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उल्लास से मनी देवोत्थानी एकादशी
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अंबेडकरनगर। देवोत्थानी एकादशी सोमवार को जिले में उल्लास के साथ मनाई गई। महिलाओं ने व्रत रखकर विशेष पूजन अर्चन किया। शकरकंद की खीर बनाकर खाई, सिंघाड़ा व गन्ने से भी पूजन किया। मंदिरों में पूजन अर्चन पूरे दिन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में होते रहे। मंगलवार भोर में अब महिलाएं व युवतियां गन्ने से सूप को पीटते हुए दरिद्रता भगाएंगी। इसके बाद विशेष पूजा अर्चना करेंगी। एकादशी पर गन्ना, गंजी, सिघाड़ा के भोग लगाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि एकादशी को भगवान श्रीविष्णु अपनी निद्रा का परित्याग कर सृष्टि में नूतन प्राण का संचार करते हैं।
प्रबोधिनी एकादशी पर्व पर सुबह महिलाओं ने एकादशी का व्रत रखा। देर शाम महिलाओं ने विशेष पूजन अर्चन के बाद व्रत का पारण किया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एकादशी पर्व पर खुशी का माहौल दिखा। शाम होते होते महिलाओं ने घरों के बाहर मुख्य गेट के बाहर रंगोली बनाई, साथ ही दीप प्रज्वलित भी किया। जगह जगह आतिशबाजी भी हुई। अब महिलाएं मंगलवार को भोर में गन्ने से सूप को पीटेंगी। घर के कोने कोने में सूप पीटते हुए घर से बाहर निकलेंगी और मोहल्ले या फिर गांव के बाहर तक जाएंगी।
मान्यता है कि सूप की पिटाई करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार नगर के विभिन्न मठ मंदिरों के अलावा पवित्र सरयू तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय रहा। मंदिरों में स्थापित विग्रहों का विधिवत पूजन अर्चन कर लोगों ने पुरोहितों को दान दिया। देवोत्थानी एकादशी पर्व पर व्रत धारण कर गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, पान, सुपाडी, ऋतुफल, मिष्ठान आदि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक लोगों ने श्रीहरि विष्णु की अराधना की। शाम को गन्ना चूसने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया।
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प्रबोधिनी एकादशी पर्व पर सुबह महिलाओं ने एकादशी का व्रत रखा। देर शाम महिलाओं ने विशेष पूजन अर्चन के बाद व्रत का पारण किया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एकादशी पर्व पर खुशी का माहौल दिखा। शाम होते होते महिलाओं ने घरों के बाहर मुख्य गेट के बाहर रंगोली बनाई, साथ ही दीप प्रज्वलित भी किया। जगह जगह आतिशबाजी भी हुई। अब महिलाएं मंगलवार को भोर में गन्ने से सूप को पीटेंगी। घर के कोने कोने में सूप पीटते हुए घर से बाहर निकलेंगी और मोहल्ले या फिर गांव के बाहर तक जाएंगी।
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मान्यता है कि सूप की पिटाई करने से घर की दरिद्रता दूर होती है। टांडा प्रतिनिधि के अनुसार नगर के विभिन्न मठ मंदिरों के अलावा पवित्र सरयू तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। हर हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय रहा। मंदिरों में स्थापित विग्रहों का विधिवत पूजन अर्चन कर लोगों ने पुरोहितों को दान दिया। देवोत्थानी एकादशी पर्व पर व्रत धारण कर गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, पान, सुपाडी, ऋतुफल, मिष्ठान आदि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक लोगों ने श्रीहरि विष्णु की अराधना की। शाम को गन्ना चूसने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया।
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