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गोद में उठाकर मरीज को ले जाने को मजबूर
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अंबेडकनगर जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने से बच्चे को गोद में उठाकर एक्सरे कक्ष ले जाते परिजन।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में स्ट्रेचर की कमी मरीजों व तीमारदारों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। मंगलवार को जर्जर स्ट्रेचर मिलने के चलते तीमारदारों को दुर्घटना में घायल मरीज को गोद में उठाकर वार्ड से एक्स-रे कक्ष तक ले जाना पड़ा। स्ट्रेचर को लेकर इस तरह की दिक्कत पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार मरीजों व तीमारदारों के समक्ष असहज स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व तीमारदारों को तगड़ा झटका लग रहा है। कभी दवा की समस्या तो कभी सुचारु रूप से जांच न होने की मुश्किल। और तो और मरीजों को सुचारु रूप से स्ट्रेचर तक नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल में 12 नए और तीन पुराने स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। इसके बाद भी समय पर मरीजों व तीमारदारों को स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है।
कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि स्ट्रेचर न मिलने की दशा में तीमारदारों को अपना मरीज या तो गोद में उठाकर या फिर सहारा देकर इलाज के लिए अंदर ले जाना पड़ता है। मंगलवार को भी कई मरीजों व तीमारदारों के साथ इस प्रकार की असहज स्थिति उत्पन्न हुई। स्ट्रेचर न मिलने पर एक बेटा जहां अपनी मां को सहारा देकर एक्स-रे कराने ले गया, तो वहीं परिवार के सदस्य सड़क हादसे में घायल को गोद में उठाकर ले गए।
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नहीं मिल सका महिला को स्ट्रेचर
बंदनडीह निवासी गीता देवी एक्स-रे कराने के लिए अपने पुत्र भिवांशु के साथ जिला अस्पताल पहुंची थीं। उसके पैर में तकलीफ थी। चलने में असमर्थ थीं। इस पर पुत्र ने स्वास्थ्य कर्मियों से स्ट्रेचर की मांग की। आरोप है कि वह इसके लिए इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिल सका। यहां तक कि इसके लिए चिकित्सक से भी कहा, लेकिन आश्वासन के बाद भी नहीं मिल सका। ऐसे में मजबूर होकर बेटे ने मां को सहारा दिया। किसी प्रकार से दर्द को सहती हुई महिला एक्स-रे कक्ष तक पहुंच सकी। व्यवस्था की बदहाली से नाराज बेटे ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें झटका ही लगता है। कहा कि यह समस्या कोई पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी कई बार इस प्रकार की परिस्थिति उत्पन्न होती रहती है। जिम्मेदारों को इसे लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए।
कर्मचारी बोले, जैसा मन करे वह करो
शुकुलपट्टी गांव निवासी अतुल सड़क हादसे में घायल हो गया था। बीते दिनों हुए हादसे में उसे पैर में फ्रैक्चर हो गया। जिला अस्पताल में प्लास्टर भी चढ़ा था। मंगलवार को वह परिवार के सदस्यों के साथ एक्स-रे कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि स्ट्रेचर के लिए उसने आधार कार्ड जमा किया। कुछ देर इंतजार के बाद स्ट्रेचर मिला, लेकिन वह खराब था। इसकी शिकायत जब स्वास्थ्य कर्मियों से की गई, तो कहा गया कि जो स्ट्रेचर मिला है, उसी से काम चलाओ, वर्ना जैसे मन करे अंदर ले जाओ। इस पर परिवार के सदस्य उसे गोद में उठाकर एक्स-रे कक्ष तक ले गए। परिवारीजनों ने कहा कि जिला अस्पताल में मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, इसके लिए जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
जिम्मेदार उठाएं ठोस कदम
तीमारदार राकेश व सुनील ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्ट्रेचर को लेकर मंगलवार को जो हाल देखने को मिला, ऐसा इससे पहले भी कई बार हुआ है। कभी आधार कार्ड न होने के चलते स्ट्रेचर नहीं उपलब्ध कराया जाता, तो कभी अन्य कारण बताकर स्ट्रेचर नहीं दिया जाता। तीमारदार कलावती व अजय कुमार ने कहा कि स्ट्रेचर की सहजता से उपलब्धता न होने पर कई बार शिकायत जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कभी इसे लेकर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना चाहिए।
नहीं मिली कोई शिकायत
मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए उन्हें सुचारु रूप से स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाता है। इसे लेकर अब तक किसी भी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है। यदि मामला सामने आता है, तो इसे दिखवाया जाएगा।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस
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बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व तीमारदारों को तगड़ा झटका लग रहा है। कभी दवा की समस्या तो कभी सुचारु रूप से जांच न होने की मुश्किल। और तो और मरीजों को सुचारु रूप से स्ट्रेचर तक नहीं मिल पाता है। जिला अस्पताल में 12 नए और तीन पुराने स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। इसके बाद भी समय पर मरीजों व तीमारदारों को स्ट्रेचर नहीं मिल पाता है।
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कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि स्ट्रेचर न मिलने की दशा में तीमारदारों को अपना मरीज या तो गोद में उठाकर या फिर सहारा देकर इलाज के लिए अंदर ले जाना पड़ता है। मंगलवार को भी कई मरीजों व तीमारदारों के साथ इस प्रकार की असहज स्थिति उत्पन्न हुई। स्ट्रेचर न मिलने पर एक बेटा जहां अपनी मां को सहारा देकर एक्स-रे कराने ले गया, तो वहीं परिवार के सदस्य सड़क हादसे में घायल को गोद में उठाकर ले गए।
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नहीं मिल सका महिला को स्ट्रेचर
बंदनडीह निवासी गीता देवी एक्स-रे कराने के लिए अपने पुत्र भिवांशु के साथ जिला अस्पताल पहुंची थीं। उसके पैर में तकलीफ थी। चलने में असमर्थ थीं। इस पर पुत्र ने स्वास्थ्य कर्मियों से स्ट्रेचर की मांग की। आरोप है कि वह इसके लिए इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन स्ट्रेचर नहीं मिल सका। यहां तक कि इसके लिए चिकित्सक से भी कहा, लेकिन आश्वासन के बाद भी नहीं मिल सका। ऐसे में मजबूर होकर बेटे ने मां को सहारा दिया। किसी प्रकार से दर्द को सहती हुई महिला एक्स-रे कक्ष तक पहुंच सकी। व्यवस्था की बदहाली से नाराज बेटे ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें झटका ही लगता है। कहा कि यह समस्या कोई पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी कई बार इस प्रकार की परिस्थिति उत्पन्न होती रहती है। जिम्मेदारों को इसे लेकर गंभीरता दिखानी चाहिए।
कर्मचारी बोले, जैसा मन करे वह करो
शुकुलपट्टी गांव निवासी अतुल सड़क हादसे में घायल हो गया था। बीते दिनों हुए हादसे में उसे पैर में फ्रैक्चर हो गया। जिला अस्पताल में प्लास्टर भी चढ़ा था। मंगलवार को वह परिवार के सदस्यों के साथ एक्स-रे कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि स्ट्रेचर के लिए उसने आधार कार्ड जमा किया। कुछ देर इंतजार के बाद स्ट्रेचर मिला, लेकिन वह खराब था। इसकी शिकायत जब स्वास्थ्य कर्मियों से की गई, तो कहा गया कि जो स्ट्रेचर मिला है, उसी से काम चलाओ, वर्ना जैसे मन करे अंदर ले जाओ। इस पर परिवार के सदस्य उसे गोद में उठाकर एक्स-रे कक्ष तक ले गए। परिवारीजनों ने कहा कि जिला अस्पताल में मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, इसके लिए जिम्मेदारों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
जिम्मेदार उठाएं ठोस कदम
तीमारदार राकेश व सुनील ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्ट्रेचर को लेकर मंगलवार को जो हाल देखने को मिला, ऐसा इससे पहले भी कई बार हुआ है। कभी आधार कार्ड न होने के चलते स्ट्रेचर नहीं उपलब्ध कराया जाता, तो कभी अन्य कारण बताकर स्ट्रेचर नहीं दिया जाता। तीमारदार कलावती व अजय कुमार ने कहा कि स्ट्रेचर की सहजता से उपलब्धता न होने पर कई बार शिकायत जिम्मेदारों से की गई, लेकिन कभी इसे लेकर तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना चाहिए।
नहीं मिली कोई शिकायत
मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए उन्हें सुचारु रूप से स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाता है। इसे लेकर अब तक किसी भी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है। यदि मामला सामने आता है, तो इसे दिखवाया जाएगा।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस