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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Blood Banks are down trouble on the Patients

मरीजों पर मुसीबत ढा रहे ब्लड बैंक

Sun, 09 Aug 2015 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर Updated Sun, 09 Aug 2015 10:58 PM IST
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यूं तो जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक की सुविधा है, लेकिन जरूरत पर यहां इतनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं कि लोग इनसे बचने के लिए ही अवैध रूप से चल रहे निजी ब्लड बैंक का सहारा लेने को विवश हैं।

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मरीजों को यह खून न सिर्फ खर्चीला पड़ता है, वरन इसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। हाल ही में टांडा के एक निजी चिकित्सालय में संक्रमित खून चढ़ा देने का विवाद सामने आया है। यह खून अवैध ब्लड बैंक से ही लिया गया था। सब कुछ स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में होने के बावजूद छापेमारी की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
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इलाज के दौरान खून की जरूरत पडने पर मरीजों को दूरदराज के जनपदों में भटकना न पड़े, इसके लिए जिला अस्पताल में दो जून 2014 को ब्लड बैंक का शुभारंभ किया गया था। लगभग 300 यूनिट वाले इस ब्लड बैंक से हालांकि अब तक 500 से अधिक मरीजों को ब्लड दिया जा चुका है
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उधार के कर्मचारियों से ही इसका संचालन होने की वजह से इसमें अपेक्षित तेजी नहीं आ पा रही है। राजकीय मेडिकल कालेज सद्दरपुर में 17 जनवरी 2012 से 100 यूनिट का ब्लड बैंक खोला गया है। यहां प्रतिमाह औसतन 60 लोगों को खून उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।

इन सबके बावजूद मरीजों को अक्सर बाहर से खून लेने की जरूरत पड़ जाती है। दरअसल इन दोनों ही सरकारी अस्पतालों में मरीजों को खून तभी मिल पाता है, जब उनके द्वारा बदले में उतनी यूनिट का खून दिया जाता है। संबंधित अस्पताल से मरीज की जरूरत के लिए डिमांड फार्म व खून का नमूना भेजा जाता है,

तभी इन दोनों सरकारी अस्पताल से एक फार्म भरवाने के बाद ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। कई बार मरीजों व तीमारदारों के पास इतनी औपचारिकता पूरी करने का समय नहीं रहता। बस इसी का फायदा निजी क्षेत्र के ब्लड बैंक द्वारा लंबे समय से उठाया जा रहा है।  

चिंताजनक पहलू यह कि स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन का गृहक्षेत्र होने के बाद भी यही के बसखारी बाजार में अवैध ढंग से खून बेचने का काम फल फूल रहा है। जिले में निजी क्षेत्र के किसी भी ब्लड बैंक को अनुमति नही है। बसखारी क्षेत्र के संबंधित पैथालोजी सेंटर को भी खून बेचने की कोई अनुमति नहीं है।

इसके बावजूद यहां काम किया जा रहा है। बताते हैं कि जिले के सभी ऐसे चिकित्सालयों के पास इस सेंटर का मोबाइल नंबर रहता है, जहां पर मरीजों के आपरेशन किए जाते हैं। आकस्मिक स्थिति में चिकित्सालयों द्वारा ही आमतौर पर बसखारी के संबंधित सेंटर का नाम सुझा दिया जाता है।


इसके बाद तीमारदार के पहुंचने पर सेंटर संचालकों द्वारा अवैध उगाही कर ब्लड संबंधित अस्पताल पर पहुंचा दिया जाता है। इस सेंटर पर न तो खून जांच की कोई सुविधा है और न ही साफ-सफाई के समुचित प्रबंध। इस गोरखधंधे की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है, लेकिन ाज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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