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गांवों के विकास की कमान युवाओं के हाथ
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Dec 2015 11:11 PM IST
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इस चुनाव के बाद प्रधानों के चुने जाने की औसत आयु भी घटकर 40 से नीचे आ गई है। शिक्षित प्रत्याशियों ने इस बार अपनी धमक स्थापित की है। इसमें भी युवाओं का ही श्रेय मुख्य रहा। हालांकि शिक्षा का औसत जूनियर हाईस्कूल तक ही पहुंच पाया है पर इसे भी कामयाबी के तौर पर ही देखा जा रहा है।
ग्राम प्रधान चुनाव में जीत के असली नायक इस बार युवा वर्ग बनकर उभरा है। खास बात यह कि इसमें सिर्फ नवयुवक ही शामिल नहीं, युवतियों ने भी कई ग्राम पंचायत के प्रधान पद पर धमाकेदार जीत दर्ज की है।
रामनगर विकास खंड के परमेश्वरपुर ग्राम पंचायत से 24 वर्ष से भी कम उम्र में ग्राम प्रधान चुने गए अभिषेक कन्नौजिया कहते हैं कि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जितनी मजबूत होगी, देश उतना ही ज्यादा सुरक्षित होगा। विकास और संवेदना के मामलों में भी युवा अन्य की अपेक्षा ज्यादा जिम्मेदारी दिखा सकेंगे।
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कटेहरी ब्लॉक के हरिश्चंद्रपुर गांव से धमाकेदार जीत दर्ज करने वाले युवा इंद्रसेन सिंह ने कहा कि इस बार युवाओं ने पूरे जिले में ग्राम प्रधान चुनाव में जो सफलता पाई है, उसका निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम आने वाले दिनों में दिखाई पड़ेगा।
कहा कि युवाओं के लिए ग्राम पंचायत का क्षेत्र अब तक उतना ज्यादा रुचिकर नहीं था, लेकिन इस बार जो दिलचस्पी सामने दिखी है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे। इंदईपुर से जीतीं सुशीला देवी कहती हैं कि ग्राम प्रधान का यह चुनाव एक ऐसा संदेश लेकर सामने आया है, जिसके मायने सभी को अच्छी तरह समझने होंगे।
युवाओं की बड़ी तादाद में जीत ने एक तरफ जहां बेहतर माहौल की उम्मीद ग्राम पंचायतों में जगाई है, वहीं प्रधानों की औसत आयु भी घटकर 40 से कुछ नीचे आ गई है। अब तक यह औसत आयु 50 के आसपास थी। उधर शिक्षा के मामले में भी इस चुनाव में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है।
अकबरपुर, कटेहरी, भीटी, टांडा व जलालपुर आदि ब्लाकों में दर्जनों स्नातक व परास्नतक प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। कुल 930 ग्राम पंचायतों की बात की जाए, तो इंटर के ऊपर की योग्यता रखने प्रत्याशियों की तादाद ज्यादा नहीं है। फिर भी इंटर व हाईस्कूल के बहुतेरे प्रत्याशियों ने इस बार जीत दर्ज की है।
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ग्राम प्रधान चुनाव में जीत के असली नायक इस बार युवा वर्ग बनकर उभरा है। खास बात यह कि इसमें सिर्फ नवयुवक ही शामिल नहीं, युवतियों ने भी कई ग्राम पंचायत के प्रधान पद पर धमाकेदार जीत दर्ज की है।
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रामनगर विकास खंड के परमेश्वरपुर ग्राम पंचायत से 24 वर्ष से भी कम उम्र में ग्राम प्रधान चुने गए अभिषेक कन्नौजिया कहते हैं कि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जितनी मजबूत होगी, देश उतना ही ज्यादा सुरक्षित होगा। विकास और संवेदना के मामलों में भी युवा अन्य की अपेक्षा ज्यादा जिम्मेदारी दिखा सकेंगे।
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कटेहरी ब्लॉक के हरिश्चंद्रपुर गांव से धमाकेदार जीत दर्ज करने वाले युवा इंद्रसेन सिंह ने कहा कि इस बार युवाओं ने पूरे जिले में ग्राम प्रधान चुनाव में जो सफलता पाई है, उसका निश्चित तौर पर सकारात्मक परिणाम आने वाले दिनों में दिखाई पड़ेगा।
कहा कि युवाओं के लिए ग्राम पंचायत का क्षेत्र अब तक उतना ज्यादा रुचिकर नहीं था, लेकिन इस बार जो दिलचस्पी सामने दिखी है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे। इंदईपुर से जीतीं सुशीला देवी कहती हैं कि ग्राम प्रधान का यह चुनाव एक ऐसा संदेश लेकर सामने आया है, जिसके मायने सभी को अच्छी तरह समझने होंगे।
युवाओं की बड़ी तादाद में जीत ने एक तरफ जहां बेहतर माहौल की उम्मीद ग्राम पंचायतों में जगाई है, वहीं प्रधानों की औसत आयु भी घटकर 40 से कुछ नीचे आ गई है। अब तक यह औसत आयु 50 के आसपास थी। उधर शिक्षा के मामले में भी इस चुनाव में गुणात्मक सुधार देखने को मिला है।
अकबरपुर, कटेहरी, भीटी, टांडा व जलालपुर आदि ब्लाकों में दर्जनों स्नातक व परास्नतक प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। कुल 930 ग्राम पंचायतों की बात की जाए, तो इंटर के ऊपर की योग्यता रखने प्रत्याशियों की तादाद ज्यादा नहीं है। फिर भी इंटर व हाईस्कूल के बहुतेरे प्रत्याशियों ने इस बार जीत दर्ज की है।