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गर्भ में बच्चे की मौत, इलाज को लेकर भटकते रहे परिजन
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अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में एक सप्ताह से भर्ती गर्भवती महिला जिंदगी व मौत की जंग से जूझ रही है। गांव में हुई मारपीट के दौरान उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां गर्भ में बच्चे की मौत के बाद गर्भ की सफाई को लेकर परिवारीजन शनिवार जिला अस्पताल में भटकते नजर आए।
सम्मनपुर थाना अंतर्गत बभनपुरा सिकरोहर निवासी गुंजन यादव (26) पत्नी महेंद्र यादव करीब एक सप्ताह पूर्व गंभीर दशा में जिला अस्पताल में भर्ती हुई थी। महेंद्र के अनुसार मामूली विवाद में हुई मारपीट में विपक्षियों ने उसकी पत्नी की पिटाई कर दी थी। इससे महिला को गंभीर चोटें आईं थीं। गंभीरावस्था में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले एक बार फिर महिला चिकित्सक डॉ. भानुमती के कहने पर अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन बंद होना बताया गया। परिवारीजनों के अनुसार डॉ. भानुमती ने यह कहते हुए उसे डॉ. संगीता को रेफर कर दिया कि चूंकि बच्चे की गर्भ में मौत हो चुकी है, इसलिए इसका गर्भपात कराना होगा।
महेंद्र के अनुसार जब वह डॉ. संगीता के पास गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास अब तक ऐसी कोई फाइल नहीं आई है। ऐसे में यह केस डॉ. भानुमती ही देखेंगी। तब से वह दोनों महिला चिकित्सकों के कक्ष का चक्कर लगा रहा है और जान बचाने की दुहाई दे रहा है, लेकिन चिकित्सकों का मन नहीं पसीज रहा है। शनिवार को महिला की तबियत में अधिक बिगड़ी, तो महेंद्र एक बार फिर डॉ. भानुमती के पास गया, लेकिन उन्होंने इलाज करने से इंकार कर दिया गया।
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इस बीच पहुंची अमर उजाला टीम ने जब इस संबंध में डा. भानुमती से दूरभाष पर वार्ता की, तो उन्होंने कहा कि वह जरूरी काम से पूर्वाह्न 11 बजे ही लखनऊ के लिए निकल चुकी हैं। मैंने केस डॉ. संगीता को हैंडओवर कर दिया है। जब डॉ. संगीता से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि केस अधिकृत रूप से जब तक हैंडओवर नहीं होता तब तक ऐसे मामलों में इलाज की जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की ही होती है।
डॉ. भानुमती ने बताया कि लगभग एक सप्ताह से महिला भर्ती है। उसका सुचारु रूप से इलाज किया जा रहा है। दो माह का बच्चा गर्भ में है। अल्ट्रासाउंड में धड़कन नहीं बता रहा है। ऐसे में सफाई की जानी है। शनिवार को सुबह आठ बजे ड्यूटी समाप्त कर मैं बाहर चली गई। इसके बाद डॉ. संगीता पर इलाज की जिम्मेदारी थी। उधर डा. संगीता ने कहा कि महिला का सुचारु रूप से इलाज किया जा रहा है। आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
मामला संज्ञान में आया है। मैं सरकारी कार्य से लखनऊ में हूं। संबंधित महिला का समुचित इलाज कराया जा रहा है। यह दिखवाया जाएगा कि आगे ऐसी कोई परिस्थिति न उत्पन्न होने पाए। मामले में यदि लापरवाही मिलेगी तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस
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सम्मनपुर थाना अंतर्गत बभनपुरा सिकरोहर निवासी गुंजन यादव (26) पत्नी महेंद्र यादव करीब एक सप्ताह पूर्व गंभीर दशा में जिला अस्पताल में भर्ती हुई थी। महेंद्र के अनुसार मामूली विवाद में हुई मारपीट में विपक्षियों ने उसकी पत्नी की पिटाई कर दी थी। इससे महिला को गंभीर चोटें आईं थीं। गंभीरावस्था में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले एक बार फिर महिला चिकित्सक डॉ. भानुमती के कहने पर अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन बंद होना बताया गया। परिवारीजनों के अनुसार डॉ. भानुमती ने यह कहते हुए उसे डॉ. संगीता को रेफर कर दिया कि चूंकि बच्चे की गर्भ में मौत हो चुकी है, इसलिए इसका गर्भपात कराना होगा।
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महेंद्र के अनुसार जब वह डॉ. संगीता के पास गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास अब तक ऐसी कोई फाइल नहीं आई है। ऐसे में यह केस डॉ. भानुमती ही देखेंगी। तब से वह दोनों महिला चिकित्सकों के कक्ष का चक्कर लगा रहा है और जान बचाने की दुहाई दे रहा है, लेकिन चिकित्सकों का मन नहीं पसीज रहा है। शनिवार को महिला की तबियत में अधिक बिगड़ी, तो महेंद्र एक बार फिर डॉ. भानुमती के पास गया, लेकिन उन्होंने इलाज करने से इंकार कर दिया गया।
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इस बीच पहुंची अमर उजाला टीम ने जब इस संबंध में डा. भानुमती से दूरभाष पर वार्ता की, तो उन्होंने कहा कि वह जरूरी काम से पूर्वाह्न 11 बजे ही लखनऊ के लिए निकल चुकी हैं। मैंने केस डॉ. संगीता को हैंडओवर कर दिया है। जब डॉ. संगीता से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि केस अधिकृत रूप से जब तक हैंडओवर नहीं होता तब तक ऐसे मामलों में इलाज की जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की ही होती है।
डॉ. भानुमती ने बताया कि लगभग एक सप्ताह से महिला भर्ती है। उसका सुचारु रूप से इलाज किया जा रहा है। दो माह का बच्चा गर्भ में है। अल्ट्रासाउंड में धड़कन नहीं बता रहा है। ऐसे में सफाई की जानी है। शनिवार को सुबह आठ बजे ड्यूटी समाप्त कर मैं बाहर चली गई। इसके बाद डॉ. संगीता पर इलाज की जिम्मेदारी थी। उधर डा. संगीता ने कहा कि महिला का सुचारु रूप से इलाज किया जा रहा है। आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
मामला संज्ञान में आया है। मैं सरकारी कार्य से लखनऊ में हूं। संबंधित महिला का समुचित इलाज कराया जा रहा है। यह दिखवाया जाएगा कि आगे ऐसी कोई परिस्थिति न उत्पन्न होने पाए। मामले में यदि लापरवाही मिलेगी तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसपी गौतम, सीएमएस