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ससुर की हत्या में बहू को आजीवन कारावास
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अंबेडकरनगर। ससुर की हत्या में अपर जनपद न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय कमलेश कुमार मौर्य ने आरोपी बहू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। आदेश में कहा गया कि अर्थदंड न देने पर दो वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी। मामला वर्ष 2018 में जैतपुर थाना क्षेत्र का है।
वादी ऋषि लाल मौर्य ने दर्ज कराए केस में बताया कि 26 मार्च 2018 की दोपहर एक बजे करीब उसके छोटे भाई पुरुषोत्तम की पत्नी ने उसके पिता रामकुमार की संपत्ति के बंटवारे के विवाद में बांके से प्रहार कर हत्या कर दी। बताया कि सुमन बांका लेकर रामकुमार के कमरे में पहुंची और गर्दन काटकर हत्या कर दी। कहा कि जब उसने देखा तो आरोपी महिला हाथ में बाका लिए कमरे से बाहर निकल रही थी।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर नामजद केस दर्ज कर लिया था। बाद में आरोपी सुमन को जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई करते हुए अब अपर जनपद न्यायाधीश कमलेश कुमार मौर्य ने उसे हत्या का दोषी पाया। अभियुक्त के वकील ने दलील दिया कि वह उसका पहला अपराध है। तीन नाबालिग बच्चे हैं। महिला अत्यंत गरीब है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप मिश्र ने बताया कि न्यायालय ने साक्ष्यों आदि को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त महिला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कहा गया कि अर्थदंड अदा न करने पर दो वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।
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वादी ऋषि लाल मौर्य ने दर्ज कराए केस में बताया कि 26 मार्च 2018 की दोपहर एक बजे करीब उसके छोटे भाई पुरुषोत्तम की पत्नी ने उसके पिता रामकुमार की संपत्ति के बंटवारे के विवाद में बांके से प्रहार कर हत्या कर दी। बताया कि सुमन बांका लेकर रामकुमार के कमरे में पहुंची और गर्दन काटकर हत्या कर दी। कहा कि जब उसने देखा तो आरोपी महिला हाथ में बाका लिए कमरे से बाहर निकल रही थी।
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पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर नामजद केस दर्ज कर लिया था। बाद में आरोपी सुमन को जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई करते हुए अब अपर जनपद न्यायाधीश कमलेश कुमार मौर्य ने उसे हत्या का दोषी पाया। अभियुक्त के वकील ने दलील दिया कि वह उसका पहला अपराध है। तीन नाबालिग बच्चे हैं। महिला अत्यंत गरीब है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप मिश्र ने बताया कि न्यायालय ने साक्ष्यों आदि को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त महिला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। कहा गया कि अर्थदंड अदा न करने पर दो वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी।