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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Fraud attempt by fake order of SDM

एसडीएम के फर्जी आदेश से धोखाधड़ी का प्रयास

Fri, 16 Jun 2017 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Fri, 16 Jun 2017 11:45 PM IST
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एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर से सवाबीघा भूमि का नामांतरण कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। डीएम ने मामले में एसडीएम के मूल हस्ताक्षर व कथित आदेश पर दर्ज हस्ताक्षर को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने का निर्देश दिया है। पूरे प्रकरण में एसडीएम कार्यालय के एक लिपिक की भूमिका संदेश के घेरे में मानी जा रही है।

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गौरतलब है कि बीते दिनों पवित्तर नामक ग्रामीण ने तेंदुआईकला गांव की लगभग सवा बीघा भूमि पर अपना दावा करते हुए एसडीएम न्यायालय में 229 बी के तहत मुकदमा दायर किया था। गांव सभा के नामित अधिवक्ता रामअचल यादव ने 11 अगस्त 2016 को ग्रामसभा की तरफ से आपत्ति लगाते हुए कहा था कि संबंधित भूमि ग्रामसभा की मूल्यवान संपत्ति है।
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इसे किसी एक व्यक्ति के नाम इस तरह कतई नहीं दर्ज किया जा सकता। एसडीएम आलापुर रह चुके पंकज श्रीवास्तव के समक्ष भी यह मामला पेश हुआ था। वे 8 जून को आलापुर से गोरखपुर जनपद के लिए स्थानांतरित होने के बाद रिलीव हो गए।
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इसी बीच 8 जून की ही तारीख में एसडीएम के हस्ताक्षर से एक कथित आदेश पारित हो गया, जिसमें सवा बीघा भूमि का नामांतरण पवित्तर के नाम पर कर देने का उल्लेख था। एसडीएम कार्यालय से यह आदेश गत दिवस अमल दरामद के लिए तहसीलदार के पास भेजा गया। आदेश की प्रति तहसीलदार मधुसूदन आर्य ने देखा तो उन्हें इस कथित आदेश को लेकर शंका हुई।

दरअसल एसडीएम कार्यालय के एक लिपिक की भूमिका पर काफी समय से लोेगों को संदेह चला आ रहा है। तहसीलदार ने स्थानांतरित हो चुके एसडीएम से फोन पर बातचीत की तो उन्होंने ऐसा कोई आदेश करने से ही इनकार कर दिया। गोरखपुर से ही एसडीएम पंकज ने डीएम अखिलेश सिंह से फोन पर वार्ता की और उन्होंने आलापुर के पूरे कार्यकाल में 229 बी के एक भी केस में ऐसा कोई निर्णय नहीं किया है।

 
डीएम ने इस पर शुक्रवार को आलापुर तहसील से प्रकरण की पूरी पत्रावली तलब की और गहन छानबीन की। डीएम ने आलापुर एसडीएम संत कुमार व तहसीलदार मधुसूदन आर्य को निर्देश दिया किया कि स्थानांतरित हो चुके एसडीएम को बुलाकर उनका बयान दर्ज कराया जाए, और मामले की विस्तृत जांच शुरू की जाए।


डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि एसडीएम पंकज को बुलाए जाने के दौरान उनसे दो तीन हस्ताक्षर भी करवाए जाएं, और फाइल पर दर्ज कथित आदेश से जुड़े हस्ताक्षर को भी फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए। डीएम ने देरशाम अमर उजाला को बताया कि फारेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद मामले में धोखाधड़ी आदि की धाराओं में केस भी दर्ज कराया जाएगा।

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