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Ambedkar Nagar News: पश्चिम बंगाल और राजस्थान के श्रद्धालुओं ने किए श्रवण धाम के दर्शन
Sat, 22 Feb 2025 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 22 Feb 2025 12:23 AM IST
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श्रवण धाम में पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं ने किए दर्शन पूजन।
अंबेडकरनगर। मातृ-पितृ भक्ति के लिए प्रसिद्ध श्रवण क्षेत्र धाम में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल व राजस्थान के श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। रामायण में इसके महत्व के बारे में जाना और यहां होने वाले विकास कार्यों की सराहना की।
पश्चिम बंगाल से अयोध्या में रामलला के दर्शन करने के बाद प्रयागराज जा रहे करीब 120 श्रद्धालु ग्राम पंचायत चिउटीपारा स्थित श्रवण धाम पहुंचे। श्रवण घाट के पुजारी पं. सुनील मिश्र, ग्राम प्रधान शकुंतला देवी, सचिव अनिल सिंह, समाजसेवी महेंद्र गौड़ समेत अन्य लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद उन्हें पूरे श्रवण धाम परिसर का भ्रमण कराया। बताया कि राजा दशरथ ने शिकार के समय श्रवण कुमार को पशु समझकर शब्दभेदी बाण चलाया, जिससे श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई थी। पुत्र वियोग में उनके माता-पिता ने भी इसी स्थान पर अपने प्राण त्याग दिए थे। इसके पहले श्रवण कुमार के माता-पिता ने राजा दशरथ को श्राप दिया था कि जिस प्रकार पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु हो रही है, उसी प्रकार वह भी पुत्र वियोग में ही काल के गाल में समाएंगे। इसी घटना को श्रीराम के वनवास की जननी भी माना जाता है। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं को श्रवण धाम के विकास के लिए हो रहे कार्यों के बारे में भी बताया। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे अयोध्या में प्रभु राम के दर्शन कर श्रवण धाम पहुंचे हैं। अब यहां से प्रयागराज जाएंगे। वहीं राजस्थान के कोटा से भी 60 श्रद्धालुओं ने यहां आकर दिन में विश्राम किया। शाम को घाट पर आरती के बाद प्रयागराज के लिए रवाना हुए।
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पश्चिम बंगाल से अयोध्या में रामलला के दर्शन करने के बाद प्रयागराज जा रहे करीब 120 श्रद्धालु ग्राम पंचायत चिउटीपारा स्थित श्रवण धाम पहुंचे। श्रवण घाट के पुजारी पं. सुनील मिश्र, ग्राम प्रधान शकुंतला देवी, सचिव अनिल सिंह, समाजसेवी महेंद्र गौड़ समेत अन्य लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद उन्हें पूरे श्रवण धाम परिसर का भ्रमण कराया। बताया कि राजा दशरथ ने शिकार के समय श्रवण कुमार को पशु समझकर शब्दभेदी बाण चलाया, जिससे श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई थी। पुत्र वियोग में उनके माता-पिता ने भी इसी स्थान पर अपने प्राण त्याग दिए थे। इसके पहले श्रवण कुमार के माता-पिता ने राजा दशरथ को श्राप दिया था कि जिस प्रकार पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु हो रही है, उसी प्रकार वह भी पुत्र वियोग में ही काल के गाल में समाएंगे। इसी घटना को श्रीराम के वनवास की जननी भी माना जाता है। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं को श्रवण धाम के विकास के लिए हो रहे कार्यों के बारे में भी बताया। श्रद्धालुओं ने बताया कि वे अयोध्या में प्रभु राम के दर्शन कर श्रवण धाम पहुंचे हैं। अब यहां से प्रयागराज जाएंगे। वहीं राजस्थान के कोटा से भी 60 श्रद्धालुओं ने यहां आकर दिन में विश्राम किया। शाम को घाट पर आरती के बाद प्रयागराज के लिए रवाना हुए।
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