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परिवार रजिस्टर के नाम पर बरती मनमानी ने रखी दोहरे हत्याकांड की नींव

Tue, 05 Jan 2021 11:26 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 11:26 PM IST
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Arbitration laid in the name of family register laid the foundation for double murder
अंबेडकरनगर। पंचायत चुनाव की रंजिश में हुई सगे भाइयों की हत्या मामले में जहांगीरगंज ब्लॉक प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ जब आम नागरिक परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए दर-दर की ठोकरें कई दिनों तक खाने को विवश रहता है, तब ऐसे में हत्याकांड के आरोपी अमित सिंह का नाम एक गांव से काटने के नौ दिन के भीतर ही दूसरे ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज हो जाता है। इससे ब्लॉक प्रशासन की भूमि को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। फौरी तौर पर की गई जांच को लेकर जिम्मेदार ब्लॉक कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
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दो सगे भाइयों की हत्या मामले में जहांगीरगंज ब्लॉक प्रशासन की भूमिका बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल पूरा मामला पंचायत चुनाव को लेकर जुड़ा है। जहांगीरगंज विकास खंड के बनकटा बुजुर्ग निवासी अमित सिंह इस बार मल्लूपुर मजगवां ग्राम पंचायत से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। इसके लिए उन्होंने मल्लूपुर मजगवां गांव में एक भूखंड का बैनामा करा लिया था। इसी भूखंड पर एक अस्थायी निर्माण को ही अपना घर बताकर उन्होंने परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने की सफलता हासिल कर ली।
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विवाद की शुरुआत यहीं से हुई। अब इसी को लेकर जहांगीरगंज ब्लॉक प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों का कहना है कि अमित सिंह बनकटा स्थित अपने पक्के स्थायी घर में ही प्रतिदिन निवास करते हैं। इसके बावजूद उनके आवेदन पर उस गांव के परिवार रजिस्टर से उनका नाम बगैर किसी जांच के किन परिस्थितियों में काट दिया गया। जांच करने वाले कर्मचारी आखिर कैसे गुमराह हुआ या इस मिलीभगत का शिकार हुआ कि अमित अब बनकटा में नहीं रहते। उधर एक और बड़ा सवाल यह कि मल्लूपुर मजगवां के अस्थायी निर्माण को ही घर मानते हुए आखिर कैसे इस गांव के परिवार रजिस्टर में अमित का नाम दर्ज कर लिया गया।
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यहां यह सर्वाधिक उल्लेखनीय तथ्य है कि एक तरफ जब आम नागरिक परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए लंबे समय तक भटकते रहते हैं, तो वहीं 20 अक्तूबर को बनकटा बुजुर्ग से नाम कटवाने वाले अमित सिंह ने 29 अक्तूबर को ही अपना नाम मल्लूपुर मजगवां में दर्ज करा लिया। तत्कालीन एडीओ पंचायत अजय मौर्य को मिले प्रार्थनापत्र व उस पर दिए जांच के आदेश के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी अंकुश शर्मा ने परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किया था। अब ऐसे में बनकटा से नाम काटने तथा मल्लूपुर में नाम जोड़ने में बरती गई मनमानी को लेकर लापरवाह व जिम्मेदार ब्लॉक कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग मंगलवार को ठती रही। उधर, सीडीओ घनश्याम मीणा ने कहा कि प्रकरण को देखा जा रहा है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई, तो एक्शन लिया जाएगा।
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