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घरों व मंदिरों में धूमधाम से मना हनुमान जयंती का पर्व
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टांडा। नरक चतुर्दशी के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान के बीच शनिवार को हनुमान जयंती श्रद्धापूर्वक मनी। कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को नगर के विभिन्न हनुमान मंदिरों सहित लोगों ने भक्ति भावना के साथ अपने घरों पर हनुमानजी की जयंती विधिविधान से मनाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
शनिवार की शाम नगर के प्रसिद्ध श्रीहनुमान गढ़ी सहित अन्य प्रमुख हनुमान मंदिरों को इस महोत्सव के मद्देनजर भव्य रूप से सजाया गया। श्रीउदासीन आश्रम बड़ाफाटक छज्जापुर, श्रीउदासीन आश्रम हनुमान मंदिर नगर पालिका व झारखंडी पर स्थित हनुमान मंदिर की सजावट लोगों को खूब आकर्षित कर रही थी। इस अवसर पर मंदिरों को फूलों के अलावा बिजली की रंग बिरंगी झालरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सजाया गया था। दीपावली से पूर्व मनाए जाने वाली छोटी दीपावली को हनुमान जयंती के पर्व के रूप में मना गया।
मंदिरों व घरों पर धार्मिक आयोजन हुए। जयंती पर मंदिरों में वीर हनुमानजी महाराज का विधिवत पूजन व परंपरागत भव्य श्रृंगार के बाद देशी घी के मालपुए व लड्डू का भोग लगा। नगर के पं. अजीत द्विवेदी इस महोत्सव की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि श्रीहनुमान जयंती का पर्व सभी प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाला है। इस दिन किया गया जप, तप, पूजन-अर्चन और श्रीहनुमानजी का दर्शन लाखों गुना फलदायी है। सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ और श्रीसुंदर कांड पाठ के बाद महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।
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शनिवार की शाम नगर के प्रसिद्ध श्रीहनुमान गढ़ी सहित अन्य प्रमुख हनुमान मंदिरों को इस महोत्सव के मद्देनजर भव्य रूप से सजाया गया। श्रीउदासीन आश्रम बड़ाफाटक छज्जापुर, श्रीउदासीन आश्रम हनुमान मंदिर नगर पालिका व झारखंडी पर स्थित हनुमान मंदिर की सजावट लोगों को खूब आकर्षित कर रही थी। इस अवसर पर मंदिरों को फूलों के अलावा बिजली की रंग बिरंगी झालरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सजाया गया था। दीपावली से पूर्व मनाए जाने वाली छोटी दीपावली को हनुमान जयंती के पर्व के रूप में मना गया।
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मंदिरों व घरों पर धार्मिक आयोजन हुए। जयंती पर मंदिरों में वीर हनुमानजी महाराज का विधिवत पूजन व परंपरागत भव्य श्रृंगार के बाद देशी घी के मालपुए व लड्डू का भोग लगा। नगर के पं. अजीत द्विवेदी इस महोत्सव की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि श्रीहनुमान जयंती का पर्व सभी प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाला है। इस दिन किया गया जप, तप, पूजन-अर्चन और श्रीहनुमानजी का दर्शन लाखों गुना फलदायी है। सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ और श्रीसुंदर कांड पाठ के बाद महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन हुआ।
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