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सभी 902 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप
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अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधान पद के लिए प्रतिनिधि का चयन हुए लगभग एक माह बीत चुका है, लेकिन अब तक जिले की एक भी ग्राम पंचायत में विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। जिले की 902 ग्राम पंचायतों की तुलना में 382 ग्राम पंचायतों में महज इसलिए विकास कार्य ठप पड़ा है, क्योंकि कोरम न पूरा होने से संबंधित ग्राम प्रधान अब तक शपथ नहीं ले सके हैं, जबकि जिन 520 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों ने शपथ ग्रहण भी कर ली है, तो उनका डोंगल अब तक नहीं बन सका है। ग्राम पंचायत प्रतिनिधि का चयन हो जाने के बाद प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे एडीओ पंचायत का डोेंगल निष्क्रिय हो गया है। नतीजा यह है कि सभी ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया ठप हो गया है। इससे ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले की 902 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य गति पकड़ भी सके, तो कैसे? अब तक निर्वाचित ग्राम प्रधानों का डोंगल ही नहीं बन सका है। जिले में कुल 902 ग्राम पंचायतें हैं। बीते दिनों हुए चुनाव के बाद गत 3 मई को परिणाम की घोषणा के साथ ही ग्राम प्रधान निर्वाचित हो गए थे। कोरम न पूरा होने के चलते बीती 15 मई को हुए शपथ ग्रहण में 382 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान शपथ नहीं ग्रहण कर सके थे।
520 ग्राम प्रधानों ने कोरम पूरा होने के चलते शपथ ग्रहण कर ली थी। उस समय संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को उम्मीद बंधी कि शीघ्र ही गांव में विकास का पहिया तेजी से आगे बढ़ेगा। गांव की मूलभूत समस्याएं शीघ्र ही दूर हो जाएंगी। पात्रों को योजनाओं का समुचित लाभ मिलना प्रारंभ हो जाएगा।
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हालांकि लगभग एक माह बीत चुका है, लेकिन अब तक सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं। कारण यह कि ग्राम प्रधानों का अब तक डोगल ही नहीं बन सका है। 382 ग्राम पंचायतों में तो ग्राम प्रधान अभी तक शपथ ही नहीं ग्रहण कर सके हैं, इसके चलते विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, तो जिन 520 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने शपथ ली है, उनका डोंगल न बन सकने के चलते विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
दरअसल ग्राम प्रधान के निर्वाचित होने के साथ ही प्रशासक के रूप में तैनात एडीओ पंचायत का डोंगल स्वत: निष्क्रिय हो गया। ऐसे में अब वे किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं करा सकते हैं। उन्हें सिर्फ कोविड-19 के तहत ही कार्य कराने का अधिकार रह गया है। ऐसे में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप होने से विभिन्न प्रकार की समस्याएं बनी हुई हैं।
शीघ्र ही बन जाएगा डोंगल
जिन 520 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने शपथ ली है, उनसे डोंगल से संबंधित आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही उनका डोंगल बन जाएगा। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
- दुर्गाप्रसाद तिवारी, डीपीआरओ
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जिले की 902 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य गति पकड़ भी सके, तो कैसे? अब तक निर्वाचित ग्राम प्रधानों का डोंगल ही नहीं बन सका है। जिले में कुल 902 ग्राम पंचायतें हैं। बीते दिनों हुए चुनाव के बाद गत 3 मई को परिणाम की घोषणा के साथ ही ग्राम प्रधान निर्वाचित हो गए थे। कोरम न पूरा होने के चलते बीती 15 मई को हुए शपथ ग्रहण में 382 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान शपथ नहीं ग्रहण कर सके थे।
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520 ग्राम प्रधानों ने कोरम पूरा होने के चलते शपथ ग्रहण कर ली थी। उस समय संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को उम्मीद बंधी कि शीघ्र ही गांव में विकास का पहिया तेजी से आगे बढ़ेगा। गांव की मूलभूत समस्याएं शीघ्र ही दूर हो जाएंगी। पात्रों को योजनाओं का समुचित लाभ मिलना प्रारंभ हो जाएगा।
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हालांकि लगभग एक माह बीत चुका है, लेकिन अब तक सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं। कारण यह कि ग्राम प्रधानों का अब तक डोगल ही नहीं बन सका है। 382 ग्राम पंचायतों में तो ग्राम प्रधान अभी तक शपथ ही नहीं ग्रहण कर सके हैं, इसके चलते विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, तो जिन 520 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने शपथ ली है, उनका डोंगल न बन सकने के चलते विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
दरअसल ग्राम प्रधान के निर्वाचित होने के साथ ही प्रशासक के रूप में तैनात एडीओ पंचायत का डोंगल स्वत: निष्क्रिय हो गया। ऐसे में अब वे किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं करा सकते हैं। उन्हें सिर्फ कोविड-19 के तहत ही कार्य कराने का अधिकार रह गया है। ऐसे में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप होने से विभिन्न प्रकार की समस्याएं बनी हुई हैं।
शीघ्र ही बन जाएगा डोंगल
जिन 520 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों ने शपथ ली है, उनसे डोंगल से संबंधित आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। शीघ्र ही उनका डोंगल बन जाएगा। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
- दुर्गाप्रसाद तिवारी, डीपीआरओ