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Ambedkar Nagar News: 180 विद्यालयों में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे
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परिषदीय विद्यालय में टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते नौनिहाल। स्रोत विभाग
अंबेडकरनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था में बड़ा अंतर है। कहीं बच्चे डेस्क-बेंच पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं तो कहीं आज भी टाट-पट्टी और चटाई पर बैठने को मजबूर हैं। खासकर सर्दियों में फर्श की ठंडक के बीच पढ़ाई करना नौनिहालों के लिए चुनौती बन जाता है।
जिले में कुल 1583 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और पीएम-श्री विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके बावजूद 180 विद्यालयों में बच्चे आंशिक रूप से डेस्क-बेंच की सुविधा से वंचित हैं। इनमें ज्यादातर प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
सुबह के समय फर्श की ठंडक बच्चों को परेशान करती है। वहीं, लंबे समय तक टाट-पट्टी या चटाई पर बैठने से उन्हें असहज स्थिति में पढ़ाई करनी पड़ती है। छोटे बच्चों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। विभाग अब शेष विद्यालयों में भी बैठने की समुचित व्यवस्था कराने की तैयारी में जुटा है।
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बजट मिलने के बाद होगी व्यवस्था
कुछ विद्यालय आंशिक रूप से डेस्क बेंच से वंचित हैं। इसे लेकर कई चरण में शासन को पत्र भेजा जा चुका है। बजट मिलने के बाद इन विद्यालय में भी व्यवस्था करा दी जाएगी। समाजसेवी संस्था व जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
डॉ. पूनम मिश्रा, बीएसए
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जिले में कुल 1583 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और पीएम-श्री विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके बावजूद 180 विद्यालयों में बच्चे आंशिक रूप से डेस्क-बेंच की सुविधा से वंचित हैं। इनमें ज्यादातर प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
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सुबह के समय फर्श की ठंडक बच्चों को परेशान करती है। वहीं, लंबे समय तक टाट-पट्टी या चटाई पर बैठने से उन्हें असहज स्थिति में पढ़ाई करनी पड़ती है। छोटे बच्चों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। विभाग अब शेष विद्यालयों में भी बैठने की समुचित व्यवस्था कराने की तैयारी में जुटा है।
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बजट मिलने के बाद होगी व्यवस्था
कुछ विद्यालय आंशिक रूप से डेस्क बेंच से वंचित हैं। इसे लेकर कई चरण में शासन को पत्र भेजा जा चुका है। बजट मिलने के बाद इन विद्यालय में भी व्यवस्था करा दी जाएगी। समाजसेवी संस्था व जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
डॉ. पूनम मिश्रा, बीएसए