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बसखारी में नारद मोह प्रसंग की भावविभोर प्रस्तुति
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बसखारी (अंबेडकरनगर)। श्रीराम लीला समिति बसखारी के तत्वावधान में रविवार रात सात दिवसीय रामलीला मंचन की भव्य शुरुआत भगवान विष्णु की झांकी व आरती के साथ हुई। कलाकारों ने पहले दिन नारद मोह, रावण जन्म व अत्याचार के प्रसंगों का मनमोहक मंचन प्रस्तुत किया। इसे देखकर दर्शक भावविभोर रहे।
मंचन में दिखाया गया कि किस तरह नारद मुनि को अपनी तपस्या पर अहंकार हो जाता है। भगवान विष्णु उनके अहंकार को तोड़ने के लिए एक मनोहर नगर की रचना करते हैं। नारद मुनि वहां पहुंचते हैं तो देखते हैं कि वहां के राजा अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर कर रहे हैं। इसमें बहुत से राजा और राजकुमार पहुंचे हैं। नारद भी महल में पहुंचते हैं। विश्वमोहिनी को देखकर मोहित हो जाते हैं। वह भगवान विष्णु के पास पहुंच कर खुद को सुंदर बनाने की इच्छा जताते हैं।
समें छल कर विष्णु उनके पूरे शरीर को तो सुंदर बना कर मुख बंदर का कर देते हैं। इससे नारद को उपहास का पात्र बनना पड़ता है। इससे नाराज होकर वह विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके साथ ही मंच पर कलाकारों ने रावण जन्म के साथ ही उसके शासनकाल में असुर शक्तियों के बढ़ते अत्याचार का भी जीवंत प्रदर्शन किया। रामलीला आयोजन में संरक्षक सत्यम सिंघल, प्रदीप कुमार, गोपालचन्द्र व सूर्यलाल उपाध्याय समेत अन्य लोगों का विशेष सहयोग रहा।
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मंचन में दिखाया गया कि किस तरह नारद मुनि को अपनी तपस्या पर अहंकार हो जाता है। भगवान विष्णु उनके अहंकार को तोड़ने के लिए एक मनोहर नगर की रचना करते हैं। नारद मुनि वहां पहुंचते हैं तो देखते हैं कि वहां के राजा अपनी पुत्री के विवाह के लिए स्वयंवर कर रहे हैं। इसमें बहुत से राजा और राजकुमार पहुंचे हैं। नारद भी महल में पहुंचते हैं। विश्वमोहिनी को देखकर मोहित हो जाते हैं। वह भगवान विष्णु के पास पहुंच कर खुद को सुंदर बनाने की इच्छा जताते हैं।
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समें छल कर विष्णु उनके पूरे शरीर को तो सुंदर बना कर मुख बंदर का कर देते हैं। इससे नारद को उपहास का पात्र बनना पड़ता है। इससे नाराज होकर वह विष्णु को श्राप दे देते हैं। इसके साथ ही मंच पर कलाकारों ने रावण जन्म के साथ ही उसके शासनकाल में असुर शक्तियों के बढ़ते अत्याचार का भी जीवंत प्रदर्शन किया। रामलीला आयोजन में संरक्षक सत्यम सिंघल, प्रदीप कुमार, गोपालचन्द्र व सूर्यलाल उपाध्याय समेत अन्य लोगों का विशेष सहयोग रहा।
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