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Ambedkar Nagar News: फर्जी दस्तावेज के सहारे पाई नौकरी, तीन शिक्षिकाएं बर्खास्त

Wed, 16 Jul 2025 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Jul 2025 10:39 PM IST
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Got job with the help of fake documents, three teachers dismissed
अंबेडकरनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर वर्ष 2005 से नौकरी कर रहीं तीन शिक्षिकाओं को बर्खास्त कर दिया गया है। एसटीएफ की जांच के दौरान इन्हें निलंबित कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन तीनों कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी थीं। इन शिक्षिकाओं ने करीब 20 वर्षों तक अवैध रूप से नौकरी करते हुए करीब तीन करोड़ रुपये का वेतन लिया। अब उनके खिलाफ वेतन वसूली और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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वर्ष 2023-24 में एसटीएफ लखनऊ को फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने की शिकायत मिली थी। 19 जनवरी 2024 काे शिक्षक भर्तियों में हुई अनियमितता की जांच के लिए भियांव ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय कुर्मीपुर में तैनात सहायक अध्यापक कंचन देवी, अकबरपुर के प्राथमिक विद्यालय गौरा की प्रधानाध्यापक मानधाता व सहायक अध्यापक सरोजलता के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं। यह तीनों जिले की ही मूल निवासी हैं। विभाग की ओर से नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज की स्वप्रमाणित प्रतियां 28 फरवरी 2024 को एसटीएफ को भेजी गई थीं। एसटीएफ की ओर से दस्तावेज की जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट 24 मई 2024 को विभाग को भेजी गई थी।
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बिना यूजीसी सूचीबद्ध कॉलेज से दो ने किया बीएड, एक ने लगाया फर्जी प्रमाणपत्र
एसटीएफ की जांच आख्या में सहायक अध्यापिका सरोजलता की ओर से दाखिल की गई बीएड वर्ष 2005 की डिग्री दून इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी रायपुर छत्तीसगढ़ की थी। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूनिवर्सिटी का नाम यूजीसी की सूची में शामिल न होने की रिपोर्ट दी थी। ऐसे में अमान्य डिग्री व अंकपत्र लगाकर नौकरी पाने की बात सामने आई थी। मानधाता ने भी दून इंटरनेशनल की वर्ष 2003 की डिग्री लगाई थी। कंचन देवी ने वर्ष 1994 में बीएड की डिग्री डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज गोंडा की लगाई थी। जांच में पाया गया कि डिग्री पर जो अनुक्रमांक अंक दिया गया है उसपर कंचन देवी के नाम से कोई छात्रा पंजीकृत नहीं थी। इस प्रकार यह डिग्री फर्जी बनवाकर लगाई गई थी।
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नहीं दे पाई थीं साक्ष्य
रिपोर्ट के आधार पर तीनों शिक्षिकाओं से विभाग की ओर से स्पष्टीकरण लिया गया था लेकिन तीनों अपने प्रपत्रों को सही दर्शाने के लिए कोई साक्ष्य नहीं दे सकी थीं। इस पर मानधाता को 16 दिसंबर 2024, सरोजलता को 20 दिसंबर 2024 व कंचन देवी को 11 फरवरी 2025 को निलंबित कर दिया गया था। तीनों की ओर से निलंबन के विरुद्ध उच्च न्यायालय में भी अपील की गई थी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली थी।

एफआईआर के साथ होगी रिकवरी
एसटीएफ की जांच में फर्जी दस्तावेजों का खुलासा होने के बाद तीनों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कोई उपयुक्त जवाब नहीं दिया गया था। ऐसे में तीनों को बर्खास्त करते हुए रिकवरी व एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।

- प्रवीण कुमार तिवारी, प्रभारी बीएसए
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