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Adulteration: मुनाफे के खेल में सेहत दांव पर, रोकथाम का असर नहीं, आम आदमी की सेहत दांव पर
Tue, 06 Sep 2022 04:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
अश्विनी मिश्रा, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
अश्विनी मिश्रा, अमर उजाला, अंबेडकरनगर
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Sep 2022 04:33 PM IST
सार
मुनाफ के खेल में जनता की सेहत दांव पर है। एफएसडीए का काम सिर्फ निरीक्षण तक ही सिमटा है। नाममात्र की सैंपलिंग होने से धंधेबाज बेखौफ हैं और खुलकर मनमानी कर रहे हैं।
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अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय पर जांच अभियान चलाती खाद्य विभाग की टीम।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मुनाफा कमाने के खेल में घटिया व मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री बाजारों में धड़ल्ले से हो रही है। आम आदमी की सेहत ऐसी खाद्य सामग्री का सेवन करने से दांव पर है। इसके बावजूद मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने को जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फर्ज अदायगी तक सिमटी है। गठित टीमें खाद्य सामग्री की नमूना सैंपलिंग छोड़कर सिर्फ प्रतिष्ठानों के निरीक्षण तक ही सिमटी है। इसका अंदाजा इसी से दिखता है कि बीते पांच माह के दौरान 795 निरीक्षण के इतर मात्र 76 नमूने ही जांच को लैब भेजे गए।
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बीते पांच माह के दौरान नमूना सैंपलिंग के बाद जनविश्लेषण प्रयोगशाला में जांच को भेजे गए नमूनों में से 34 नमूने गुणवत्ता में घटिया मिलने पर फेल पाए गए हैं। इसमें ज्यादातर फेल नमूने दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थ मसलन पनीर, खोवा, व इससे बनने वाली मिठाइयों के हैं। धंधेबाज न्यूनतम लागत पर अधिकतम लाभ पाने के लिए घटिया गुणवत्ता के साथ मिलावट कर तैयार खाद्य सामग्री भी बेचने से कोई गुरेज नहीं बरत रहे हैं।
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ऐसे खाद्य सामग्री का सेवन करने से लोगों की सेहत भी बिगड़ रही है। इस पर रोक लगाने की कार्रवाई सिर्फ फर्ज अदायगी तक सीमित है। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में अप्रैल से लेकर 31 अगस्त तक कार्रवाई के नाम पर विभिन्न खाद्य सामग्री के कुल 76 नमूने ही लैब जांच के लिए सील कर भेजे गए।
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इनमें से 34 की लैब रिपोर्ट जांच में फेल आयी है। इसके साथ ही उक्त अवधि में न्याय दंडाधिकारी कोर्ट में लंबित वादों के निस्तारण के दौरान जांच में फेल आए नमूनों से जुड़े प्रतिष्ठानों व दुकानों पर 10.09 लाख का अर्थदंड भी लगाया गया।
प्रतिबंध के बाद भी खुले में बिक रहा खाद्य तेल
जिले में मिलावट का खेल सिर्फ दूध व उससे बनी सामग्री तक ही सीमित नहीं है। इसके साथ ही प्रतिबंध के बाद भी खुले में बिक रहे खाद्य तेलों में भी धड़ल्ले से मिलावट हो रही है। इसके तहत घटिया और गुणवत्ता विहीन खाद्य तेल तैयार कर इसे पैक कर बिना खौफ बाजारों में बिक्री के लिए खपाया जा रहा है। विशेषतौर पर ऐसे मिलावटी खाद्य तेल का इस्तेमाल चाट, समोसा समेत फास्ट फूड बनाने वाले तमाम दुकानदार बड़े स्तर पर करते हैं। इसके बावजूद इसकी बिक्री रोकने को खाद्य तेलों की नमूना सैंपलिंग कार्रवाई बस निरीक्षण तक ही सिमटी है। इसके साथ ही बाजारों में बिक रहे घटिया व मिलावटी सब्जी मसालों की जांच को भी नमूना सैंपलिंग कार्रवाई बस कागजों पर दिखायी पड़ती है।
निरीक्षण 795, नमूने सिर्फ 76
मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के लिए एफएसडीए के जिम्मेदार बस रस्म अदायगी तक सिमटे हैं। इसका अंदाजा इसी से दिखता है कि बीते पांच माह के दौरान खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की टीम ने वाहवाही लूटने के लिए दुकानों व प्रतिष्ठानों के 795 निरीक्षण तो किए लेकिन इस दौरान मात्र 76 खाद्य सामग्री के नमूना ही गुणवत्ता जांच के लिए लैब को भेजे गे। हर माह करीब डेढ़ सौ दुकानों का निरीक्षण करने वाले एफएसडीए के अधिकारी हर माह औसतन 12 से 15 सामग्री के नमूने ही लैब जांच को भेज सके हैं।
किडनी व लीवर को सर्वाधिक नुकसान
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज शुक्ला का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ के सेवन से सबसे अधिक खतरा किडनी व लीवर के खराब होने का रहता है। ऐसे पदार्थों का नियमित सेवन पाचन क्रिया को प्रभावित कर सीने में जलन पैदा करता है। इसके साथ ही दिल तक रक्त ले जाने वाली धमनियों में भी इससे होने वाली रुकावट से हृदय रोग का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।,
सहायक आयुक्त खाद्य राजवंश श्रीवास्तव का कहना है कि मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के नियमित तौर पर टीमें गठित कर जांच पड़ताल करायी जाती है। प्रतिष्ठान के निरीक्षण के दौरान जहां जरूरत महसूस होती है, वहां पर बनने वाली अथवा बेची जाने वाली खाद्य सामग्री का नमूना लेकर उसे जांच के लिए लैब भेजा जाता है। त्योहारों के समय जांच कार्य में तेजी लाने को सघन अभियान चलाकर नमूना सैंपलिंग की कार्रवाई होगी।