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सिंचाई न होने से सूख रही फसलें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 11:41 PM IST
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बरसात ने बर्बाद की करोड़ों की फसल
- फोटो : अमर उजाला
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भीषण गर्मी में जलस्तर गिरने से कई नलकूपों ने पानी छोड़ दिया है, तो कई से कम पानी निकल रहा है। नहरों व माइनरों में भी पानी की जगह रेत उड़ रही है। ऐसे में बिना सिंचाई के मेंथा व गन्ने की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 14 घंटे की आपूर्ति का प्रदेश सरकार का वादा भी हवा-हवाई साबित हो रहा है।
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बमुश्किल कई चक्र में 8 से 10 घंटे की बिजली ही मिल पा रही है। नतीजा, बिजली से चलने वाले उपकरण भी साथ छोड़ रहे हैं। इससे किसानों को वैकल्पिक उपकरणों से सिंचाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। पर इसमें खर्च अधिक होने के कारण अधिकतर किसान इससे भी दूरी बनाए हुए हैं। अगर यही हाल रहा तो फसल चौपट होने से किसान बर्बाद हो जाएंगे।
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लगातार बढ़ते तापमान के कारण किसान मुश्किलों से घिर गए हैं। गेहूं की अच्छी पैदावार न होने के बीच किसानों को मेंथा व गन्ने की अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, लेकिन जिस प्रकार से आसमान से आग बरस रही है, उसने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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भीषण गर्मी के कारण एक तरफ जहां जलस्तर गिरने से विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित अधिकतर राजकीय नलकूपों ने पानी देना बंद कर दिया है, वहीं नहरों व माइनरों में पानी न होने से उसमें रेत उड़ रही है। नतीजा यह है कि किसान न तो नहर से सिंचाई कर पा रहे हैं और न ही नलकूपों का ही लाभ मिल पा रहा है।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों को 14 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का प्रदेश सरकार का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। किसानों को आठ घंटे भी बिना बाधा के बिजली नहीं मिल पा रही है। जो बिजली मिलती भी है, उसमें बार-बार की ट्रिपिंग होने से उसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।