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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Books are not sent to 50 percent of schools, so for

अब तक स्कूलों में पहुंची 50 प्रतिशत पुस्तकें

Wed, 08 Jul 2015 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Wed, 08 Jul 2015 11:08 PM IST
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अप्रैल माह में नया शिक्षासत्र प्रारंभ होने के बाद से अब तक छात्र-छात्राओं को न तो निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जा सकीं हैं और न ही निशुल्क ड्रेस । यही नहीं केंद्र की अतिमहत्वाकांक्षी एमडीएम योजना भी नए शिक्षासत्र में पूरी तरह धराशायी होकर रह गई है।

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हाल यह है कि वर्तमान में एक तरफ जहां 2019 विद्यालयों में अध्यनरत दो लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पुराने ड्रेस व पुरानी पुस्तकों को उपयोग कर रहे हैं वहीं 606 विद्यालयों में अध्यनरत छह हजार से अधिक छात्र-छात्राएं एमडीएम से वंचित चल रहे हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा देने व अंग्रेजी मीडियम विद्यालयों के समान शिक्षासत्र शुरू करने के लिए इस बार प्रदेश सरकार ने अप्रैल माह से ही नया शिक्षासत्र प्रारंभ करने का निर्णय लिया था। शासन के निर्देशानुसार एक अप्रैल से विद्यालय खोल तो दिए गए लेकिन तैयारी कुछ नहीं की गई।
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ना तो छात्र छात्राओं को नई निशुल्क पुस्तकें उपलब्ध हो सकीं और न ही ड्रेस। पुरानी पुस्तकों से ही जैसे तैसे पढ़ाई प्रारंभ शुरू करा दी गई। छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों को उम्मीद थी कि जब एक जुलाई को विद्यालय खुलेगा तो छात्र छात्राओं को नई पुस्तकें व ड्रेस उपलब्ध करा दी जाएंगी शासन ने भी 15 जून तक सभी जिलों में नई पुस्तकें पहुंचने व 30 जून तक सभी विद्यालयों में पुस्तकें वितरित कर दिए जाने का निर्देश दिया था।

एक जुलाई को स्कूल खुले एक सप्ताह से अधिक हो गया है लेकिन न तो बच्चों के हाथों में नई पुस्तकें आ सकी हैं न ही उन्हें पहनने के लिए नई ड्रेस ही मिल सकी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शीघ्र ही पुस्तकों का जिले में पहुंचना प्रारंभ हो जाएगा।

हालांकि किताबें कब पहुंचेंगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसके अलावा ड्रेस भी अब तक छात्र छात्राओं को नहीं मिल सकी है जबकि इसके लिए धनराशि जिले में पहुंच चुकी है। नतीजतन छात्र-छात्राएं पुराने ड्रेस व पुरानी तथा फटी पुस्तकों के साथ ही विद्यालय आ रहे हैं।


परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत छात्र छात्राओं की उपेक्षा यहीं तक सीमित नहीं है। जिले के 2019 विद्यालयों के सापेक्ष 606 विद्यालयों में अब तक एमडीएम के चूल्हे ही नहीं जल सके हैं जबकि इसके लिए लगभग 2 करोड़ रुपये विभाग को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

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