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शिवबाबा में मिला चलती ट्रेन से फेंके गए मासूम का शव
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अंबेडकरनगर। तीन दिन पहले ट्रेन से फेंके गए डेढ़ वर्षीय मासूम का शव शिवबाबा धाम के पास मिला। पुलिस तीन दिन से पटरियों के किनारे तलाशी अभियान चला रही थी। शव मिलने के बाद पोस्टमार्टम कराकर परिवारीजनों को सौंप दिया गया।
पश्चिम बंगाल निवासी उमा वर्मन के डेढ़ वर्षीय पुत्र को 18 सितंबर को फरक्का एक्सप्रेस की जनरल बोगी से एक सिरफिरे युवक ने नीचे फेंक दिया था। युवक की पहचान बिहार के सीतामढ़ी निवासी कमलेश के तौर पर हुई थी। अन्य यात्रियों ने आरोपी को पकड़कर जमकर पीटा। इसके बाद पुलिस को सौंप दिया था। महिला कोलकाता से दिल्ली जा रही थी। महिला के अनुसार, उसके बच्चे को कटेहरी व गोसाईगंज स्टेेशन के बीच फेंका गया। घटना के बाद से ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई थी। लखनऊ जीआरपी के सीओ ने अकबरपुर पहुंचकर हालात की समीक्षा की। केस दर्ज करने के साथ ही मासूम की तलाशी का अभियान शुरू हो गया था। पहले दिन पुलिस टीम को अंधेरा हो जाने के चलते ज्यादा समय नहीं मिला।
19 व 20 सितंबर को भारी बड़ी तादाद में पुलिस कर्मियों को अभियान में उतारा गया। टीम ने कटेहरी से गोशाईगंज के बीच पटरियों के आसपास चप्पा चप्पा छान मारा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर एक दिन पहले शुक्रवार को एक टीम ने गोसाईगंज स्टेशन से अयोध्या की तरफ, जबकि दूसरी टीम ने कटेहरी से अकबरपुर की तरफ तलाशी अभियान शुरू किया। लगभग पांच पांच किलोमीटर का यह अभियान भी शुक्रवार शाम पूरा हो गया, लेकिन मासूम नहीं मिला। शनिवार को पुलिस टीम आगे के लिए निकलती इससे पहले ही कुछ ग्रामीणों ने शिवबाबा धाम के पास मासूम का शव देख डायल 100 को सूचित किया।
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इसके बाद मौके पर जीआरपी टीम भी परिजनों को लेकर पहुंच गई। शव ट्रेन से फेंके गए मासूम का था। इसकी पहचान कर परिवारीजन फिर से रोने-पीटने लगे। पुलिस टीम ने उन्हें किसी तरह चुप कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जीआरपी प्रभारी नितेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिवारीजनों को सौंप दिया गया है।
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पश्चिम बंगाल निवासी उमा वर्मन के डेढ़ वर्षीय पुत्र को 18 सितंबर को फरक्का एक्सप्रेस की जनरल बोगी से एक सिरफिरे युवक ने नीचे फेंक दिया था। युवक की पहचान बिहार के सीतामढ़ी निवासी कमलेश के तौर पर हुई थी। अन्य यात्रियों ने आरोपी को पकड़कर जमकर पीटा। इसके बाद पुलिस को सौंप दिया था। महिला कोलकाता से दिल्ली जा रही थी। महिला के अनुसार, उसके बच्चे को कटेहरी व गोसाईगंज स्टेेशन के बीच फेंका गया। घटना के बाद से ही पुलिस टीम सक्रिय हो गई थी। लखनऊ जीआरपी के सीओ ने अकबरपुर पहुंचकर हालात की समीक्षा की। केस दर्ज करने के साथ ही मासूम की तलाशी का अभियान शुरू हो गया था। पहले दिन पुलिस टीम को अंधेरा हो जाने के चलते ज्यादा समय नहीं मिला।
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19 व 20 सितंबर को भारी बड़ी तादाद में पुलिस कर्मियों को अभियान में उतारा गया। टीम ने कटेहरी से गोशाईगंज के बीच पटरियों के आसपास चप्पा चप्पा छान मारा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस पर एक दिन पहले शुक्रवार को एक टीम ने गोसाईगंज स्टेशन से अयोध्या की तरफ, जबकि दूसरी टीम ने कटेहरी से अकबरपुर की तरफ तलाशी अभियान शुरू किया। लगभग पांच पांच किलोमीटर का यह अभियान भी शुक्रवार शाम पूरा हो गया, लेकिन मासूम नहीं मिला। शनिवार को पुलिस टीम आगे के लिए निकलती इससे पहले ही कुछ ग्रामीणों ने शिवबाबा धाम के पास मासूम का शव देख डायल 100 को सूचित किया।
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इसके बाद मौके पर जीआरपी टीम भी परिजनों को लेकर पहुंच गई। शव ट्रेन से फेंके गए मासूम का था। इसकी पहचान कर परिवारीजन फिर से रोने-पीटने लगे। पुलिस टीम ने उन्हें किसी तरह चुप कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जीआरपी प्रभारी नितेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिवारीजनों को सौंप दिया गया है।