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Ambedkar Nagar News: नर्स से अभद्रता के आरोपी को अग्रिम जमानत
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर के एक अस्पताल में ड्यूटी के दौरान नर्स से अभद्रता, मारपीट की कोशिश और सरकारी अभिलेख फाड़ने के आरोपी बरवा नसीरपुर निवासी संदीप मिश्रा को सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर राहत प्रदान की।
मामले में नर्स ने 15 अप्रैल 2011 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 14 अप्रैल की रात करीब 10 बजे वह अस्पताल के वार्ड नंबर दो में ड्यूटी कर रही थीं। मरीजों को इंजेक्शन देने के बाद वह अपने कमरे में रजिस्टर में प्रविष्टियां कर रही थीं। इसी दौरान नशे में पहुंचे दो युवकों ने गाली-गलौज करते हुए फर्श पर थूकना शुरू कर दिया।
विरोध करने पर दोनों ड्यूटी कक्ष में घुस आए और नर्स से अभद्रता करते हुए मारपीट की कोशिश की। आरोप है कि उन्होंने रजिस्टर समेत अन्य सरकारी अभिलेख फाड़ दिए, जिससे अस्पताल का कामकाज प्रभावित हुआ। मरीजों के तीमारदारों के हस्तक्षेप पर दोनों जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। आरोपियों की पहचान संदीप मिश्रा और अंकित तिवारी के रूप में हुई थी।
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पुलिस ने मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। संदीप ने जमानत अर्जी में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह अस्पताल में भर्ती रिश्तेदारों को देखने गया था, जहां इलाज को लेकर कहासुनी हुई थी। उसने अभिलेख फाड़ने और धमकी देने के आरोपों से इन्कार किया। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम राय दिए बिना अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
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मामले में नर्स ने 15 अप्रैल 2011 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 14 अप्रैल की रात करीब 10 बजे वह अस्पताल के वार्ड नंबर दो में ड्यूटी कर रही थीं। मरीजों को इंजेक्शन देने के बाद वह अपने कमरे में रजिस्टर में प्रविष्टियां कर रही थीं। इसी दौरान नशे में पहुंचे दो युवकों ने गाली-गलौज करते हुए फर्श पर थूकना शुरू कर दिया।
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विरोध करने पर दोनों ड्यूटी कक्ष में घुस आए और नर्स से अभद्रता करते हुए मारपीट की कोशिश की। आरोप है कि उन्होंने रजिस्टर समेत अन्य सरकारी अभिलेख फाड़ दिए, जिससे अस्पताल का कामकाज प्रभावित हुआ। मरीजों के तीमारदारों के हस्तक्षेप पर दोनों जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। आरोपियों की पहचान संदीप मिश्रा और अंकित तिवारी के रूप में हुई थी।
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पुलिस ने मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। संदीप ने जमानत अर्जी में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह अस्पताल में भर्ती रिश्तेदारों को देखने गया था, जहां इलाज को लेकर कहासुनी हुई थी। उसने अभिलेख फाड़ने और धमकी देने के आरोपों से इन्कार किया। अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम राय दिए बिना अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।