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युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे टांडा के अंशू
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अंबेडकरनगर के वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिला को मिठाई खिलाते सामाजिक कार्यकर्ता अंशू सिंह बग्गा?
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। टांडा निवासी अंशू सिंह बग्गा समाजसेवा के क्षेत्र में युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बनकर उभरे हैं। महज 36 वर्ष की उम्र में 70 बार रक्तदान कर चुके हैं। बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने निशुल्क लाइब्रेरी की स्थापना की है तो वहीं तीन बीमार बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं। कोरोना काल में सैनिटाइजर व कोविड किट वितरण का काम भी अंशू व उनकी टीम के सदस्यों ने किया।
संवेदनशील क्षेत्र टांडा के रहने वाले अंशू सामाजिक सौहार्द व सेवा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कम उम्र से ही उन्होंने समाजसेवा का वीणा उठा रखा है, इससे कई अन्य लोगों को सकारात्मक प्रेरणा भी मिल रही है। अंशू दूसरों का जीवन बचाने के लिए लगातार पूरे मन से अपनी टीम के साथ तत्पर रहते हैं।
किशोरावस्था में ही उन्हें मां के ऑपरेशन के दौरान तत्कालीन फैजाबाद जनपद मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में रक्त देना पड़ा था। इसके बाद उनके मन में रक्तदान को लेकर नई तरह का जज्बा व्याप्त हो गया। इसी का नतीजा है कि वे अब तक कुल 70 बार रक्तदान कर चुके हैं। अगले कुछ दिनों में वे एक बार फिर रक्तदान करने जा रहे हैैं।
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अंशू कहते हैं कि खून देकर भी यदि हम दूसरों का जीवन बचा सकते हैं तो उससे बड़ा पुण्य कोई और नहीं है। उनके अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य की जान बचाने के लिए खून के लिए परेशान होता है तो उस समय उसकी पीड़ा हर कोई नहीं समझ सकता। जो भी व्यक्ति इस दर्द को महसूस कर ले जायेगा, वह कभी रक्तदान से पीछे नहीं हटेगा।
रक्तदान के अलावा अंशू एक कैंसर पीड़ित बच्चे का इलाज करवाने में पूरी मदद कर रहे हैं। वे इसके लिए सभी जरूरी संसाधन जुटाते हुये बेहतर इलाज सुनिश्चित करा रहे हैं। संपूर्ण रूप से दिव्यांग मासूम महक के इलाज और उसकी पढ़ाई का पूरा खर्चा अंशू की संस्था पंख ने वहन कर रखा है। सुल्तानपुर की रहने वाली मासूम वैष्णवी के इलाज का जिम्मा भी अंशू व उनकी टीम ने संभाल रखी है।
पंख उड़ान एक उम्मीद तथा खालसा दी नेम आफ ह्यूमैनिटी संस्था के नाम से अंशू व उनकी टीम किसी सरकारी या अन्य किसी संस्था की मदद के बिना जरूरतमंदों की सहायता करती रहती है। कोरोना कॉल में अंशू व उनकी टीम के सदस्यों ने गांव-गांव जाकर हजारों घरों को सैनिटाइजर व कोविड किट का वितरण किया। कोरोना काल में लंबे समय तक जागरूकता मुहिम भी चलाई गई। पौधरोपण जैसे कार्यों में भी उनकी भागीदारी हमेशा बनी रहती है।
रक्तदान को लेकर दूर करें भ्रम
सामाजिक कार्यकर्ता अंशू बग्गा युवाओं से लगातार रक्तदान के लिए अपील करते रहते हैं। वे युवाओं के बीच यह जागरूकता अभियान चला रहे हैं कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। एक नियमित अंतराल पर रक्तदान करने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। युवाओं के बीच यह समझाया जा रहा है कि रक्तदान कर हम दूसरों की जान बचाने जैसा पुनीत काम आसानी से कर सकते हैं।
छात्रों के लिए लाइब्रेरी की स्थापना
अंशू ने टांडा नगर में छात्रों की मदद के लिए निशुल्क लाइब्रेरी की स्थापना कराई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को अच्छे प्रकाशकों की किताबें व नोटस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वह कहते हैं कि तमाम ऐसे मेधावी बच्चे हैं जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छे प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं मिल पाती है। इससे उन्हें तैयारी करने में दिक्कत होती है। इसे देखते हुए ही इस लाइब्रेरी की स्थापना कराई गई है।
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संवेदनशील क्षेत्र टांडा के रहने वाले अंशू सामाजिक सौहार्द व सेवा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। कम उम्र से ही उन्होंने समाजसेवा का वीणा उठा रखा है, इससे कई अन्य लोगों को सकारात्मक प्रेरणा भी मिल रही है। अंशू दूसरों का जीवन बचाने के लिए लगातार पूरे मन से अपनी टीम के साथ तत्पर रहते हैं।
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किशोरावस्था में ही उन्हें मां के ऑपरेशन के दौरान तत्कालीन फैजाबाद जनपद मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में रक्त देना पड़ा था। इसके बाद उनके मन में रक्तदान को लेकर नई तरह का जज्बा व्याप्त हो गया। इसी का नतीजा है कि वे अब तक कुल 70 बार रक्तदान कर चुके हैं। अगले कुछ दिनों में वे एक बार फिर रक्तदान करने जा रहे हैैं।
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अंशू कहते हैं कि खून देकर भी यदि हम दूसरों का जीवन बचा सकते हैं तो उससे बड़ा पुण्य कोई और नहीं है। उनके अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य की जान बचाने के लिए खून के लिए परेशान होता है तो उस समय उसकी पीड़ा हर कोई नहीं समझ सकता। जो भी व्यक्ति इस दर्द को महसूस कर ले जायेगा, वह कभी रक्तदान से पीछे नहीं हटेगा।
रक्तदान के अलावा अंशू एक कैंसर पीड़ित बच्चे का इलाज करवाने में पूरी मदद कर रहे हैं। वे इसके लिए सभी जरूरी संसाधन जुटाते हुये बेहतर इलाज सुनिश्चित करा रहे हैं। संपूर्ण रूप से दिव्यांग मासूम महक के इलाज और उसकी पढ़ाई का पूरा खर्चा अंशू की संस्था पंख ने वहन कर रखा है। सुल्तानपुर की रहने वाली मासूम वैष्णवी के इलाज का जिम्मा भी अंशू व उनकी टीम ने संभाल रखी है।
पंख उड़ान एक उम्मीद तथा खालसा दी नेम आफ ह्यूमैनिटी संस्था के नाम से अंशू व उनकी टीम किसी सरकारी या अन्य किसी संस्था की मदद के बिना जरूरतमंदों की सहायता करती रहती है। कोरोना कॉल में अंशू व उनकी टीम के सदस्यों ने गांव-गांव जाकर हजारों घरों को सैनिटाइजर व कोविड किट का वितरण किया। कोरोना काल में लंबे समय तक जागरूकता मुहिम भी चलाई गई। पौधरोपण जैसे कार्यों में भी उनकी भागीदारी हमेशा बनी रहती है।
रक्तदान को लेकर दूर करें भ्रम
सामाजिक कार्यकर्ता अंशू बग्गा युवाओं से लगातार रक्तदान के लिए अपील करते रहते हैं। वे युवाओं के बीच यह जागरूकता अभियान चला रहे हैं कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। एक नियमित अंतराल पर रक्तदान करने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। युवाओं के बीच यह समझाया जा रहा है कि रक्तदान कर हम दूसरों की जान बचाने जैसा पुनीत काम आसानी से कर सकते हैं।
छात्रों के लिए लाइब्रेरी की स्थापना
अंशू ने टांडा नगर में छात्रों की मदद के लिए निशुल्क लाइब्रेरी की स्थापना कराई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को अच्छे प्रकाशकों की किताबें व नोटस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वह कहते हैं कि तमाम ऐसे मेधावी बच्चे हैं जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छे प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं मिल पाती है। इससे उन्हें तैयारी करने में दिक्कत होती है। इसे देखते हुए ही इस लाइब्रेरी की स्थापना कराई गई है।