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कोरोना काल में एक दूसरे की मदद करना ही इंसानियत
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अंबेडकरनगर। कोरोना महामारी के इस दौर में एक दूसरे की मदद करना ही इंसानियत है। मदद करते समय यह नहीं देखना चाहिए कि वह किस मजहब से ताल्लुक रखता है। इंसानियत कहती है कि सभी एक ही अल्लाह की संतान हैं। ऐसे में सभी की मदद करनी चाहिए। यह आह्वान सोमवार को मौलाना शाहिद ने किया। वह अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित इमामबारगाह में मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
तीन दिवसीय सालाना मजलिस के अंतिम दिन मौलाना शाहिद ने कहा कि इस्लाम इंसानियत का पैगाम देता है। मौजूदा समय में कोरोना संकट चल रहा है। इसे देखते हुए हम सभी की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंदों की मदद बढ़ चढ़कर करें। मदद करने के दौरान यह कतई न देखें कि वह किस मजहब से ताल्लुक रखता है।
मौलाना ने कहा कि कर्बला में जब वक्त के बादशाह में हराम को हलाल व हलाल को हराम करार देना शुरू किया, तो इमाम हुसैन ने आगे बढ़कर इसका विरोध करते हुए इंसानियत व इस्लाम को बचाने के लिए अपने 72 साथियों के साथ शहादत दे दी थी। उन्होंने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। बाद में अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। इस मौके पर मेंहदी रजा, रजा अनवर, इम्तियाज हुसैन, कासिम हुसैन, मंसूर अख्तर, गालिब अब्बास आदि मौजूद रहे।
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तीन दिवसीय सालाना मजलिस के अंतिम दिन मौलाना शाहिद ने कहा कि इस्लाम इंसानियत का पैगाम देता है। मौजूदा समय में कोरोना संकट चल रहा है। इसे देखते हुए हम सभी की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंदों की मदद बढ़ चढ़कर करें। मदद करने के दौरान यह कतई न देखें कि वह किस मजहब से ताल्लुक रखता है।
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मौलाना ने कहा कि कर्बला में जब वक्त के बादशाह में हराम को हलाल व हलाल को हराम करार देना शुरू किया, तो इमाम हुसैन ने आगे बढ़कर इसका विरोध करते हुए इंसानियत व इस्लाम को बचाने के लिए अपने 72 साथियों के साथ शहादत दे दी थी। उन्होंने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। बाद में अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। इस मौके पर मेंहदी रजा, रजा अनवर, इम्तियाज हुसैन, कासिम हुसैन, मंसूर अख्तर, गालिब अब्बास आदि मौजूद रहे।
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