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Ambedkar Nagar News: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पांच हजार रसोइया मजदूर
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अंबेडकरनगर। जिले के 1583 परिषदीय स्कूलों में तैनात लगभग पांच हजार रसोइया मजदूर आर्थिक संकट से परेशान हैं। दरअसल बीते चार माह से उन्हें मानदेय नहीं मिल सका है। परेशान होकर एक दर्जन से अधिक रसोइया मजदूरों ने यह नौकरी छोड़कर दूसरा कार्य करने की राह पकड़ ली।
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले दो लाख से अधिक बच्चों को भोजन परोसने वाली रसोइया मौजूदा समय में आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही हैं। जिले में 1583 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इसमें चार हजार 931 रसोइयाें की तैनाती है। प्रत्येक रसोइया को मानदेय के रूप में प्रतिमाह दो हजार रुपये मिलता है।
रसोइया मजदूरों को मार्च, अप्रैल, जुलाई व अगस्त माह का मानदेय अब तक नहीं मिल सका है। मई व जून माह का मानदेय नहीं मिलता है। इस बीच चार माह से मानदेय न मिलने से रसोइया मजदूरों के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। मानदेय भुगतान को लेकर समय समय पर धरना प्रदर्शन कर आवाज उठाई जाती है लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिलता है। इससे आर्थिक तंगी से रसोइया मजदूरों के सामने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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रसोइया शोभावती, विद्यादेवी, उर्मिला, कलावती, संध्या, कंचन, विमला देवी, सुनीता, बबिता, रघुराजी ने कहा कि एक तो लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए मानदेय बढ़ाने की मांग पूरी नहीं की जा रही, उसपर से समय पर भुगतान भी नहीं हो रहा। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का तो वेतन समय पर मिलता है लेकिन कड़ी मेहनत करने वाले रसोइया मजदूरों को कई-कई माह तक मानदेय नहीं मिलता है।
रसोइया मजदूर संघ अध्यक्ष रामनिरंजन कनौजिया ने कहा कि जब भी भुगतान की मांग की जाती है तो सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। समय पर भुगतान न होने व मानदेय में वृद्धि न होने से एक दर्जन रसोइया मजदूरों ने नौकरी छोड़ दी। यदि इसी तरह हालात रहे तो आने वाले दिनों में और भी रसोइया नौकरी छोड़ सकती हैं।
दो माह का भेजा गया प्रस्ताव
मानदेय भुगतान के लिए मार्च व अप्रैल माह के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही दोनों माह के मानदेय का भुगतान हो जाएगा।
भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले दो लाख से अधिक बच्चों को भोजन परोसने वाली रसोइया मौजूदा समय में आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही हैं। जिले में 1583 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इसमें चार हजार 931 रसोइयाें की तैनाती है। प्रत्येक रसोइया को मानदेय के रूप में प्रतिमाह दो हजार रुपये मिलता है।
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रसोइया मजदूरों को मार्च, अप्रैल, जुलाई व अगस्त माह का मानदेय अब तक नहीं मिल सका है। मई व जून माह का मानदेय नहीं मिलता है। इस बीच चार माह से मानदेय न मिलने से रसोइया मजदूरों के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। मानदेय भुगतान को लेकर समय समय पर धरना प्रदर्शन कर आवाज उठाई जाती है लेकिन उन्हें आश्वासन ही मिलता है। इससे आर्थिक तंगी से रसोइया मजदूरों के सामने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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रसोइया शोभावती, विद्यादेवी, उर्मिला, कलावती, संध्या, कंचन, विमला देवी, सुनीता, बबिता, रघुराजी ने कहा कि एक तो लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए मानदेय बढ़ाने की मांग पूरी नहीं की जा रही, उसपर से समय पर भुगतान भी नहीं हो रहा। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का तो वेतन समय पर मिलता है लेकिन कड़ी मेहनत करने वाले रसोइया मजदूरों को कई-कई माह तक मानदेय नहीं मिलता है।
रसोइया मजदूर संघ अध्यक्ष रामनिरंजन कनौजिया ने कहा कि जब भी भुगतान की मांग की जाती है तो सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। समय पर भुगतान न होने व मानदेय में वृद्धि न होने से एक दर्जन रसोइया मजदूरों ने नौकरी छोड़ दी। यदि इसी तरह हालात रहे तो आने वाले दिनों में और भी रसोइया नौकरी छोड़ सकती हैं।
दो माह का भेजा गया प्रस्ताव
मानदेय भुगतान के लिए मार्च व अप्रैल माह के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र ही दोनों माह के मानदेय का भुगतान हो जाएगा।
भोलेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए