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पौने छह लाख पात्रों का नहीं बना गोल्डेन कार्ड
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अंबेडकरनगर। जिले में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना गति नहीं पकड़ पा रही है। योजना शुरू हुए लगभग तीन वर्ष बीत गए, लेकिन अब तक 8 लाख 24 हजार 345 गोल्डेन कार्ड के सापेक्ष 5 लाख 76 हजार 547 लोगों का गोल्डेन कार्ड नहीं बन सका है। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग पात्रों को दोषी ठहरा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चयनित पात्र स्वयं ही कार्ड बनवाने को लेकर सक्रिय नहीं हो रहे हैं। हालांकि इसके लिए समय-समय पर उन्हें जागरूक भी किया जाता है। योजना को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन वर्ष में 4 हजार 802 मरीजों का ही इलाज सुनिश्चित हो सका है। इसमें एक हजार 17 का निजी, जबकि 3 हजार 905 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में हुआ है। इस बीच योजना को गति प्रदान करने के लिए दो नए निजी अस्पताल का चयन किया गया है।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े, इसके लिए 23 सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का संचालन प्रारंभ हुआ था। सीएमओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार योजना के तहत जिले में 8 लाख 24 हजार 345 पात्रों का चयन किया गया था। योजना का लाभ इन्हेें सुचारु रूप से मिल सके, इसके लिए गोल्डेन कार्ड बनाए गए। हालांकि गोल्डेन कार्ड बनाने को लेकर बरती गई शिथिलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक मात्र दो लाख 77 हजार 798 लोगों का ही गोल्डेन कार्ड बन सका है। ऐसे में अब तक 5 लाख 76 हजार 547 लोगों का गोल्डेन कार्ड नहीं बन सका है। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग संबंधित पात्रों को ही दोषी ठहरा रहा है। दरअसल जनसेवा केेंद्र पर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनता है। ऐसे में संबंधित पात्र स्वयं ही गोल्डेन कार्ड बनवाने को लेकर सक्रिय नहीं हो रहे हैं।
चार हजार मरीजों का हुआ इलाज
आयुष्मान योजना वर्ष 2018 में प्रारंभ हुई थी। अब तक 4 हजार 802 मरीजों का योजना के तहत इलाज हुआ है। इसमें तीन निजी अस्पतालों में एक हजार 17, जबकि 11 सरकारी अस्पतालों में 3 हजार 905 मरीजों का इलाज हो सका है। योजना का पात्रों को समुचित लाभ मिल सके, इसके लिए तीन निजी व जिला अस्पताल समेत 11 राजकीय अस्पतालोें का चयन किया गया है। अब योजना को गति प्रदान करने के लिए दो नए निजी अस्पतालों का चयन किया गया है। इसमें दयाराम वर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट एंड ट्रॉमा सेेंटर अस्पताल व एसीई हॉस्पिटल का चयन किया गया है।
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सीएचसी पर इलाज होने में दिक्कतें
23 सितंबर 2018 से संचालित इस योजना का लाभ मरीजों को दिलाने के लिए प्रारंभ में तीन सीएचसी का चयन हुआ था। हालांकि बाद में सभी नौ सीएचसी में योजना के तहत इलाज की सुविधा प्रदान की गई। लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सभी सीएचसी पर लगभग दो सौ मरीजों का ही इलाज हो सका है। इसके पीछे मुख्य कारण सीएचसी पर समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि सीएचसी पर प्लेन एमबीबीएस होने के कारण गंभीर मरीजों का इलाज सीएचसी पर नहीं हो पाता है। ऐसे में उन्हें निजी या फिर जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
निशुल्क बन रहा गोल्डेन कार्ड
योजना के तहत चयनित पात्रों का निशुल्क गोल्डेन कार्ड बन रहा है। पात्र सरकारी संस्थानों के अलावा किसी भी जनसेवा केेंद्र पर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनवा सकते हैं। पात्रों को चाहिए कि वे जनसेवा केंद्र या फिर सरकारी संस्थानों पर पहुंचकर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनवा लें।
डॉ. मुकुल त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत
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आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े, इसके लिए 23 सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का संचालन प्रारंभ हुआ था। सीएमओ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार योजना के तहत जिले में 8 लाख 24 हजार 345 पात्रों का चयन किया गया था। योजना का लाभ इन्हेें सुचारु रूप से मिल सके, इसके लिए गोल्डेन कार्ड बनाए गए। हालांकि गोल्डेन कार्ड बनाने को लेकर बरती गई शिथिलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक मात्र दो लाख 77 हजार 798 लोगों का ही गोल्डेन कार्ड बन सका है। ऐसे में अब तक 5 लाख 76 हजार 547 लोगों का गोल्डेन कार्ड नहीं बन सका है। इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग संबंधित पात्रों को ही दोषी ठहरा रहा है। दरअसल जनसेवा केेंद्र पर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनता है। ऐसे में संबंधित पात्र स्वयं ही गोल्डेन कार्ड बनवाने को लेकर सक्रिय नहीं हो रहे हैं।
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चार हजार मरीजों का हुआ इलाज
आयुष्मान योजना वर्ष 2018 में प्रारंभ हुई थी। अब तक 4 हजार 802 मरीजों का योजना के तहत इलाज हुआ है। इसमें तीन निजी अस्पतालों में एक हजार 17, जबकि 11 सरकारी अस्पतालों में 3 हजार 905 मरीजों का इलाज हो सका है। योजना का पात्रों को समुचित लाभ मिल सके, इसके लिए तीन निजी व जिला अस्पताल समेत 11 राजकीय अस्पतालोें का चयन किया गया है। अब योजना को गति प्रदान करने के लिए दो नए निजी अस्पतालों का चयन किया गया है। इसमें दयाराम वर्मा मल्टी स्पेशलिस्ट एंड ट्रॉमा सेेंटर अस्पताल व एसीई हॉस्पिटल का चयन किया गया है।
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सीएचसी पर इलाज होने में दिक्कतें
23 सितंबर 2018 से संचालित इस योजना का लाभ मरीजों को दिलाने के लिए प्रारंभ में तीन सीएचसी का चयन हुआ था। हालांकि बाद में सभी नौ सीएचसी में योजना के तहत इलाज की सुविधा प्रदान की गई। लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सभी सीएचसी पर लगभग दो सौ मरीजों का ही इलाज हो सका है। इसके पीछे मुख्य कारण सीएचसी पर समुचित व्यवस्था न होना बताया जा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि सीएचसी पर प्लेन एमबीबीएस होने के कारण गंभीर मरीजों का इलाज सीएचसी पर नहीं हो पाता है। ऐसे में उन्हें निजी या फिर जिला अस्पताल व राजकीय मेडिकल कॉलेज तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
निशुल्क बन रहा गोल्डेन कार्ड
योजना के तहत चयनित पात्रों का निशुल्क गोल्डेन कार्ड बन रहा है। पात्र सरकारी संस्थानों के अलावा किसी भी जनसेवा केेंद्र पर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनवा सकते हैं। पात्रों को चाहिए कि वे जनसेवा केंद्र या फिर सरकारी संस्थानों पर पहुंचकर निशुल्क गोल्डेन कार्ड बनवा लें।
डॉ. मुकुल त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान भारत