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Ambedkar Nagar News: बिना पानी के सूखे अमृत सरोवर, बने खेल का मैदान
Fri, 27 Dec 2024 11:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 27 Dec 2024 11:22 PM IST
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अंबेडकरनगर। गांवों में लाखों के खर्च से बने अधिकांश अमृत सरोवर निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। देखभाल के अभाव में ज्यादातर सरोवर सूख गए हैं। साफ सफाई न होने से जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। किनारे लगी बेंच व कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐसे में इन सरोवरों से न तो पशुओं को पानी मिल पा रहा और न ही भूमिगत जलस्तर को संतुलित रखने का उद्देश्य ही पूरा हो पा रहा। सूखे पड़े सरोवर स्थल का इस्तेमाल बच्चे खेल मैदान के बतौर कर रहे हैं ।
जलस्तर को बनाए रखने व मवेशियों की सुविधा के लिए मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवरों के निर्माण की योजना संचालित है। इसके तहत अब तक लाखों रुपये खर्च कर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 190 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। सरोवर बनाने के साथ ही सौंदर्यीकरण कार्य भी निर्माण के दौरान कराया गया। इसके तहत सरोवर क्षेत्र को चारों तरफ से कंटीले तारों से घेरने के साथ ही लोगों के बैठने के लिए बेंच के साथ ही झंडारोहण स्थल भी बनाया गया। इसका उद्देश्य था कि सुबह व शाम के समय लोग सरोवर किनारे सैर कर स्वास्थ्य लाभ कर सके। लेकिन देेखभाल न होने से निर्माण कार्य पूरा होने के थोड़े समय बाद से ही इन सरोवरों की उपयोगिता समाप्त होने लगी। उपेक्षा के कारण क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक अमृत सरोवर सूख कर बदहाल हो चुके हैं। इनका पानी पूरी तरह सूख चुका है। इस कारण गांव के बच्चों ने इन तालाबों को अपना खेल मैदान बना लिया है।
अस्तित्व खो रहे अमृत सरोवर
भीटी तहसील क्षेत्र में थरिया कला ग्राम पंचायत के समरसिंहपुर में बने लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का 2022 में निर्माण कराया गया था। दो साल में ही सरोवर की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है। कुछ हिस्से में केवल कीचड़ बचा है। गांव के बच्चे तालाब की तलहटी के सूखे हुए भाग में खेलते है जबकि बचे स्थान का इस्तेमाल ग्रामीण उपले पाथने में करते हैं। इसी तरह जलालपुर तहसील क्षेत्र के रतना में बने तालाब में घटिया निर्माण के कारण सरोवर के चारों तरफ बना पथवे जगह-जगह खराब हो चुका है। राजेसुल्तानपुर के कादीफरीदपुर के चांड़ीपुर में बने अमृत सरोवर की सीढ़ी टूट चुकी है। ग्राम सचिव व संबंधित विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता से सरोवर की जमीन पर अतिक्रमण तक हो चुका है।
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जिन अमृत सरोवर की स्थिति खराब है, उसके बारे में जानकारी एकत्रित कराई जा रही है। संबंधित सचिव व प्रधान को व्यवस्था को इनकी व्यवस्था दुरुस्त बनाने का निर्देश भी दिया गया है। -अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ
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जलस्तर को बनाए रखने व मवेशियों की सुविधा के लिए मनरेगा योजना के तहत अमृत सरोवरों के निर्माण की योजना संचालित है। इसके तहत अब तक लाखों रुपये खर्च कर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 190 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा चुका है। सरोवर बनाने के साथ ही सौंदर्यीकरण कार्य भी निर्माण के दौरान कराया गया। इसके तहत सरोवर क्षेत्र को चारों तरफ से कंटीले तारों से घेरने के साथ ही लोगों के बैठने के लिए बेंच के साथ ही झंडारोहण स्थल भी बनाया गया। इसका उद्देश्य था कि सुबह व शाम के समय लोग सरोवर किनारे सैर कर स्वास्थ्य लाभ कर सके। लेकिन देेखभाल न होने से निर्माण कार्य पूरा होने के थोड़े समय बाद से ही इन सरोवरों की उपयोगिता समाप्त होने लगी। उपेक्षा के कारण क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक अमृत सरोवर सूख कर बदहाल हो चुके हैं। इनका पानी पूरी तरह सूख चुका है। इस कारण गांव के बच्चों ने इन तालाबों को अपना खेल मैदान बना लिया है।
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अस्तित्व खो रहे अमृत सरोवर
भीटी तहसील क्षेत्र में थरिया कला ग्राम पंचायत के समरसिंहपुर में बने लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का 2022 में निर्माण कराया गया था। दो साल में ही सरोवर की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है। कुछ हिस्से में केवल कीचड़ बचा है। गांव के बच्चे तालाब की तलहटी के सूखे हुए भाग में खेलते है जबकि बचे स्थान का इस्तेमाल ग्रामीण उपले पाथने में करते हैं। इसी तरह जलालपुर तहसील क्षेत्र के रतना में बने तालाब में घटिया निर्माण के कारण सरोवर के चारों तरफ बना पथवे जगह-जगह खराब हो चुका है। राजेसुल्तानपुर के कादीफरीदपुर के चांड़ीपुर में बने अमृत सरोवर की सीढ़ी टूट चुकी है। ग्राम सचिव व संबंधित विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता से सरोवर की जमीन पर अतिक्रमण तक हो चुका है।
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जिन अमृत सरोवर की स्थिति खराब है, उसके बारे में जानकारी एकत्रित कराई जा रही है। संबंधित सचिव व प्रधान को व्यवस्था को इनकी व्यवस्था दुरुस्त बनाने का निर्देश भी दिया गया है। -अवनीश कुमार श्रीवास्तव, डीपीआरओ