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चार दशक पुरानी परंपरा का होगा निर्वहन
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विद्युतनगर। टांडा में 42 वर्ष से चली आ रही ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव को इस बार भले ही वह भव्यता न मिल पाए लेकिन आयोजन का तारतम्य नहीं टूटेगा। शासन द्वारा जारी गाइडलाइन के बाद पूजा समितियां तैयारी में जुट गई हैं। समिति के कार्यकर्ताओं का कहना है कोरोना महामारी में शासन ने जो भी दिशा-निर्देश दिया है, उसका गंभीरता से पालन किया जाएगा। इसलिए छोटी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इससे 42 वर्षों से चला आ रहा आयोजन का क्रम बना रहे।
सरयू नदी के पावन तट पर बसी टांडा नगरी में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना का इतिहास करीब 42 वर्ष पुराना है। ग्रामीणांचलों में शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से तथा टांडा नगर में पंचमी से ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव शुरू होता है, जो विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है। शाम 6 बजे से रात में 1 बजे तक मां दुर्गा के भक्तों की भारी भीड़ मां के दर्शन के लिए उमड़ती है।
वैश्विक महामारी में शासन ने दुर्गा पूजा मनाने के लिए जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार किसी दशा में चौराहों व सड़कों पर मूर्तियां न रखी जाएं। मूर्तियों की स्थापना पारंपरिक लेकिन खाली स्थान पर रखी जाय और आकार छोटा रखा जाय। विसर्जन में छोटे वाहनों का प्रयोग करने के निर्देश दिये गये हैं। इन दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गये हैं। दुर्गा पूजा समितियों से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना की वजह से छोटी प्रतिमाएं सजाकर दुर्गा पूजा मनाई जाएगी।
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केंद्रीय दुर्गा पूजा के अध्यक्ष विशाल माझी ने बताया कि प्रशासन अभी तक केवल घर के अंदर ही प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए दिशा-निर्देश दिया है। सवाल करते हुए कहा कि जब सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने व सेनेटाइज के प्रयोग करने की बात दुर्गा पूजा समितियां कह रही हैं, तब सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा पूजा मनाने की अनुमति न देना समझ से परे है।
फिर भी शासन का जो भी निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा। इसके लिए सभी पूजा समिति पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया जा चुका है। कहा गया है कि शासन निर्देशों का पालन करते हुए अपने चार दशक पुरानी परंपरा को बनाए रखना होगा। (संवाद)
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सरयू नदी के पावन तट पर बसी टांडा नगरी में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना का इतिहास करीब 42 वर्ष पुराना है। ग्रामीणांचलों में शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से तथा टांडा नगर में पंचमी से ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव शुरू होता है, जो विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है। शाम 6 बजे से रात में 1 बजे तक मां दुर्गा के भक्तों की भारी भीड़ मां के दर्शन के लिए उमड़ती है।
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वैश्विक महामारी में शासन ने दुर्गा पूजा मनाने के लिए जो गाइडलाइन जारी की है, उसके अनुसार किसी दशा में चौराहों व सड़कों पर मूर्तियां न रखी जाएं। मूर्तियों की स्थापना पारंपरिक लेकिन खाली स्थान पर रखी जाय और आकार छोटा रखा जाय। विसर्जन में छोटे वाहनों का प्रयोग करने के निर्देश दिये गये हैं। इन दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गये हैं। दुर्गा पूजा समितियों से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना की वजह से छोटी प्रतिमाएं सजाकर दुर्गा पूजा मनाई जाएगी।
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केंद्रीय दुर्गा पूजा के अध्यक्ष विशाल माझी ने बताया कि प्रशासन अभी तक केवल घर के अंदर ही प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए दिशा-निर्देश दिया है। सवाल करते हुए कहा कि जब सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने व सेनेटाइज के प्रयोग करने की बात दुर्गा पूजा समितियां कह रही हैं, तब सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा पूजा मनाने की अनुमति न देना समझ से परे है।
फिर भी शासन का जो भी निर्देश होगा, उसका पालन किया जाएगा। इसके लिए सभी पूजा समिति पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया जा चुका है। कहा गया है कि शासन निर्देशों का पालन करते हुए अपने चार दशक पुरानी परंपरा को बनाए रखना होगा। (संवाद)