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Ambedkar Nagar News: एडीआर से विवादों का होगा आसानी से निस्तारण
Tue, 21 Jan 2025 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 21 Jan 2025 12:12 AM IST
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अंबेडकरनगर। जिला न्यायालय स्थित मध्यस्थता केंद्र में सोमवार को वाद स्तर पर विवादों के निस्तारण के लिए सहायता डेस्क एवं लीगल एड क्लीनिक की स्थापना की गई। इस मौके पर न्यायालय परिसर के एडीआर भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिला जज रामसुलीन सिंह के निर्देश पर वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र ( एडीआर) के प्राविधान और लाभ एवं व्यापक प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता शिविर लगाया गया। सचिव एवं एडीजे भारतेंदु प्रकाश गुप्ता ने बताया कि विवाद समाधान की पारंपरिक पद्धति न्यायिक प्रणाली में मुकदमेबाजी एक लंबी प्रक्रिया है, जिससे न्याय मिलने में विलंब होता है और यह प्रक्रिया महंगी भी होती है। न्यायिक प्रणाली की इन कमजोरियों ने विवादों के निपटारे के लिए वैकल्पिक उपायों को जन्म दिया है। एडीआर पारंपरिक अदालती कार्रवाई के बाहर बिना किसी सुनवाई के विवादों को सुलझाने और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों को निपटाने की एक विधि है। यह प्रक्रिया आम तौर पर पारंपरिक अदालती कार्यवाही की तुलना में गोपनीय, कम औपचारिक और कम तनावपूर्ण होती हैं।
लोक अदालत के अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम ने बताया कि जो वाद अब तक न्यायालय में नहीं आए हैं, उनका प्रार्थनापत्र देकर निस्तारण कराया जा सकता है। इसमें यातायात सेवा, डाकतार या टेलीफोन सेवाओं, बिजली, प्रकाश समेत अन्य तमाम बिंदु शामिल हैं। इस मौके पर चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह, सुमन, अनामिका वर्मा, रमेश त्रिपाठी, राजेश तिवारी मौजूद रहे।
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जिला जज रामसुलीन सिंह के निर्देश पर वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र ( एडीआर) के प्राविधान और लाभ एवं व्यापक प्रचार प्रसार के लिए जागरूकता शिविर लगाया गया। सचिव एवं एडीजे भारतेंदु प्रकाश गुप्ता ने बताया कि विवाद समाधान की पारंपरिक पद्धति न्यायिक प्रणाली में मुकदमेबाजी एक लंबी प्रक्रिया है, जिससे न्याय मिलने में विलंब होता है और यह प्रक्रिया महंगी भी होती है। न्यायिक प्रणाली की इन कमजोरियों ने विवादों के निपटारे के लिए वैकल्पिक उपायों को जन्म दिया है। एडीआर पारंपरिक अदालती कार्रवाई के बाहर बिना किसी सुनवाई के विवादों को सुलझाने और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों को निपटाने की एक विधि है। यह प्रक्रिया आम तौर पर पारंपरिक अदालती कार्यवाही की तुलना में गोपनीय, कम औपचारिक और कम तनावपूर्ण होती हैं।
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लोक अदालत के अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम ने बताया कि जो वाद अब तक न्यायालय में नहीं आए हैं, उनका प्रार्थनापत्र देकर निस्तारण कराया जा सकता है। इसमें यातायात सेवा, डाकतार या टेलीफोन सेवाओं, बिजली, प्रकाश समेत अन्य तमाम बिंदु शामिल हैं। इस मौके पर चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह, सुमन, अनामिका वर्मा, रमेश त्रिपाठी, राजेश तिवारी मौजूद रहे।
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