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Ambedkar Nagar News: सिंचाई के अभाव में धान की फसल में लगने लगे रोग
Wed, 25 Sep 2024 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 25 Sep 2024 01:22 AM IST
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पंपिगसेट से धान की फसल की सिचाई करते किसान।
अंबेडकरनगर। अघोषित बिजली कटौती व लो वोल्टेज ने जिले के लगभग चार लाख धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पर्याप्त बारिश न होने से मोटर पंप के सहारे सिंचाई पर निर्भर किसान बेपटरी बिजली आपूर्ति के चलते सिंचाई नहीं कर पा रहे। नतीजा यह है कि सिंचाई के अभाव में धान की फसल में झुलसा व खैरा समेत कई अन्य प्रकार के रोग लगने शुरू हो गए हैं। किसानों का कहना है कि इसी प्रकार से रहा तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी।
सुचारु रूप से बारिश न होने के साथ ही नहर में पानी का दबाव कम होने के चलते टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसानों के सामने धान की फसल को बर्बाद होने से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। फसल को बचाने के लिए किसानों को बिजली चलित मोटर पंप व डीजल से चलने वाले इंजन पंप का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि इसमें भी अघोषित बिजली कटौती व लो वोल्टेज की समस्या बड़ी बाधा बन रही है।
मालूम हो कि जिले में लगभग तीन लाख 85 हजार किसानों ने एक लाख 15 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की बोआई की है। बारिश के पानी व नहर के पानी से सिंचाई करने के साथ ही किसान पंप के माध्यम से भी सिंचाई करते हैं। मौजूदा समय में मौसम ने किसानों का साथ नहीं दिया। नहर में पानी का दबाव कम होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। ऐसे में सिंचाई के अभाव में अब धान की फसल में कई प्रकार के रोग लगने शुरू हो गए हैं। सिंचाई के अभाव में अब धान की फसल में झुलसा, खैरा, अंगमारी जैसे रोग तेजी से फैलने लगे हैं। इससे धान की बालियां काली पड़ने लगी हैं।
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झुलसा रोग की चपेट में फसल
तहसील क्षेत्र जलालपुर के निमटिनी निवासी बिपिन यादव ने कहा कि डीजल इंजन से सिंचाई करने के साथ ही दवा का भी छिड़काव किया। इसके बाद भी झुलसा रोग फसल को अपनी चपेट में ले रहा है। बारिश न हुई तो शीघ्र ही पूरी फसल चौपट हो जाएगी। इससे बड़ी आर्थिक चपत लग सकती है। अमोला बुजुर्ग निवासी गंगाराम ने कहा कि एक तो बारिश नहीं हो रही उस पर बिजली भी साथ नहीं दे रही। फसल को बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव तो किया लेकिन समुचित सिंचाई न होने से चिंता बढ़ गई है। कटरिया सम्मनपुर के प्रदीप कुमार ने कहा कि अब तो लागत निकलने की उम्मीद भी समाप्त हो गई है। जिस प्रकार से तेजी से रोग फैल रहा है उसे देखते हुए लग रहा कि पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
सिंचाई के साथ करें दवा का छिड़काव
मौजूदा समय में मौसम की बेरुखी को देखते हुए धान किसान समय-समय पर सिंचाई करते रहें। इसके साथ ही रोगों से बचाने के लिए चूने व जिंक का भी छिड़काव करते रहें। इससे फसल को बचाया जा सकता है। -पीयूष राय, जिला कृषि अधिकारी
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सुचारु रूप से बारिश न होने के साथ ही नहर में पानी का दबाव कम होने के चलते टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसानों के सामने धान की फसल को बर्बाद होने से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। फसल को बचाने के लिए किसानों को बिजली चलित मोटर पंप व डीजल से चलने वाले इंजन पंप का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि इसमें भी अघोषित बिजली कटौती व लो वोल्टेज की समस्या बड़ी बाधा बन रही है।
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मालूम हो कि जिले में लगभग तीन लाख 85 हजार किसानों ने एक लाख 15 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की बोआई की है। बारिश के पानी व नहर के पानी से सिंचाई करने के साथ ही किसान पंप के माध्यम से भी सिंचाई करते हैं। मौजूदा समय में मौसम ने किसानों का साथ नहीं दिया। नहर में पानी का दबाव कम होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। ऐसे में सिंचाई के अभाव में अब धान की फसल में कई प्रकार के रोग लगने शुरू हो गए हैं। सिंचाई के अभाव में अब धान की फसल में झुलसा, खैरा, अंगमारी जैसे रोग तेजी से फैलने लगे हैं। इससे धान की बालियां काली पड़ने लगी हैं।
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झुलसा रोग की चपेट में फसल
तहसील क्षेत्र जलालपुर के निमटिनी निवासी बिपिन यादव ने कहा कि डीजल इंजन से सिंचाई करने के साथ ही दवा का भी छिड़काव किया। इसके बाद भी झुलसा रोग फसल को अपनी चपेट में ले रहा है। बारिश न हुई तो शीघ्र ही पूरी फसल चौपट हो जाएगी। इससे बड़ी आर्थिक चपत लग सकती है। अमोला बुजुर्ग निवासी गंगाराम ने कहा कि एक तो बारिश नहीं हो रही उस पर बिजली भी साथ नहीं दे रही। फसल को बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव तो किया लेकिन समुचित सिंचाई न होने से चिंता बढ़ गई है। कटरिया सम्मनपुर के प्रदीप कुमार ने कहा कि अब तो लागत निकलने की उम्मीद भी समाप्त हो गई है। जिस प्रकार से तेजी से रोग फैल रहा है उसे देखते हुए लग रहा कि पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
सिंचाई के साथ करें दवा का छिड़काव
मौजूदा समय में मौसम की बेरुखी को देखते हुए धान किसान समय-समय पर सिंचाई करते रहें। इसके साथ ही रोगों से बचाने के लिए चूने व जिंक का भी छिड़काव करते रहें। इससे फसल को बचाया जा सकता है। -पीयूष राय, जिला कृषि अधिकारी