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लाइलाज बीमारी के चलते तीन घोड़े व एक खच्चर को दी गई सजाए मौत
Updated Sun, 03 Jun 2018 11:16 PM IST
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अंबेडकरनगर। ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी से ग्रसित तीन घोड़ों व एक खच्चर को रविवार को सजा-ए-मौत दे दी गई। जिले के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली घटना है, जिसमें पशुओं को लाइलाज बीमारी के चलते मौत की नींद सुलाना पड़ा। पशु चिकित्सकों ने रविवार को भीटी के चतुरी पट्टी गांव पहुंचकर सभी चार पशुओं को एक बाग में ले जाकर पहले बेहोशी, फिर मौत का इंजेक्शन लगाया। इसके बाद उन्हें एक गड्ढे में दफन कर दिया गया। किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए अहिरौली पुलिस भी मौजूद थी। इससे पहले जब पशुओं को मौत के लिए ले जाया जाने लगा, तो उनके स्वामी व परिवारीजन फूट-फूटकर रोने लगे। दरअसल भट्ठे पर काम करने वाले इन परिवारों के लिए यह पशु ही आय का बड़ा साधन थे।
गत दिवस भीटी थाना क्षेत्र के चतुरी पट्टी स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो परिवारों के तीन घोड़ों व एक खच्चर में लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स फार्सी पाई गई थी। तय हुआ था कि बीमारी फैलने से रोकने के लिए उन्हें सजा-ए-मौत दी जाए। इसी क्रम में रविवार पूर्वान्ह उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा के नेतृत्व में पशु चिकित्सक डॉ. सुमित कुमार, डॉ. मुकेश वर्मा व डॉ. शिवकुमार वर्मा के अलावा तीन पशुधन प्रसार अधिकारी गुलाब सिंह, विनय सिंह व दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी चतुरी पट्टी गांव पहुंचे। अहिरौली एसओ भी दल-बल के साथ यहां मौजूद रहे। टीम ने भट्ठे पर रहने वाले गोंडा जिले के मूल निवासी सफारू के एक घोड़े तथा गोंडा के ही मूल निवासी इमरान अली के दो घोड़ों व एक खच्चर को अपनी अभिरक्षा में लिया और गांव स्थित नदी के किनारे एक बाग में ले गए। वहां चारों पशुओं को पहले बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। उनके बेहोश होने पर ग्लूकोज के माध्यम से उन्हें मौत की नींद सुलाने की दवा दी गई। बमुश्किल 15 मिनट में सभी चार पशुओं की मौत हो गई। इसके बाद ग्राम समाज की भूमि पर खोद गए बड़े गड्ढे में चारों पशुओं को दफन कर दिया गया। मिट्टी डालने से पहले नमक व चूूूना भी डाला गया। पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए बड़ी तादाद में आसपास के गांव के लोग भी मौजूद रहे।
विशेष किट में थी पशु चिकित्सा टीम
ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी से ग्रसित पशुओं को सजा ए मौत देने के लिए पशु चिकित्सकों ने विशेष किट का इस्तेमाल किया। सफेद रंग के ड्रेस में मौजूद पशु चिकित्सा टीम ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। इसमें बड़े लेदर शूज के हलावा चश्मा व मास्क भी शामिल था। टीम के सभी सदस्यों ने सुरक्षा संबंधी एहतियात का पूरा ध्यान दिया। यहां तक कि पास पहुंची मीडिया टीम को भी पहनने के लिए मास्क दिए गए।
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सरकार की तरफ से मिलेगी सहायता
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि शासन के निर्णय के अनुसार प्रत्येक घोड़े के लिए 25 हजार तथा खच्चर के लिए 16 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही संबंधित लोगों को इसका लाभ दिलाया जाएगा। पशुपालकों को परेशान होने की जरूरत नही है। दोनों पशुपालकों व उनके परिवारीजनों को सलाह दिया कि वे स्वयं भी आवश्यक जांच सीएमओ से मिलकर अवश्य करा लें।
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गत दिवस भीटी थाना क्षेत्र के चतुरी पट्टी स्थित एक ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो परिवारों के तीन घोड़ों व एक खच्चर में लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स फार्सी पाई गई थी। तय हुआ था कि बीमारी फैलने से रोकने के लिए उन्हें सजा-ए-मौत दी जाए। इसी क्रम में रविवार पूर्वान्ह उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा के नेतृत्व में पशु चिकित्सक डॉ. सुमित कुमार, डॉ. मुकेश वर्मा व डॉ. शिवकुमार वर्मा के अलावा तीन पशुधन प्रसार अधिकारी गुलाब सिंह, विनय सिंह व दुर्गा प्रसाद त्रिपाठी चतुरी पट्टी गांव पहुंचे। अहिरौली एसओ भी दल-बल के साथ यहां मौजूद रहे। टीम ने भट्ठे पर रहने वाले गोंडा जिले के मूल निवासी सफारू के एक घोड़े तथा गोंडा के ही मूल निवासी इमरान अली के दो घोड़ों व एक खच्चर को अपनी अभिरक्षा में लिया और गांव स्थित नदी के किनारे एक बाग में ले गए। वहां चारों पशुओं को पहले बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। उनके बेहोश होने पर ग्लूकोज के माध्यम से उन्हें मौत की नींद सुलाने की दवा दी गई। बमुश्किल 15 मिनट में सभी चार पशुओं की मौत हो गई। इसके बाद ग्राम समाज की भूमि पर खोद गए बड़े गड्ढे में चारों पशुओं को दफन कर दिया गया। मिट्टी डालने से पहले नमक व चूूूना भी डाला गया। पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए बड़ी तादाद में आसपास के गांव के लोग भी मौजूद रहे।
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विशेष किट में थी पशु चिकित्सा टीम
ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी से ग्रसित पशुओं को सजा ए मौत देने के लिए पशु चिकित्सकों ने विशेष किट का इस्तेमाल किया। सफेद रंग के ड्रेस में मौजूद पशु चिकित्सा टीम ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। इसमें बड़े लेदर शूज के हलावा चश्मा व मास्क भी शामिल था। टीम के सभी सदस्यों ने सुरक्षा संबंधी एहतियात का पूरा ध्यान दिया। यहां तक कि पास पहुंची मीडिया टीम को भी पहनने के लिए मास्क दिए गए।
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सरकार की तरफ से मिलेगी सहायता
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि शासन के निर्णय के अनुसार प्रत्येक घोड़े के लिए 25 हजार तथा खच्चर के लिए 16 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही संबंधित लोगों को इसका लाभ दिलाया जाएगा। पशुपालकों को परेशान होने की जरूरत नही है। दोनों पशुपालकों व उनके परिवारीजनों को सलाह दिया कि वे स्वयं भी आवश्यक जांच सीएमओ से मिलकर अवश्य करा लें।