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वर्षों बाद निपटे केस तो फरियादियों के खिले चेहरे

Sat, 11 Sep 2021 11:08 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:08 PM IST
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If the cases are settled after years, then the faces of the complainants are in full bloom.
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन ने शनिवार को वर्षों से परेशान कई फरियादियों के चेहरे खिला दिए। कई ऐसे भी फरियादी वहां पहुंचे, जिनका मामला दशकों से लंबित था। ऐसे फरियादियों के मामले निपटने के बाद कहीं विपक्षी समेत वादी आपस में गले मिलते दिखे तो कहीं मामले का निस्तारण हो जाने की खुशी दोनों पक्षों में साफ देखने को मिली। उधर, बैंक ऋण न चुकता कर पाने वाले नागरिकों ने राष्ट्रीय लोक अदालत का भरपूर लाभ उठाया। विशेष छूट प्राप्त कर ऋण को चुकता करने के बाद राहत की सांस ली।
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जनपद न्यायाधीश पद्मनरायण मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने तमाम परिवारों में खुशियां बिखेर दीं। दरअसल इस लोक अदालत में ऐसे तमाम मामले पंजीकृत किए गए थे जो लंबे समय से लंबित चले आ रहे हैं। आपसी सुलह समझौते के आधार पर न्यायिक देखरेख के बीच मामलों का निस्तारण हुआ तो संबंधित पक्षों में खुशियां बिखर गईं। कोर्ट परिसर में 1981 से मुकदमा लड़ रहे केपी सिंह व जितेंद्र सिंह पहुंचे हुए थे। यह दोनों भूमि विवाद को लेकर आपस में मुकदमा लड़ते आ रहे थे। शनिवार को एक टेबल पर दोनों साथ बैठे दिखे। न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों ही पक्ष आपसी सहमति के आधार पर मामले का निस्तारण होने से खुश दिखे। अमर उजाला टीम ने ऐसे कई अन्य फरियादियों से भी बातचीत की।
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12 वर्ष बाद ऋण से मिली मुक्ति
राष्ट्रीय लोक अदालत ने आज परिवार में एक नई खुशी प्रदान कर दी है। यह कहना था अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मोहिउद्दीनपुर निवासी राजेंद्र सिंह का। बताया कि उनके भाई ने वर्ष 2009 में 40 हजार रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा बरियावन से ऋण लिया था। परंतु आर्थिक तंगी के चलते उसकी अदायगी नहीं कर पाए। अब करीब 12 वर्ष बाद राष्ट्रीय लोक अदालत में उन्हें 21 हजार रुपये की अदायगी कर ऋण से मुक्ति मिल गई। इससे परिवार ने अब राहत की सांस ली है।
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50 हजार की मिली छूट
लोहरा बरामदपुर गांव निवासी प्रमोद कुमार ने राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन को सराहनीय पहल बताया। कहा कि करीब एक दशक बाद लोक अदालत की मदद से उन्हें कर्ज से मुक्त होने का मौका मिला। बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में ढाई लाख रुपये का ऋण लिया था। परंतु परिस्थितियों ने साथ नहीं दिया और वे ऋण की अदायगी नहीं कर पाए। लोक अदालत में उन्हें 50 हजार रुपये की छूट मिली और उन्हें ऋण को चुकता कर दिया।
लोक अदालत ने दिलाई बड़ी राहत
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के चंदैनी गांव निवासी फिरोज अहमद भी राष्ट्रीय लोक अदालत में ऋण से मुक्त होने पर राहत की सांस लेते नजर आए। बताया कि वर्ष 2017 में उन्होंने व्यापार के लिए 1 लाख 45 हजार रुपये का ऋण लिया था। परंतु इस बीच कोरोना महामारी ने उनके व्यापार को प्रभावित कर दिया। इससे वह ऋण की अदायगी समय से नहीं कर पाए। लोक अदालत में उन्हें 45 हजार रुपये की छूट मिली और एक लाख रुपये की अदायगी कर कर्ज से मुक्त होने के बाद अब राहत की सांस ली है।

ऋण चुकता करने में मिली मदद
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के ताजपुर निवासी ऋषभ वर्मा भी पिता द्वारा लिए गए केसीसी ऋण को राष्ट्रीय लोक अदालत में चुकता कर राहत महसूस करते दिखे। बताया कि वर्ष 2017 में उनके पिता ने केसीसी ऋण लिया था। मौजूदा समय में वह 96 हजार रुपये पहुंच गया था। राष्ट्रीय लोक अदालत में उन्हें 20 हजार रुपये की छूट मिली, और उन्हें जमा कर ऋण से मुक्त हो गए। कहा कि इससे खुशी महसूस हो रही है।
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