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Ambedkar Nagar News: धमाके से टूटी नींद, चारों तरफ फैला था खून

Fri, 02 Oct 2026 10:58 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 10:58 PM IST
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Woken up by an explosion, blood was scattered all around.
रंजन सिंह।
अंबेडकरनगर। सुबह करीब 5:30 बजे तक सबकुछ सामान्य था। तेगरा एक्सप्रेस की बस में बिहार के गोपालगंज निवासी रंजन सिंह स्लीपर केबिन में दायीं ओर ऊपर गहरी नींद में सोए थे। उनके साथ एक अन्य यात्री भी लेटा था। अचानक तेज धमाके की आवाज से उनकी नींद खुली। कुछ पल तक उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। स्लीपर केबिन का शटर जाम मिला तो अनहोनी का अंदाजा हुआ। रंजन ने सहयात्री के साथ मिलकर शटर तोड़ना शुरू किया। हाथ-पैर में चोटें आईं, लेकिन दोनों किसी तरह बाहर निकल आए।
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रंजन के मुताबिक, बस में आग लगने की आशंका के चलते वह अपना सामान वहीं छोड़कर बाहर निकले। बाहर का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। चारों तरफ खून फैला था। कोई दर्द से कराह रहा था तो कोई जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहा था। बस में फंसे यात्रियों की चीख-पुकार के बीच रंजन समेत कई यात्रियों ने पुलिस को सूचना देने के साथ घायलों को बाहर निकालने का जिम्मा संभाला।
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बस के भीतर टूटे कांच बिखरे थे। घायलों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ था। करीब एक घंटे तक यात्रियों ने मशक्कत कर एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इस दौरान कई यात्रियों के पैरों में कांच चुभ गया। किसी के सिर में चोट थी तो किसी के हाथ-पैर जख्मी थे। रंजन का कहना है कि मदद के लिए बस सर्विस के हेल्पलाइन नंबर पर भी फोन किया गया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
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‘मदद करने के बजाय कागजात लेकर चले गए’
रंजन का आरोप है कि हादसे के बाद चालक और उसके साथ मौजूद दो अन्य लोग घायलों व बस में फंसे यात्रियों की मदद करने के बजाय कागजात और अन्य जरूरी सामान लेकर वहां से चले गए। इसके बाद यात्रियों ने ही एक-दूसरे का सहारा बनकर राहत और बचाव का काम संभाला। पुलिस के पहुंचने के बाद मामूली रूप से घायल यात्री दूसरी बसों और चार पहिया वाहनों से गोरखपुर के लिए रवाना हुए और वहां से अपने गंतव्य पहुंचे।
‘यह जिंदगी का सबसे मुश्किल सफर था’
रंजन ने बताया कि हादसे के बाद बस से बाहर निकलने तक उन्हें सिर्फ अपनी जान बचाने की चिंता थी। उनकी आंखों के सामने जो मंजर आया, उसे वह शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे मुश्किल सफर साबित हुआ। यात्री जाहिद ने बताया कि वह दिल्ली की एक कंपनी में फिटर का काम करते हैं और घर बिहार जा रहे थे। वह कुछ समझ पाते, इससे पहले ही हादसा हो चुका था। घायल अमित आनंद ने बताया कि बस से बाहर निकलने के बाद उन्हें ट्रेलर खड़ा दिखाई दिया, लेकिन हादसा कैसे और किस तरह हुआ, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था। कुछ ही देर में बस के आसपास चीख-पुकार और घायल यात्रियों की भीड़ जमा हो गई।

रास्ते में बदल गया था चालक
रंजन सिंह ने बताया कि रात करीब 12 बजे बस एक ढाबे पर रुकी थी। खाना खाने के बाद जब यात्री लौटे तो दिल्ली से बस लेकर आया चालक जा चुका था। यहां दूसरे चालक ने स्टीयरिंग संभाल लिया। रंजन के अनुसार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बस बार-बार लहरा रही थी। यात्रियों ने कई बार चालक को टोका भी था।

रंजन सिंह।

रंजन सिंह।

रंजन सिंह।

रंजन सिंह।

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