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Ambedkar Nagar News: रीढ़ की हड्डी की टीबी का पहली बार सफल ऑपरेशन
Fri, 02 May 2025 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 02 May 2025 11:06 PM IST
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अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को चिकित्सा क्षेत्र में अहम कदम दर्ज किया गया। कॉलेज में पहली बार रीढ़ की हड्डी की टीबी से पीड़ित मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया। बीते दो माह से शरीर के निचले हिस्से को चलाने में असमर्थ महुवारी इब्राहिमपुर निवासी संतोष कुमार (40) को इस सर्जरी के बाद राहत मिली है।
ऑर्थो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन और उनकी टीम ने बृहस्पतिवार को सर्जरी की। मरीज की रीढ़ की हड्डी में संक्रमण और मवाद के जमाव के कारण नसों पर दबाव बन गया था, जिससे उसकी शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। ऑपरेशन के दौरान रीढ़ से मवाद निकाला गया और पेडिकल स्क्रू व रॉड की मदद से रीढ़ की हड्डी को स्थिर किया गया। इस ऑपरेशन में डॉ. शिव गोविंद, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. मिनाली, डॉ. सुदीप, डॉ. पंकज, नर्स आशी और टेक्नीशियन अंकुर शामिल रहे।
सर्जरी की तैयारी से लेकर क्रियान्वयन तक पूरी प्रक्रिया विभागीय समन्वय और चिकित्सा दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आभास कुमार सिंह ने इस सर्जरी को संस्थान के लिए उपलब्धि बताया और संबंधित टीम को बधाई दी। उनके अनुसार रीढ़ की टीबी के मामलों में जटिलता अधिक होती है और अब तक ऐसे रोगियों को इलाज के लिए अन्य जनपदों में भेजा जाता रहा है। सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया है।
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चिकित्सकों के अनुसार कुछ सप्ताह में स्थिति में और सुधार आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सर्जरी का स्थानीय स्तर पर होना, आने वाले समय में अन्य गंभीर मामलों की चिकित्सा व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगा। रीढ़ की टीबी का इलाज लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है। ऐसे मामलों में संक्रमण के कारण तंत्रिका तंत्र पर असर होता है और मरीज की गतिशीलता प्रभावित होती है। समय पर सर्जरी न होने पर स्थायी नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में ऑपरेशन का सफल होना, जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और संसाधनों की उपलब्धता का संकेत देता है।
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ऑर्थो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सचिन और उनकी टीम ने बृहस्पतिवार को सर्जरी की। मरीज की रीढ़ की हड्डी में संक्रमण और मवाद के जमाव के कारण नसों पर दबाव बन गया था, जिससे उसकी शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। ऑपरेशन के दौरान रीढ़ से मवाद निकाला गया और पेडिकल स्क्रू व रॉड की मदद से रीढ़ की हड्डी को स्थिर किया गया। इस ऑपरेशन में डॉ. शिव गोविंद, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. मिनाली, डॉ. सुदीप, डॉ. पंकज, नर्स आशी और टेक्नीशियन अंकुर शामिल रहे।
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सर्जरी की तैयारी से लेकर क्रियान्वयन तक पूरी प्रक्रिया विभागीय समन्वय और चिकित्सा दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आभास कुमार सिंह ने इस सर्जरी को संस्थान के लिए उपलब्धि बताया और संबंधित टीम को बधाई दी। उनके अनुसार रीढ़ की टीबी के मामलों में जटिलता अधिक होती है और अब तक ऐसे रोगियों को इलाज के लिए अन्य जनपदों में भेजा जाता रहा है। सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया है।
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चिकित्सकों के अनुसार कुछ सप्ताह में स्थिति में और सुधार आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सर्जरी का स्थानीय स्तर पर होना, आने वाले समय में अन्य गंभीर मामलों की चिकित्सा व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगा। रीढ़ की टीबी का इलाज लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है। ऐसे मामलों में संक्रमण के कारण तंत्रिका तंत्र पर असर होता है और मरीज की गतिशीलता प्रभावित होती है। समय पर सर्जरी न होने पर स्थायी नुकसान की आशंका बनी रहती है। ऐसे में ऑपरेशन का सफल होना, जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और संसाधनों की उपलब्धता का संकेत देता है।