{"_id":"fd199b23bcaafae1d7f960d2ed9750f7","slug":"amendment-in-selection-of-kanya-vidya-dhan-yojana-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कन्या विद्याधन योजना की चयन प्रक्रिया में संशोधन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कन्या विद्याधन योजना की चयन प्रक्रिया में संशोधन
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Fri, 19 Jun 2015 11:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक कन्या विद्या धन योजना का मेधावी छात्राओं को लाभ दिलाने की प्रक्रिया में कई संशोधन किए गए हैं। पूर्व में इस योजना का लाभ दिलाने के लिए छात्राओं का चयन जिला स्तर पर किया जाता था।
विद्यालयों द्वारा भेजी गई छात्राओं की सूची का सत्यापन जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाती थी। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जाती थी। अक्सर तमाम मेधावी छात्राएं इससे वंचित रह जाती थीं, जबकि तमाम अपात्रों को योजना का लाभ मिल जाता था। इसकी शिकायतें भी होती थीं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
योजना का पात्र छात्राओं को लाभ दिलाने के लिए इस बार शासन ने चयन प्रक्रिया में कई संशोधन किए हैं। एक दिन पूर्व गुरुवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि इस बार मेधावी छात्राओं की सूची शासन स्तर पर तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
कहा गया कि यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व आईसीएसई बोर्ड की मेधावी छात्राओं के इंटरमीडिएट में प्राप्तांक के अवरोही क्रम में रखकर सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को डीएम की अध्यक्षता में गठित टीम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इनके माध्यम से सूची में चयनित छात्राओं का सत्यापन संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों द्वारा कराया जाएगा। कहा गया कि 75 प्रतिशत धनराशि में से यूपी बोर्ड की छात्राओं को लाभान्वित किया जाएगा, जबकि 25 प्रतिशत की धनराशि में से सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड की छात्राओं को मदद दी जाएगी। जो सूची शासनस्तर पर तैयार की जाएगी, उसमें 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक व 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति व जनजाति की छात्राएं होंगी।
विज्ञापन
विद्यालयों द्वारा भेजी गई छात्राओं की सूची का सत्यापन जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा की जाती थी। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जाती थी। अक्सर तमाम मेधावी छात्राएं इससे वंचित रह जाती थीं, जबकि तमाम अपात्रों को योजना का लाभ मिल जाता था। इसकी शिकायतें भी होती थीं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
विज्ञापन
योजना का पात्र छात्राओं को लाभ दिलाने के लिए इस बार शासन ने चयन प्रक्रिया में कई संशोधन किए हैं। एक दिन पूर्व गुरुवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि इस बार मेधावी छात्राओं की सूची शासन स्तर पर तैयार की जाएगी।
विज्ञापन
कहा गया कि यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड व आईसीएसई बोर्ड की मेधावी छात्राओं के इंटरमीडिएट में प्राप्तांक के अवरोही क्रम में रखकर सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को डीएम की अध्यक्षता में गठित टीम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इनके माध्यम से सूची में चयनित छात्राओं का सत्यापन संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों द्वारा कराया जाएगा। कहा गया कि 75 प्रतिशत धनराशि में से यूपी बोर्ड की छात्राओं को लाभान्वित किया जाएगा, जबकि 25 प्रतिशत की धनराशि में से सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड की छात्राओं को मदद दी जाएगी। जो सूची शासनस्तर पर तैयार की जाएगी, उसमें 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक व 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति व जनजाति की छात्राएं होंगी।