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इलाज के साथ खुद ही दवा बांटते चिकित्सक
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अंबेडकरनगर। चिकित्सक ही मरीज का इलाज करे और डॉक्टर ही दवा भी दें। ऐसा करना चिकित्सक के लिए मजबूरी भी है। कारण यह है कि जिला अस्पताल स्थित आयुष विंग में फार्मासिस्ट की तैनाती ही नहीं है। यहां फार्मासिस्ट के दो पद सृजित हैं, लेकिन दोनों ही पद पर तैनाती नहीं है। नतीजा यह है कि आने वाले मरीजों का इलाज चिकित्सक करने के बाद खुद ही दवा भी देते हैं। इससे कई बार असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उस समय औैर भी दिक्कत होती है, जब मरीजों की संख्या अधिक होती है। ऐसा होने पर न सिर्फ चिकित्सक परेशान होते हैं, बल्कि मरीजों व उनके तीमारदारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
यूनानी, होम्यिोपैथी व आयुर्वेदिक पैथी से मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग की स्थापना की गई थी। दवाओं की समुचित उपलब्धता के साथ ही प्रत्येक पैथी के एक-एक चिकित्सक की भी तैनाती कर दी गई थी। इसमें होमियोपैथ के डॉ. प्रदीप गुप्ता, यूनानी के डॉ. एम बेग व आयुर्वेद के डॉ. चंद्रेश की तैनाती की गई। इसके साथ ही फार्मासिस्ट के भी दो पद सृजित किए गए। अप्रैल 2015 में संचालित आयुष विंग में अब तक फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। फार्मासिस्ट की तैनाती न होने से सबसे अधिक समस्या चिकित्सकों के समक्ष हो रही है।
चिकित्सकों के अनुसार वे पहले मरीज का इलाज करते हैं, इसके बाद खुद ही दवाएं भी उन्हें देते हैं। इससे एक मरीज पर काफी समय लगता है, जिससे लाइन में लगे दूसरे मरीज को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उस समय और भी असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जब मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इससे न सिर्फ चिकित्सक, बल्कि मरीजों व उनके तीमारदारों को भी मुश्किलें उठानी पड़ती है।
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सोमवार को आयुष विंग में होमियोपैथ चिकित्सक को दिखाकर मरीज के साथ बाहर निकले तीमारदार राकेश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि फार्मासिस्ट न होने से उन्हें लगभग आधा घंटा इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। उधर, सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि दो फार्मासिस्ट के पद सृजित हैं। बीते दिनों ही संयुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मीरानपुर में मौजूद दो फार्मासिस्ट की तैनाती आयुष विंग में की गई थी, लेकिन वहां से अब तक उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। शीघ्र ही दोनों जिला अस्पताल पहुंचकर पदभार ग्रहण कर लेंगे।
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यूनानी, होम्यिोपैथी व आयुर्वेदिक पैथी से मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग की स्थापना की गई थी। दवाओं की समुचित उपलब्धता के साथ ही प्रत्येक पैथी के एक-एक चिकित्सक की भी तैनाती कर दी गई थी। इसमें होमियोपैथ के डॉ. प्रदीप गुप्ता, यूनानी के डॉ. एम बेग व आयुर्वेद के डॉ. चंद्रेश की तैनाती की गई। इसके साथ ही फार्मासिस्ट के भी दो पद सृजित किए गए। अप्रैल 2015 में संचालित आयुष विंग में अब तक फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। फार्मासिस्ट की तैनाती न होने से सबसे अधिक समस्या चिकित्सकों के समक्ष हो रही है।
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चिकित्सकों के अनुसार वे पहले मरीज का इलाज करते हैं, इसके बाद खुद ही दवाएं भी उन्हें देते हैं। इससे एक मरीज पर काफी समय लगता है, जिससे लाइन में लगे दूसरे मरीज को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उस समय और भी असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जब मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इससे न सिर्फ चिकित्सक, बल्कि मरीजों व उनके तीमारदारों को भी मुश्किलें उठानी पड़ती है।
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सोमवार को आयुष विंग में होमियोपैथ चिकित्सक को दिखाकर मरीज के साथ बाहर निकले तीमारदार राकेश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि फार्मासिस्ट न होने से उन्हें लगभग आधा घंटा इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। उधर, सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि दो फार्मासिस्ट के पद सृजित हैं। बीते दिनों ही संयुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मीरानपुर में मौजूद दो फार्मासिस्ट की तैनाती आयुष विंग में की गई थी, लेकिन वहां से अब तक उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। शीघ्र ही दोनों जिला अस्पताल पहुंचकर पदभार ग्रहण कर लेंगे।