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Ambedkar Nagar News: छात्रों को आपस में संवाद करने के लिए करें प्रेरित
Mon, 25 Aug 2025 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 25 Aug 2025 11:05 PM IST
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बीआरसी रामनगर में प्रशिक्षण के दौरान मौजूद शिक्षक-शिक्षिकाएं।
आलापुर (अंबेडकरनगर)। ब्लॉक संसाधन केंद्र रामनगर में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम व एनएफएल के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। चौथे चक्र के पांचवें दिन सोमवार को कक्षा 3 की अंग्रेजी पाठ्य पुस्तक संतूर पर आधारित एक समग्र प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें बताया कि छात्रों को आपस में संवाद करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
संदर्भदाता ईशान श्रीवास्तव ने कहा कि संतूर छात्रों के लिए एक संवादात्मक अनुभव है। इसमें शामिल कहानियां, कविताएं व अभ्यास गतिविधियां छात्रों में पढ़ना, लिखना, सुनना और बोलना चारों भाषा कौशलों को समान रूप से विकसित करती हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे पाठों को सिर्फ पढ़ाने तक सीमित न रखें, बल्कि कक्षा में इंटरएक्टिव पद्धति अपनाकर छात्रों को संवाद के लिए प्रेरित करें। संदर्भदाता त्रिशूलधारी पांडेय ने बताया कि आयुर्वेद, योग, खगोलशास्त्र व वेदांत जैसे पारंपरिक विषयों को वर्तमान पाठ्यक्रम से जोड़ना न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को समृद्ध करता है, बल्कि छात्रों में संस्कृति के प्रति जुड़ाव भी उत्पन्न करता है। विनय चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का पाठ्यपुस्तकों में समावेश शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ भारतीय मूल्यों को संरक्षित रखने का माध्यम है। छात्रों को आपस में छोटे-छोटे संवाद करने, पाठ-सामग्री साझा करने और अभ्यास कार्यों को सहयोगात्मक ढंग से करने के लिए प्रेरित करें। त्रिशूलधारी पांडेय ने कहा कि बोलना किसी भाषा की आत्मा है, और छात्रों को बोलने के अधिक से अधिक अवसर शिक्षण कक्षों में मिलना चाहिए।
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संदर्भदाता ईशान श्रीवास्तव ने कहा कि संतूर छात्रों के लिए एक संवादात्मक अनुभव है। इसमें शामिल कहानियां, कविताएं व अभ्यास गतिविधियां छात्रों में पढ़ना, लिखना, सुनना और बोलना चारों भाषा कौशलों को समान रूप से विकसित करती हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे पाठों को सिर्फ पढ़ाने तक सीमित न रखें, बल्कि कक्षा में इंटरएक्टिव पद्धति अपनाकर छात्रों को संवाद के लिए प्रेरित करें। संदर्भदाता त्रिशूलधारी पांडेय ने बताया कि आयुर्वेद, योग, खगोलशास्त्र व वेदांत जैसे पारंपरिक विषयों को वर्तमान पाठ्यक्रम से जोड़ना न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को समृद्ध करता है, बल्कि छात्रों में संस्कृति के प्रति जुड़ाव भी उत्पन्न करता है। विनय चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का पाठ्यपुस्तकों में समावेश शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ भारतीय मूल्यों को संरक्षित रखने का माध्यम है। छात्रों को आपस में छोटे-छोटे संवाद करने, पाठ-सामग्री साझा करने और अभ्यास कार्यों को सहयोगात्मक ढंग से करने के लिए प्रेरित करें। त्रिशूलधारी पांडेय ने कहा कि बोलना किसी भाषा की आत्मा है, और छात्रों को बोलने के अधिक से अधिक अवसर शिक्षण कक्षों में मिलना चाहिए।
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