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महज एक कमरे में सिमटा अस्पताल, कैसे हो इलाज
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जलालपुर (अंबेडकरनगर)। संसाधनों की कमी के चलते जलालपुर होम्योपैथिक अस्पताल महज एक कमरे में सिमट कर चल रहा है। इसी एक कमरे में चिकित्सक के साथ स्टाफ के बैठने, मरीज को देखने व दवा के वितरण तक की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में मरीजों को बेहतर इलाज कैसे मिले, इस पर जिम्मेदार कुछ भी बोलने से बचकर चुप्पी साधे हैं।
स्टाफ से जुड़े लोगों ने बताया कि तमाम पत्राचार के बावजूद अस्पताल को अतिरिक्त कक्ष मुहैया कराने की जरूरत आला अधिकारी नही समझ रहे हैं। हर दिन इलाज के लिए यहां पचास से अधिक मरीज आते हैं। जलालपुर होम्योपैथिक अस्पताल पहले किराए के भवन में मंगुराडिला में चलता था। वर्ष 2018 में होम्योपैथिक चिकित्सालय जलालपुर को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन के एक कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया।
अस्पताल के चिकित्सक डॉ. महेंद्र प्रताप, फार्मासिस्ट अश्विनी कुमार गुप्त, वार्ड ब्वाय हरिश्चन्द्र खरवार व चौकीदार कम स्वीपर सुजीत कुमार की तैनाती है। अस्पताल में उपचार के लिए प्रतिदिन लगभग 40 से 50 मरीज पहुंचते हैं। लापरवाही का आलम यह कि यहां मरीजों के बैठने तक के लिए कोई व्यवस्था नही है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को इधर उधर जगह तलाश कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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इलाज को पहुंचे मनोज सिंह, शिवम त्रिपाठी व मनीष पटेल आदि ने बताया कि सरकार सिर्फ कागजों पर ही बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा करती है। जबकि हकीकत में होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने को जमीनी तौर पर कोई ठोस कार्य नहीं किए जा रहे। इनकी बदहाल स्थिति लोगों का भरोसा उपचार की इन दोनों पैथी से खत्म कर रही है।
शासन से किया गया पत्राचार
जलालपुर सीएचसी भवन में एक कमरा होम्योपैथिक अस्पताल के लिए मिला है। इसमें बढ़ोत्तरी के लिए विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों में मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. महेन्द्र प्रताप, चिकित्सक होम्योपैथिक अस्पताल
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स्टाफ से जुड़े लोगों ने बताया कि तमाम पत्राचार के बावजूद अस्पताल को अतिरिक्त कक्ष मुहैया कराने की जरूरत आला अधिकारी नही समझ रहे हैं। हर दिन इलाज के लिए यहां पचास से अधिक मरीज आते हैं। जलालपुर होम्योपैथिक अस्पताल पहले किराए के भवन में मंगुराडिला में चलता था। वर्ष 2018 में होम्योपैथिक चिकित्सालय जलालपुर को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन के एक कक्ष में शिफ्ट कर दिया गया।
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अस्पताल के चिकित्सक डॉ. महेंद्र प्रताप, फार्मासिस्ट अश्विनी कुमार गुप्त, वार्ड ब्वाय हरिश्चन्द्र खरवार व चौकीदार कम स्वीपर सुजीत कुमार की तैनाती है। अस्पताल में उपचार के लिए प्रतिदिन लगभग 40 से 50 मरीज पहुंचते हैं। लापरवाही का आलम यह कि यहां मरीजों के बैठने तक के लिए कोई व्यवस्था नही है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को इधर उधर जगह तलाश कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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इलाज को पहुंचे मनोज सिंह, शिवम त्रिपाठी व मनीष पटेल आदि ने बताया कि सरकार सिर्फ कागजों पर ही बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा करती है। जबकि हकीकत में होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने को जमीनी तौर पर कोई ठोस कार्य नहीं किए जा रहे। इनकी बदहाल स्थिति लोगों का भरोसा उपचार की इन दोनों पैथी से खत्म कर रही है।
शासन से किया गया पत्राचार
जलालपुर सीएचसी भवन में एक कमरा होम्योपैथिक अस्पताल के लिए मिला है। इसमें बढ़ोत्तरी के लिए विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया है। फिलहाल उपलब्ध संसाधनों में मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. महेन्द्र प्रताप, चिकित्सक होम्योपैथिक अस्पताल