आई खामियों को दूर करने के लिए सर्वे को दोबारा कराया जाएगा। इस बार सभी मकान मालिकों और संपत्तियों की वास्तविक जानकारी को शामिल किया जाएगा।
- अरविंद कुमार, अधिशासी अधिकारी
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नगर पालिका ने यह सर्वे एक निजी कंपनी को करीब 22 लाख रुपये में सौंपा था। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सर्वे टीम ने न तो मकान मालिकों से संपर्क किया और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कोई जानकारी जुटाई। पूरी प्रक्रिया मनमाने ढंग से पूरी कर रिपोर्ट सीधे नगर पालिका को सौंप दी गई। सूची में कई मकानों का विवरण या तो अधूरा है या फिर गलत दर्ज किया गया है, जिससे टैक्स निर्धारण और वसूली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। तकनीकी व प्रशासनिक चूक के चलते सर्वे की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा रहा है।
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सर्वे में नहीं हुई पारदर्शिता
फोटो - 3
वार्ड संख्या 5 के सभासद मोहम्मद तौहीद ने कहा कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण सर्वे मनमाने ढंग से किया गया। टीम ने मकान मालिकों से बातचीत तक नहीं की और असल जानकारी सूची में शामिल नहीं की गई।
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सूची पर पुनर्विचार की आवश्यकता
फोटो - 4
वार्ड 16 के मोहम्मद अरशद ने कहा कि सूची में कई मकान मालिकों के नाम ही नहीं हैं। नगर पालिका को चाहिए कि सूची की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन कराए, ताकि सही और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
लाखों खर्च, फिर भी अधूरी रिपोर्ट
फोटो - 5
वार्ड 17 के शीतला प्रसाद ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सर्वे अधूरा और त्रुटिपूर्ण है। कई संपत्तियां गलत तरीके से दर्ज हैं। जब तक सुधार नहीं होगा, पारदर्शिता संभव नहीं है।
दाेबारा से कराया जाएगा सर्वे
जिस निजी कंपनी को सर्वे का कार्य दिया गया था, उसे तलब किया गया है। सूची में आई खामियों को दूर करने के लिए सर्वे को दोबारा कराया जाएगा। इस बार सभी मकान मालिकों और संपत्तियों की वास्तविक जानकारी को शामिल किया जाएगा।
- अरविंद कुमार, अधिशासी अधिकारी